Domain Registration ID: DF4C6B96B5C7D4F1AAEC93943AAFBAA6D-IN Editor - Rahul Singh Bais, Add: 10, Sudama Nagar Agar Road Ujjain M.P. India, Mob: +91- 81039-88890

रूकी बारिश, निकली धूप
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

दो दिनों से जारी बारिश आज सुबह थमी हुई नजर आई है। इस बीच सूर्यदेव भी बादलों से बाहर निकले हैं। दो दिनों की बारिश के बाद शिप्रा का जलस्तर बढ़ गया है। वहीं गंभीर डेम में भी पानी की आवक हुई है। इस बीच दिन-रात के तापमान में 3 डिग्री का अंतर रह गया था।
बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के बाद शहर में रूक-रूककर बारिश का दौर जारी है। पिछले दो दिनों से बारिश हो रही थी। जिसके चलते मौसम पूरी तरह से सुहाना हो गया था। सोमवार को दिनभर हुई बारिश के बाद आज सुबह शिप्रा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ नजर आया है। वहीं शिप्रा के घाटों पर बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नगर निगम और प्रशासन की टीम ने श्रद्धालुओं को घाटों पर जाने से रोकने के लिए मुनादी कराना शुरू कर दिया है। रविवार को शिप्रा में डूबने से तीन युवकों की मौत हो चुकी थी। शिप्रा नदी जलस्तर बढऩे से कल-कल बहती नजर आ रही है। रामघाट स्थित छोटी रपट से ऊपर पानी बह रहा है। जहां शिप्रा का जलस्तर बढ़ा है वहीं जलस्त्रोत के सबसे बड़े साधन गंभीर डेम में भी पानी की आवक शुरू हो चुकी है। पिछले 24 घंटे में 122 एमसीएफटी पानी डेम में एकत्रित हुआ है। 2250 एमसीएफटी क्षमता वाले डेम में अब 420.444 एमसीएफटी पानी एकत्रित हो चुका था। डेम में पानी बढऩे की वजह कैचमेंट एरिया में हुई बारिश को माना जा रहा है। आज सुबह भी डेम में पानी की आवक जारी थी लेकिन स्तर धीमा हो चुका था। इस बीच शहर का मौसम खुल गया था। दोपहर होने से पहले सूर्यदेव के दर्शन हो गए थे। लगातार बारिश के बाद मौसम खुलने से शहरवासियों ने भी राहत की सांस ली है। रक्षाबंधन का पर्व करीब आने पर बाजार में पानी रूकने से रौनक दिखाई देने लगी है। जीवाजी राव वेधशाला के अनुसार दो दिनों से जारी लगातार बारिश के बाद औसतन बारिश का आंकड़ा 20 इंच के करीब पहुंच चुका है। वहीं सोमवार को अधिकतम तापमान 26 डिग्री दर्ज किया गया था। न्यूनतम तापमान 23 डिग्री दर्ज हुआ है। जिसके चलते दिन-रात के तापमान में 3 डिग्री का अंतर रह गया है। सोमवार से ही हवा की रफ्तार चार किलोमीटर प्रतिघंटे की बनी हुई थी। स्थानीय वेधशाला के अनुसार आज थमी बारिश शाम तक फिर शुरू हो सकती है। मौसम साफ हुआ है लेकिन खाड़ी का सिस्टम अब भी सक्रिय है।
फसलों के लिए अमृत
फसलों के लिए बारिश अमृत साबित हुई है। जून माह में किसानों के चेहरों पर शिकन नजर आ रही थी। लेकिन जुलाई के अंतिम सप्ताह और अगस्त के प्रथम सप्ताह ने उनकी चिंता दूर कर दी है। खेतों में सोयाबीन लहलहाने लगी है।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!