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लेन-देन से लेकर प्रताडऩाओं की हो रही शिकायत

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माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन
भैरवगढ़ जेल में बंदियों और विचाराधीन कैदियों के साथ होने वाले बर्ताव का पिटारा खुलने लगा है। जेलर की करतूतें सामने आ रही हैं। गृहमंत्री से लेकर जेल डीजीपी और स्थानीय वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायतें हो रही हैं। आजीवन कारावास की सजा काट चुके व्यक्ति ने ईओडब्ल्यू में भी शिकायत दर्ज कराई है।
पिछले दिनों भैरवगढ़ जेल में बंद झिंझर कांड में जेल भेजी गई युवती के जमानत पर रिहा होने के बाद जेलर संतोष लडिय़ा के साथ वार्ड जेल प्रभारी सुनीता चौहान की शिकायत गोपनीय तरीके से की गई थी। जिसमें दोनों पर ज्यादती, लेनदेने और प्रताडऩा के गंभीर आरोप लगाए गए थे। जेलर की शिकायत के बाद उनकी कारगुजारियों के राज अब लगातार सामने आ रहे हैं। आजीवन कारावास की सजा काटकर रिहा हुए अनिलसिंह बैस ने भी जेलर पर लेन-देन के आरोप लगाते हुए मामले की शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर ईओडब्ल्यू तक की है। अनिलसिंह ने आरोप लगाया है कि कोरोना काल में बंदियों को कोरोना वार्ड से अलग रखने के लिए भी 10-10 हजार रुपए तक लिए गए हैं। जो बंदी रुपए नहीं दे पाता था उसे 2 माह तक कोरोना वार्ड में रखा जाता था। बंदियों को कम्बल और अंडरवियर में रहने को विवश किया जाता है वहीं मानसिक रोगियों के बीच रखा जाता है जिससे अच्छे बंदियों की मानसिक स्थिति भी बिगड़ जाती है और वह डिप्रेशन में चला जाता है।
जेल में सेनेटाइज के नाम पर फिनाइल और फिटकरी का छिड़काव किया गया वहीं केमिकल के नाम पर बिल लगाकर रूपए हड़पे गए हैं। जेल में गौशाला से लेकर बंदियों को मादक पदार्थ, बीड़ी-सिगरेट भी हजारों रुपए लेकर उपलब्ध कराने के आरोप शिकायत में दर्ज किए गए हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में जेल भेजे गए आदर्शसिंह भदौरिया ने भी जेल की कारगुजारियों के साथ जेलर संतोष कुमार लडिय़ा पर मानसिक और शारीरिक प्रताडऩा के आरोप लगाकर पेशी के दौरान मेल नर्स से धमकी दिलाने और हत्या करवाने की शिकायत भी वरिष्ठ अधिकारियों से की है।
कैदियों की शिक्षा के नाम पर बड़ा घालमेल
अनिलसिंह बैस ने आजीवन कारावास के दौरान जेल में बंद कैदियों की शिक्षा के नाम पर हो रहे घालमेल को भी उजागर करते हुए बताया कि जेल में इग्नू संस्था द्वारा अध्ययन कराया जाता है और अनपढ़ बंदियों को भी 12वीं परीक्षा दिलाकर उन्हें उत्तीर्ण करने के नाम पर भ्रष्टाचार किया जाता है। इग्नू संस्था द्वारा शासन की ओर से मिलने वाले अध्ययन फण्ड में भी जेलर से मिलीभगत कर हेराफेरी की गई है। इतना ही नहीं जेल में सब्जी, दूध के साथ उपचार के नाम पर भी जेलर द्वारा धांधलियां की गई हैं। गौशाला के दूध का क्रीम निकालकर घी बनाया जाता है जिसे बंदियों को 3 हजार रुपए किलो में दिया जाता है। असली दूध अधिकारियों के घर पहुंच जाता है। वहीं क्रीम निकले पानी जैसे दूध की चाय बंदियों को दी जाती है।
अधिकारियों ने लिया संज्ञान
जेलर के खिलाफ हो रही लगातार शिकायतों के बाद जेल प्रशासन के साथ वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय अधिकारियों ने मामले में संज्ञान लेना शुरू कर दिया है। जेलर से लिखित जवाब भी मांगा गया है। भोपाल जेल मंत्रालय ने जेलर को तलब भी किया है। जेलर ने अपने ऊपर लग रहे आरोपों को गलत बताया है लेकिन एक के बाद एक शिकायतो ंके बाद अधिकारी भी हैरत में हैं।