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दो दिन तक भक्ति में डूबा रहेगा शहर, कल बाबा महाकाल की तीसरी सवारी
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

श्रावण मास के चलते धार्मिक नगरी आस्था में डूबी नजर आ रही है। आज हरियाली अमावस्या का पर्व होने पर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा है। सुबह से शिप्रा नदी पर आस्था की डूबकी लगाई जा रही है। महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। शहर में दो दिनों तक आस्था बनी रहेगी। कल बाबा महाकाल की तीसरी सवारी निकलेगी।
आज हरियाली अमावस्या का पर्व रवि पुष्य नक्षत्र के सर्वार्थ सिद्धि योग में आया है। धार्मिक नगरी में तीज-त्योहार और पर्वों का काफी महत्व माना गया है। जिसके चलते देर रात से ही अमावस्या का नहान करने के लिए श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। आज सुबह से शिप्रा नदी रामघाट पर आस्था का नहान शुरू हो गया है। जो देर शाम तक जारी रहेगा। इस बार प्रशासन ने नहान को लेकर दिशा निर्देश जारी नहीं किए थे। जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों के साथ कई जिलों से श्रद्धालु नहान के लिए पहुंच रहे हैं। इससे पहले होने वाले नहानों पर प्रशासन ने कोरोना गाइड लाइन के चलते श्रद्धालुओं के नहान पर प्रतिबंध लगा रखा था। लेकिन पिछले एक माह से कोरोना मुक्त धार्मिक नगरी में अब आर्थिक गतिविधियों के साथ धार्मिक गतिविधियों को भी राहत दे दी गई है। जिसके चलते श्रावण मास में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता दिखाई दे रहा है। आस्था का नहान करने के बाद श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंच रहे थे। आस्था को देखते हुए प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से दर्शन की अनुमति दे दी है।
कल श्रावण मास का तीसरा सोमवार
हरियाली अमावस्या का पर्व दो तिथियों का होने पर कल भी आस्था की डूबकी जारी रहेगी। वहीं श्रावण मास का तीसरा सोमवार होने पर आस्था का सैलाब भी दिखाई देगा। पिछले दो सावन सोमवार पर महाकाल मंदिर में हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। तीसरे सोमवार पर श्रद्धालुओं की संख्या लाखों की होना प्रतीत हो रही है। बाबा महाकाल की तीसरी सवारी होने पर भी श्रद्धालु दर्शन के लिए शहर में पहुंचेंगे। प्रशासन ने लगातार श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा के इंतजामों में और अधिक वृद्धि कर दी है। मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को आसानी से दर्शन हों इसकी व्यवस्था में पुलिस और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी है।
श्रद्धालुओं के पीछे पड़ रहे फूल-प्रसादी बेचने वाले
महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देख मंदिर के आसपास फूल प्रसादी की दुकान लगाने वाले लोगों ने व्यवसाय करने के लिए युवकों को एकत्रित कर लिया है जो दुकान छोड़कर हाथों में फूल-प्रसाद की डलिया लेकर श्रद्धालुओं के पीछे दौड़ लगा रहे हैं। 10 रुपए के फूल और प्रसाद की पुडिय़ा के 200 से 250 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। मंदिर के आसपास फूल-प्रसाद और बिल्वपत्र के साथ धतुरे से बनी डलिया बेचने वालों की संख्या वहां लगी दुकानों से कहीं अधिक है। फूल-प्रसाद बेचने वाले मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के साथ जबर्दस्ती डलिया लेने की जिद भी कर रहे हैं। साथ ही दर्शन कर बाहर निकलने वाले श्रद्धालुओं को तिलक और हाथ में आस्था का धागा बांधने वालों की भीड़ भी बढ़ चुकी है। जिसके चलते श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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