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भाद्रपद माह का पहला शनि प्रदोष व्रत 4 सितंबर को

पूजन के लिए 2 घंटा 16 मिनट तक रहेगा श्रेष्ठ मुहूर्त
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत को उत्तम माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक एक माह में दो बार प्रदोष व्रत आते हैं। एक प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष में आता है तो दूसरा प्रदोष व्रत शुक्ल पक्ष में आता है। फिलहाल कृष्ण पक्ष चल रहा है और भाद्रपद महीने का पहला प्रदोष व्रत शनिवार के दिन होने के कारण इसे शनि प्रदोष व्रत भी कहा जाता है। इस बार शनि प्रदोष व्रत 4 सितंबर को होगा।
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 4 सितंबर दिन शनिवार को सुबह 8.24 मिनट पर होगा और इसका समापन 5 सितंबर को प्रात: 8.21 मिनट पर होगा। ऐसे में भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत 4 सितंबर को ही रखा जाएगा। इस दिन शनि प्रदोष की पूजा के लिए 2 घंटा 16 मिनट का मुहूर्त रहेगा। शनि प्रदोष व्रत की पूजा करने वाले श्रद्धालुओं को 4 सितंबर को शाम को 6.39 मिनट से रात 8.56 मिनट के बीच पूजा कर लेनी चाहिए। पौराणिक मान्यता है कि प्रदोष व्रतों में शनि प्रदोष व्रत का महत्व ज्यादा होता है। शनि प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति पर शिव और शक्ति दोनों की कृपा प्राप्त होती है और संतान की प्राप्ति होती है। निसंतान दंपत्तियों को शनि प्रदोष व्रत करने का विशेष लाभ होता है।

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