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लॉकडाउन में कर डाला मुल्लाजी ने अवैध निर्माण

सुप्रीम कोर्ट के आदेश 500 मीटर में नक्शा पास नहीं होगा, न ही होंगे कोई भी निर्माण कार्य
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

लॉकडाउन-2 में 80 दिनों के अंदर 100 से अधिक छोटे और बड़े अवैध निर्माण कार्य नगर निगम सीमा में रसूखदार लोगों ने कर लिए। जिनमें सबसे बड़ा अवैध निर्माण कोट मोहल्ला क्षेत्र झोन क्रमांक 3 में हुआ। जहां होटल व्यवसायी मुल्लाजी ने कोर्ट की मनाही के बावजूद भी तीसरी मंजिल बना डाली। इस काम में निगम के अधिकारियों ने उसका भरपूर सहयोग किया। अब इस मामले में जिला कलेक्टर और माननीय सर्वोच्च न्यायालय की जो अवहेलना हुई है उसमें अधिकारी क्या करते हैं यह तो आने वाला समय बताएगा। लेकिन इस मुल्लाजी ने एक और निर्माण रेलवे स्टेशन के सामने भी करना शुरू कर दिया है और उसमें भी अवैध निर्माण बताया जा रहा है।
उज्जैन शहर में अवैध निर्माण करने वालों के लिए लॉकडाउन वरदान बनकर सामने आया। निगम अधिकारी आमजन को राहत पहुंचाने का काम कर रहे थे वहीं रसूखदार लोग अवैध निर्माण करके प्रशासन को मुंह चिढ़ा रहे थे। कोट मोहल्ला चौराहे पर झोन क्रमांक 3 के अंतर्गत आने वाले होटल में लॉकडान-2 में अवैध निर्माण हो गया और होटल प्लेजर लैंडमार्क के मालिक युसूफ अली बैटरीवाला ने 75 दिनों के लॉकडाउन का लाभ लेते हुए तीसरी मंजिल तान दी। इस काम में नगर निगम के भवन निर्माण से जुड़े अधिकारियों ने युसूफ अली की भरपूर मदद की। शिकायतें होने के बाद और महाकाल मंदिर से मात्र 300 मीटर की दूरी पर हुए इस अवैध निर्माण को किसी भी आला अधिकारी ने नहीं देखा। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश हैं कि महाकाल मंदिर के आसपास 500 मीटर क्षेत्र में किसी भी तरह के व्यावसायिक व रहवासी भवन निर्माण की अनुमति नहीं दी जाए और न ही इस परिधि में कोई भी अवैध निर्माण कर नहीं पाए। लेकिन युसूफ अली बैटरीवाला ने निगम के अधिकारियों को चांदी के चंद टुकड़े डालते हुए 75 दिनों तक लगातार तीसरी मंजिल में अवैध निर्माण कर लिया। इस दौरान किसी भी अधिकारी ने युसूफ अली बैटरीवाला को होटल की तीसरी मंजिल पर अवैध निर्माण के लिए कोई नोटिस जारी नहीं किया। और तो और युसूफ अली को निगम के अधिकारियों ने प्रश्रय देते हुए निर्माण के बाद न्यायालय में जाने के लिए भी भरपूर समय दिया।
पूर्व में भी कर चुका है अवैध निर्माण
टीएनसी उज्जैन ने मास्टर प्लान में अपनी बुक में स्पष्ट उल्लेख किया है कि 1992 के मास्टर प्लान में कोट मोहल्ला की जो जगह होटल प्लेजर लैंडमार्क के लिए है उस पर पार्किंग होगा। लेकिन सांठगांठ करके युसूफ अली ने यहां पर एक मंजिला, उसके बाद दूसरी मंजिल का निर्माण कर लिया जिसको वर्ष 2014 में नगर निगम अधिकारियों ने प्रतिकात्मक रूप से तोड़ा था और होटल की झालर और गैलरी को तोड़ते हुए निगम अधिकारियों ने इतिश्री कर ली थी। उसके बाद मुल्ला युसूफ अली न्यायालय में चला गया था जहां अवैध निर्माण में समझौते के लिए नगर निगम को आवेदन दिया था जहां नगर निगम ने 75 लाख रुपए का जुर्माना किया था। लेकिन उसे भी मुल्लाजी ने नहीं भरा और न्यायालय की शरण लेकर स्टे लेकर आ गया और अब तीसरी मंजिल का निर्माण सीना तानकर कर दिया।
जल्द टूटेंगे अवैध निर्माण
इस मामले में जब उज्जैन नगर पालिक निगम के भवन अधिकारी पीयूष भार्गव से चलायमान फोन पर चर्चा की तो उन्होंने बताया कि उनके संज्ञान में युसूफ अली द्वारा किए गए अवैध निर्माण का मामला सामने आया है और उसे हम शीघ्र नोटिस जारी कर रहे हैं। लेकिन मुल्ला युसूफ अली न्यायालय में चला गया है। अब उस पर जुर्माने की राशि लगाई जा रही है कि कितने क्षेत्रफल में उसने अवैध निर्माण किया है। कोरोना काल में प्रदेश सरकार ने अवैध निर्माणों पर 15 जुलाई तक रोक लगाई थी। अब शीघ्र ही इन अवैध निर्माणकर्ताओं को नोटिस जारी किया जाएगा। श्री भार्गव ने बताया कि उन्होंने युसूफ अली की होटल प्लेजर लैंडमार्क में किसी भी तरह की भवन निर्माण की अनुमति नहीं दी है।
पूर्व में कई बड़े अवैध निर्माणों को तोड़ा तो फिर युसूफ अली को प्रश्रय क्यों?
उज्जैन नगर पालिक निगम और जिला प्रशासन ने शहर में कई अवैध बड़े निर्माणों को तोड़ा था जिसमें कि होटल शांति पैलेस, होटल मन्नत गार्डन के सामने गुड्डू कलीम की होटल और इंदौर रोड स्थित गरीबों के आशियाने मोतीबाग को तोड़ा था तो फिर युसूफ अली बैटरीवाला को निगम के अधिकारी संरक्षण क्यों दे रहे हैं और उसमें दो-दो बार जब अपनी होटल मे अवैध निर्माण किया है तो उसे तोड़ते क्यों नहीं हैं। इतना ही नहीं युसूफ अली ने रेलवे स्टेशन के सामने भी एक चार मंजिला होटल बनाकर उसमें अवैध निर्माण किया है। उसे भी निगम प्रशासन क्यों नहीं तोड़ रहा है यह सोच का विषय है। उल्लेखनीय है कि पूरे उज्जैन शहर में 100 से अधिक जगह पर अवैध निर्माण हो चुके हैं। लेकिन नगर निगम के अधिकारी इन्हें अभी तक अवैध निर्माण तोडऩे के लिए नोटिस जारी नहीं कर पाए हैं। इनमें से कई अवैध निर्माण तो महाकाल सवारी मार्ग पर हुए हैं जो कि मेन रोड पर हैं। लेकिन बावजूद इसके नगर निगम के भवन निर्माण विभाग को दिखाई नहीं देता है। दूसरी ओर अगर कोई गरीब व्यक्ति अपने मकान में किसी भी तरह का छोटा-मोटा अवैध निर्माण कर लेता है तो तुरंत ही नगर निगम नोटिस जारी कर अवैध निर्माण तोड़ आता है। ऐसी ही सक्रियता बड़े अवैध निर्माण कार्यों में भी दिखाई जाना चाहिए जिससे अवैध निर्माण शहर में न हों।

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