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दबंगाई दिखाई तो हटी अवैध पार्किंग

यातायात विभाग के उपनिरीक्षक श्री पहाडिय़ा का कारनामा
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

पूरे शहर में यातायात पुलिस अलग-अलग जगह यातायात को नियंत्रित करने में लगी है। लेकिन सालों बाद भी पुलिस शहर के बेतरतीब यातायात को नियंत्रित नहीं कर पाई है। लेकिन एक अदने से अधिकारी ने जब अपनी दबंगता दिखाई तो व्यापारिक क्षेत्र में सड़क पर वर्षों से चल रहे अवैध पार्किंग को दो दिन में ही हटाकर सड़क आम लोगों के लिए सुगम कर दी गई।
यातायात थाने में उपनिरीक्षक के पद पर पदस्थ खेमराज पहाडिय़ा अपनी कड़ी कार्यवाही के लिए पूरे शहर में मशहूर हैं। जिस बीट में भी उनकी ड्यूटी लगाई जाती है वहां वे सफलता का झंडा गाढ़ देते हैं। विगत कई सालों से कोरोना काल को छोड़कर सतीगेट से लगाकर छत्रीचौक तक के व्यापारी हर आने वाले पुलिस अधीक्षक, यातायात डीएसपी, टीआई से गुहार लगाते हैं कि इस क्षेत्र की बेतरतीब यातायात व्यवस्था को सुधार जाए और रसूखदार व्यापारियों द्वारा सड़क पर अवैध पार्किंग लगाकर किए गए कब्जे को हटाया जाए। लेकिन कोई भी अधिकारी जो इस बीट में यातायात प्रभारी बनकर आता था वह दो-चार दिन ट्रेफिक सुधारकर थक जाता था। इस काम के लिए यातायात थाने के डीएसपी सुरेन्द्रपालसिंह राठौर ने पुलिस अधीक्षक सत्येन्द्र कुमार शुक्ल से मार्गदर्शन लेकर उपनिरीक्षक खेमराज पहाडिय़ा की ड्यूटी यहां लगाई। पहले दिन श्री पहाडिय़ा ने पैदल अपने जवानों के साथ कंठाल चौराहा से लगाकर छत्रीचौक तक का दौरा किया और सारे व्यापारियों को हाथ जोड़कर समझाइश दी कि वे अपने अवैध दुकानों के बाहर किए गए अतिक्रमण और सड़क पर की गई अवैध पार्किंग को हटा लें। जब व्यापारियों ने नहीं सुनी तो श्री पहाडिय़ा ने दो दिन बाद अपनी दबंगाई दिखाई। उन्होंने अवैध पार्किंग जो सड़क पर लगी थी उसे लेकर सख्ती से चालान बनाना शुरू किया और दुकानों के बाहर सामान लटकाकर पांच से सात फीट तक अवैध रूप से कब्जा करने वालों की भी रसीदें काटना शुरू की। तो सारे व्यापारी लाइन में आ गए और उन्होंने स्वत: ही अपने सामान हटाना शुरू कर दिए और सड़क पर लगी बेतरतीब दोपहिया वाहनों को भी हटा लिया। इस काम में खेमराज पहाडिय़ा को कई बार विरोध का सामना करना पड़ा। कई रसूखदार लोगों ने उनकी वर्दी उतरवाने की धमकी भी दी लेकिन वे टस से मस नहीं हुए। आज कोई भी पैदल राहगीर या दोपहिया वाहन चालक कंठाल से छत्रीचौक तक दो मिनट में आराम से वाहन चलाता हुआ पहुंच जाता है। पूर्व में इस क्षेत्र से गोपाल मंदिर तक जाने में आधे घंटे का समय लगता था और जगह जगह यातायात अवरूद्ध रहता था और व्यापारी भी राहगीरों और वाहन चालकों से दादा-पहलवानी करके मारपीट पर आमदा हो जाते थे।

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