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श्रद्धालुओं को इस बार भी शनि मंदिर में नहीं दिया जाएगा प्रवेश

कल शनिश्चरी अमावस्या, मंदिर के बाहर की बेरीकेटिंग, आज शाम से तैनात होगा पुलिस बल
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

इस बार भी शनिश्चरी अमावस्या पर श्रद्धालुओं को शनि मंदिर में प्रवेश नहीं दिए जाने का फैसला प्रशासन द्वारा लिया गया है। आज सुबह अतिरिक्त पुलिस अधीक्ष अपनी टीम के साथ मंदिर की व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे थे। शाम 4 बजे बाद मंदिर में प्रवेश करने वाले रास्तों पर बेरीकेट्स लगा दिए जाएंगे वहीं पुलिस बल तैनात कर दिया जाएगा।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमरेन्द्रसिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमण के खतरे को लेकर अब भी सावधानियां बरती जा रही हैं। तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए इस बार भी शनिश्चरी अमावस्या पर श्रद्धालुओं के लिए शनि मंदिर में प्रवेश को बंद रखा जाएगा। आज सुबह मंदिर की व्यवस्थाओं का जायजा लेकर बेरीकेट्स लगाए जाना शुरू कर दिए गए हैं। शाम 4 बजे तक मंदिर में प्रवेश के सभी रास्तों को बंद किया जाएगा। श्रद्धालु मंदिर तक न पहुंच सकें इसके लिए पुलिस बल की तैनाती भी की जाएगी। रामघाट पर भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में न पहुंचे इसकी भी व्यवस्था की जा रही है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए धार्मिक स्थलों पर गाइड लाइन के अनुरूप श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जा रहा है। शनिश्चरी अमावस्या पर आस्था का सैलाब उमड़ता है। जिसको देखते हुए शनि मंदिर में श्रद्धालु बड़ी संख्या में न पहुंचे इसका निर्णय लिया गया है। जो श्रद्धालु अमावस्या का नहान और दर्शन करने के लिए मंदिर तक पहुंचेंगे उन्हें वापस लौटाया जाएगा। श्रद्धालुओं से प्रशासन की अपील है कि वह ऐसे समय में प्रशासन के निर्णय का पालन करें।

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कावड़ यात्रियों को भी अनुमति नहीं
श्रावण मास में इस बार भी कावड़ यात्रियों को जल चढ़ाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। वहीं श्रावण-भादौ मास में बाबा महाकाल के दर्शनों के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की व्यवस्था की योजना को भी तैयार किया जा रहा है। 25 जुलाई से श्रावण मास की शुरुआत हो रही है। हर वर्ष हजारों कावड़ यात्री देश की पवित्र नदियों का जल लेकर बाबा का अभिषेक करने पहुंचते हैं। कोरोना संक्रमण के चलते इस बार भी कावडिय़ों को जलाभिषेक के लिए मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। कावडिय़ों के लिए सभा मण्डप में जलपात्र लगाने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
जगन्नाथ यात्रा भी नहीं निकलेगी
12 जुलाई को इस्कॉन मंदिर से निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को भी प्रशासन ने कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते अनुमति नहीं दी है। इस्कॉन मंदिर की ओर से यात्रा निकालने की अनुमति मांगी गई थी। लेकिन प्रशासन ने मना कर दिया है। इस्कॉन मंदिर की ओर से यात्रा को निकालने के लिए कोरोना गाइड लाइन के अनुसार प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन अब तक सहमति नहीं बन पाई है। अगर अनुमति नहीं मिली तो इस्कॉन मंदिर में ही पूजा-अर्चना की जाएगी। गौरतलब है कि शहर में इस्कॉन मंदिर के साथ ही खाती समाज द्वारा भी पुराने शहर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है, उसे भी अब तक अनुमति नहीं मिल पाई है। अनुमति नहीं मिलने पर यहां भी गाइड लाइन के अनुसार मंदिर में ही दर्शन व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए की जाएगी।

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