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ठेकेदारों ने कलेक्टरको सौंपा ज्ञापन
उज्जैन
। विगत दिनों ठेकेदारों द्वारा अपर आयुक्त गणेश धाकड़ की शिकायत निगम आयुक्त के समक्ष की गई थी। शिकायत की निष्पक्ष जांच के लिए आयुक्त द्वारा अपर आयुक्त आरपी मिश्रा को जांच अधिकारी नियुक्त कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। अपर आयुक्त आरपी मिश्रा द्वारा की गई जांच को लेकर ठेकेदारों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर अपर आयुक्त गणेश धाकड़ के विरूद्ध की गई शिकायत की निष्पक्ष जांच जिला प्रशासन के किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराने की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया कि पिछले दिनों एक समाचार पत्र में अपर आयुक्त वित्त गणेश कुमार धाकड की जो शिकायत की गई थी उस शिकायत को नजर अंदाज कर जांच अधिकारी द्वारा शिकायत से परे बिंदुओ को जांच में उल्लेखित कर धाकड़ को क्लीनचीट देते हुए जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। समाचार पत्र में जिन बातों का उल्लेख किया गया है उसमें निम्न बिंदुओं पर विचार किया जाकर किसी वरिष्ठ अधिकारी से पुन जांच करवाई जाए। जांच अधिकारी मिश्रा द्वारा रिपोर्ट आपको प्रेषित की है। अभी तक यह जांच रिपोर्ट आपके पास है आपने इसके संबंध में समाचार पत्रों में कोई बयान जारी नहीं किया है फिर भी एक दिन पहले ही समाचार पत्र में धाकड को क्लीनचीट मिलने की खबर छप गई। इससे स्पष्ट है कि मिश्रा द्वारा धाकड़ से मिलकर एकपक्षीय जांच की जाकर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। वहीं धाकड़ के पक्ष में माहौल बनाने के लिये समाचार पत्र में क्लीनचीट संबंधित खबर छपवाई गई है। मिश्रा द्वारा जिस दिन जांच रिपोर्ट प्रेषित की गई उसी दिन धाकड़ द्वारा इसकी प्रति देने के लिए सूचना का अधिकारी अधिनियम के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया। इसकी भी जांच की भी जांच हो कि धाकड़ को कैसे पता चला कि जांच रिपोर्ट निगमायुक्त को प्रेषित हो चुकी है। जांच अधिकारी के कक्ष में धाकड़ कई बार गए जिसका पता वहां लगे सीसीटीवी कैमरों से मिल सकता है। शिकायत भ्रष्टाचार से संबंधित थी उससे हटाकर विभिन्न प्रकरणों में प्रक्रिया का उलंघन होने की जांच की गई है। मूल शिकायत के तथ्यों की जांच न कर अन्य विषय की जांच की गई है।
मिश्रा द्वारा जांच में उल्लेख किये गये प्रकरणों में जिन प्रक्रियाओं को त्रुटिपूर्ण बताया है इन प्रकरणों की निविदाओं में निविदा समिति में भी धाकड़ ने स्वयं ही अनुशंसा की है। यदि ये गलत हो तो निविदा के समय ही धाकड़ द्वारा रोका जाना चाहिए था, बाद में भुगतान के समय प्रकरणों को अनुचित धनराशि के लिये धाकड़ द्वारा रोका गया था तथा इनमें से कुछ प्रकरणों का भुगतान भी धाकड़ के हस्ताक्षर से हुआ है। मूल शिकायत यही थी जिसको संज्ञान में नहीं लिया गया। धाकड़ को क्लीन चिट देना या दोषी ठहराना निगमायुक्त के अधिकार क्षेत्र में आता है। जांच अधिकारी का कार्य शिकायत के बिंदुओ की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करना होता है। जांच अधिकारी द्वारा स्वयं ही क्लीनचीट दी है जिसकी जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराई जाए।

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