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महाकाल दर्शन के लिए उमड़ा आस्था का सैलाब

श्रावण माह का पहला सोमवार: शाम को बाबा की सवारी….

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माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन
श्रावण माह का पहला सोमवार धार्मिक नगरी में आस्था के सैलाब से भरा हुआ नजर आ रहा है। कोरोना गाइड लाइन के मुताबिक प्रशासन ने महाकाल मंदिर में प्री-बुकिंग से 5 हजार श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाना तय किया था। लेकिन आस्था देख सुबह 11 बजे तक 15 हजार श्रद्धालुओं को दर्शन कराए गए। बाबा महाकाल के दरबार सहित शहर के शिव मंदिरों में भी भक्तों की आस्था दिखाई दी है।
रविवार से श्रावण माह की शुरुआत हो गई। पहला दिन रविवार का होने पर हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे थे। आज पहला सोमवार होने पर प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा कोरोना गाइड लाइन को ध्यान में रख मंदिर में प्री-बुकिंग के माध्यम से 5 हजार श्रद्धालुओं को प्रवेश देना तय किया था। लेकिन पौ फटते ही आस्था का सैलाब मंदिर के आसपास नजर आया। जिसके चलते प्रशासन और मंदिर समिति को श्रद्धालुओं की आस्था देखते हुए सभी को प्रवेश देना पड़ गया। गाइड लाइन के मुताबिक मंदिर में दर्शन व्यवस्था सुबह 11 बजे तक रखी गई थी। उसके बाद श्रद्धालुओं का प्रवेश मंदिर में रोक दिया गया। बावजूद इसके हजारों श्रद्धालु मंदिर के आसपास नजर आ रहे थे। मार्च 2020 कोरोना संक्रमण के बाद महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सीमित नजर आ रही थी। लेकिन धार्मिक नगरी कोरोना मुक्त होने के बाद श्रावण के पहले सोमवार पर ही आस्था का बड़ा नजारा दिखाई दिया है। जिसे देख प्रशासन को आगामी दिनों में दर्शन व्यवस्था के लिए नई योजना तय करना पड़ सकती है।
प्रवेश के लिए हर कोई दिखा आतुर
सुबह से ही मंदिर के आसपास श्रद्धालु बाबा के दर्शन को आतुर नजर आ रहे थे। हर कोई मंदिर में प्रवेश करना चाहता था। प्रशासन ने मंदिर के आसपास बेरीकेट्स लगा दिए थे। जहां श्रद्धालु प्रवेश को लेकर एक-दूसरे से गुत्थम-गुत्था होते रहे। आस्था देख मंदिर में प्रवेश खोलना पड़ गया। लेकिन सभी को नंदी हॉल के बाहर से ही दर्शन का अवसर मिल पाया। गर्भगृह में पंडे-पुजारी ही मौजूद थे। आस्था की भीड़ देख श्रद्धालुओं को जल्द से जल्द दर्शन कराकर नंदी हॉल से बाहर किया जा रहा था। महाकाल मंदिर विस्तारीकरण योजना के चलते कार्य प्रगति पर है जिसके चलते कुछ अव्यवस्थाएं भी नजर आई लेकिन बाबा महाकाल की कृपा से सभी को सुगमता से दर्शन हो गए।
शाम को मनमहेश स्वरूप में महाकाल
श्रावण माह में बाबा महाकाल की सवारी प्रतिवर्ष निकाली जाती है। इस बार भी परंपरा अनुरूप शाम 4 बजे महाकाल मंदिर से बाबा की पालकी छोटे मार्ग से पूजा अर्चना के लिए रामघाट शिप्रा नदी पहुंचेगी। चांदी की पालकी में बाबा महाकाल मनमहेश स्वरूप में विराजमान होंगे। इस दौरान प्रशासन ने तय किया है कि सवारी मार्ग पर श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। लेकिन जिस तरह सुबह महाकाल मंदिर में आस्था दिखाई दी है उससे सवारी मार्ग पर श्रद्धालुओं का प्रवेश रोक पाना नामुमकिन नजर आ रहा है। इधर बाबा की पालकी रामघाट पहुंचने से पहले शिप्रा में आई बाढ़ के चलते घाट पर सफाई का काम सुबह से निगम कर्मचारियों ने शुरू कर दिया था। रविवार को शिप्रा अपने रौद्र रूप में पहुंच चुकी थी और पानी बड़े पुल से कुछ फीट ही नीचे बह रहा था।
6 सितंबर को शाही सवारी
श्रावण-भादौ मास में इस बार बाबा महाकाल की सात सवारी निकाली जाएगी। आज पहली सवारी के बाद दूसरी सवारी 2 अगस्त, तीसरी 9 अगस्त, चौथी 16 अगस्त, पांचवी 23 अगस्त, छठी 30 अगस्त और शाही सवारी 6 सितंबर को निकाली जाएगी। श्रावण-भादौ मास में प्रत्येक सोमवार महाकाल मंदिर में सुबह 6 बजे से 11 बजे तक प्री-बुकिंग करने वाले श्रद्धालुओं को ही प्रवेश दिया जाएगा। इस दौरान 250 रुपए विशेष शुल्क के साथ शीघ्र दर्शन काउंटर को बंद रखा जाएगा।

उमा ने किए दर्शन, शिवराज दोपहर में आएंगे
श्रावण मास का पहला सोमवार होने पर वीआईपी दर्शन के लिए मंत्री, नेताओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है। आज सुबह प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केन्द्रीय मंत्री उमा भारती बाबा महाकाल की आराधना के लिए मंदिर पहुंची थी। जिन्होंने गर्भगृह में बाबा का पूजन-अभिषेक किया। उमा भारती प्रतिवर्ष श्रावण मास में बाबा के दरबार पहुंचती हैं। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान भी बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भोपाल से उज्जैन के लिए रवाना हो चुके हैं। पहले हेलिकॉप्टर से उन्हें उज्जैन पहुंचना था लेकिन मौसम खराब होने की वजह से सड़क मार्ग से दोपहर में उज्जैन पहुंचेंगे।

सजे शहर के शिव मंदिर
श्रावण मास की शुरुआत होते ही शहर के शिव मंदिरों में भी आस्थावानों की भीड़ देखी जा रही है। फ्रीगंज स्थित शिव मंदिर में सुबह से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचना शुरू हो गए थे। वहीं इंदौर टेक्सटाइल्स मिल परिसर स्थित पशुपतिनाथ महादेव मंदिर पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा रही थी। शहर के अन्य शिव मंदिरों में भी साज सज्जा के साथ धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो चुकी थी। धार्मिक नगरी में श्रावण-भादौ मास के दौरान धार्मिक आयोजनों का क्रम जारी रहेगा।

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