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आर ओ का शुद्ध पेयजल जनता के लिए दिवास्वप्न, मटमैला पानी जनता की मजबूरी

दिवालियेपन की कगार पर परिषद कर रही पद का दुरुपयोग व फिजूलखर्च

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थांदला। पूरे प्रदेश में भरष्ट्राचार, मनमानी, अनियमितता तथा फिजूलखर्ची के कार्यो में चर्चित है या यूं कहें की सुर्खियों में। थांदला की नगर पंचायत परिषद नगर की जनता को सुविधा के नाम पर दुविधा ही दे रही है । पिछली परिषद में 14 करोड़ की नवीन नल जल योजना को प्रदेश शासन द्वारा स्वीकृत की गई थी । परिषद ने इस योजना के स्वीकृत होकर चालू किये जाने पर नगर की जनता को बड़े जोर शोर से शासन के गुणगान करते हुए शुद्ध आरओ युक्त पेयजल उपलब्ध कराने के स्वप्न भी दिखाए थे परन्तु वर्तमान परिषद के कार्यकाल में भी यह योजना अपूर्ण होकर जनता के लिए दिवास्वप्न ही साबित होकर रह गई । योजना को संचालित करने वाली एजेंसी न तो योजना को पूर्णरूपेण संचालित कर पा रही है और न जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवा पा रही है । नगर के अनेक वार्डो, मोहल्लों में शुद्ध पेयजल के स्थान पर मटमैला व बदबूदार पानी मिल रहा है । संचालन करने वाली एजेंसी द्वारा अनुबंध अनुसार जिम्मेदारी का पालन भी नही किया जा रहा है ऐसी स्थिति में परिषद के जिम्मेदार शुद्ध पेयजल के नाम पर फिजूलखर्च कर चुप्पी साधकर बैठे है ।

नलों से मिल रहा बदबूदार पानी

नगर में आरओ युक्त पानी की जगह अनेक वार्ड मोहल्लों में मटमैला व बदबूदार पानी सप्लाई किया जा रहा है । विगत एक पखवाड़े से नगर के जवाहर मार्ग लक्ष्मी बेंड वाले मोहल्ले में भी ऐसा ही पानी सप्लाई किया जा रहा है । मोहल्ले वालों के अनुसार इस बारे में नल जल सप्लाय करने वाले कर्मियों तथा नगर पंचायत में भी जाकर शिकायते की जाने के बावजूद व्यवस्था में सुधार नही किया जा रहा है । नगर पंचायत के कर्मचारियों के अनुसार उक्त मोहल्ले में पाइप लाइन में खराबी की वजह से यह समस्या आ रही है जिसे ठीक करने हेतु सम्बंधित एजेंसी को अवगत कराया गया है । मोहल्लेवासियों को शंका है कि जमीन में बिछाई गई पाइप लाइन में कही गटर का पानी शामिल होने से पानी मटमैला होकर बदबू मार रहा है जो पीने तो ठीक घरेलू उपयोग में भी लेने जैसा नही है ।

संचालन एसजेंसी नही कर रही अनुबंध का पालन

नवीन नल जल योजना के संचालन का जिम्मा जिस एजेंसी को दिया गया है उक्त एजेंसी न तो व्यवस्थित संचालन कर पा रही है और न अनुबंध अनुसार पालन कर रही है । आये दिन किसी न किसी गली मोहल्लों में गन्दा मटमैला पानी सप्लाई की शिकायत आती है परन्तु उसका त्वरित निदान नही होता है । परिषद के जिम्मेदार भी शिकायत आने पर एजेंसी के कर्मियों को निर्देश देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते है परन्तु पीछे घूमकर नही देखते है कि व्यवस्था में सुधार हुआ अथवा नही ? यही नही अनुबंध अनुसार नागरिकों को नल कनेक्शन देने के बाद उन गड्ढो के रिपेयर की जिम्मेदारी भी सम्बंधित एजेंसी की होती है परन्तु उक्त एजेंसी द्वारा केवल गड्ढे में मिट्टी भरकर इतिश्री की जा रही है ।

आरओ के नाम पर फिजूलखर्ची

वर्तमान परिषद द्वारा जनता को नवीन नल जल योजना से आरओ वाटर सप्लाय के नाम पर दिवास्वप्न दिखाने के बाद अब बेमौसम में आरओ वॉटर प्याऊ के नाम पर फिर फिजूलखर्च कर जनधन का दुरुपयोग किया जा रहा है । गर्मी का पूरा समय निकल गया परन्तु नगर परिषद ने पूरे समय मे कहि भी सार्वजनिक प्याऊ का संचालन नही किया और न आरओ वॉटर मशीन लगाई गई परन्तु अब जब बारिश का मौसम शुरू हुआ तब 8 लाख की लागत से दो आरओ वॉटर मशीनों की खरीदी कर जनधन का दुरुपयोग किया जा रहा है । आमजन के मध्य यह चर्चा है कि परिषद द्वारा यह आरओ वाटर की मशीनें गर्मी के समय लगाई जाती तो राहगीरों व यात्रियों के साथ जनता को इसका लाभ मिलता । ऊंचे दामो पर खरीदी गई इन आरओ वॉटर मशीनों का वर्षाऋतु में आखिर क्या उपयोग होगा ? इनकी खरीदी को लेकर भी जनता में तरह तरह की चर्चा व्याप्त है ।

आर्थिक स्थिति डांवाडोल

स्तानीय नगर परिषद की आर्थिक स्थिति डांवाडोल होकर दिवालियेपन जैसी है । परिषद पर लम्बे समय से बाजार का लाखो का कर्ज चल रहा है तो शासन स्तर पर भी परिषद करोड़ो के लोन कर्ज में डूबी हुई है । कर्मचारियों को पगार के लाले पड़ रहे है । स्थाई कर्मचारियों से लेकर सफाई कर्मियों, दैनिक वेतन भोगीयो को कभी भी समय पर वेतन नही मिल पाता है कभी कभी तो दो से तीन माह तक वेतन नही मिलता है । अनेक बार सफाईकर्मी वेतन नही मिलने पर काम बंद व हड़ताल, धरने का सहारा ले चुके है । अभी भी जुलाई माह आधे से अधिक गुजर जाने के बावजूद जून माह का भी वेतन कर्मचारियों को नही मिला है ऐसी स्थिति में भी परिषद की मनमानी, अनियमितता, अपव्यय व फिजुलखर्ची नही रुक रही है । अनावश्यक रूप से लाखों की कचरा पेटियां खरीद की जाकर परिषद केम्पस में पड़ी जंग खा रही है । आश्चर्य इस बात का है कि नगर के हर गली मोहल्लों में प्रतिदिन कचरा वाहन घूमकर घर घर से कचरा संग्रहित कर रहे है उसके बाद नगर के जितने चौराहे कचरा पेटियां लगाने के नही है उससे अधिक तादाद में कचरा पेटियां खरीदी कर ली गई ।
वर्तमान परिषद के कार्यकाल में खरीदी की ही जांच, स्टोर की जांच व आडिट किसी आईएएस स्तर के ऑडिटर से करवाई जाए तो बड़े पैमाने पर अनियमितता, भरष्ट्राचार, व जनधन का दुरुपयोग कर फिजूलखर्च सामने आ सकता है ।

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