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माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन
भगवान विष्णु इस बार 3 महीने 26 दिन शयन करेंगे। वर्ष के आरंभ में ही देवगुरु वृहस्पति और शक्र के अस्त होने के कारण पहले ही विवाह जैसे मांगलिक संस्कार के लिए कम मुहूर्त थे। मार्च में कुछ विवाह हुए और 9 अप्रैल से दोबारा लॉकडाउन लग गया। जून में थोड़ा सा ढील मिला, तो अब आगे चतुर्मास आरम्भ हो रहा है। इस तरह 2021 के ज्यादातर मुहूर्त ग्रह गोचर की स्थिति और कोरोना महामारी की भेंट चढ़ गए।
ज्योतिषाचार्यों की मानें तो चतुर्मास के बाद नवंबर में चार और दिसंबर में 13 मुहूर्त ही शादी के बचेंगे। यानी विवाह के अधिकतर मुहूर्त कोरोना की भेंट चढ़ गए। अब एक बार फिर से शहनाई, बैंड, बाजा, बारात पर ब्रेक लगने जा रहा है। हिन्दू धर्मशास्त्रों में चातुर्मास के दौरान मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योग निद्रा में विश्राम करते हैं। इस बार इस समयावधि चंद्रमा के तेज गति से तिथियों का क्षय होने से पूरे 4 महीने नहीं होकर 3 दिन की कमी रहेगी। अर्थात इस बार भगवान विष्णु 3 दिन कम सोएंगे। यह संयोग छह साल बाद पड़ा है। भगवान के शयन काल में शुभ कार्य नहीं होते। अब 18 जुलाई के बाद नवंबर में ही शादियां होगी। देवउठनी एकादशी के बाद पहला मुहूर्त 20 नवंबर को होगा। जनवरी-फरवरी 2022 में क्रमश: शुक्र और गुरु अस्त हो जाएंगे। इसके चलते वर्ष 2022 के शुरुआती महीने में केवल 6 मुहूर्त ही विवाह के मिलेंगे। ऐसे में जनेऊ, मुंडन संस्कार, विवाह आदि नहीं होंगे, लेकिन खरीदारी कर सकेंगे। चतुर्मास में शादी के अलावा जनेऊ, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश, नए कार्य की शुरुआत समेत सभी शुभ कार्य प्रतिबंधित हो जाएंगे, लेकिन खरीदारी बिक्री पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

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