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जन्माष्टमी: फलों से सजी भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली

गोपाल मंदिर भी रोशनी से जगमगाया, मटकी फोड़ के होंगे कार्यक्रम, कल मनाया जाएगा उत्सव
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का धार्मिक नगरी से गहरा नाता है। सोमवार को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। जिसको लेकर धार्मिक नगरी में उत्साह दिखाई दे रहा है। भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम को फलों से सजाया जा रहा है। वहीं अतिप्राचीन गोपाल मंदिर भी रोशनी से जगमगा उठा है। आज से ही शहर में जन्माष्टमी की तैयारियां दिखाई देने लगी हैं।
शहर कोरोना से मुक्त हो चुका है लेकिन तीसरी लहर की आशंका में धार्मिक कार्यक्रम गाइड लाइन के मुताबिक ही मनाए जा रहे हैं। सोमवार को शहर में जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का शहर से काफी गहरा नाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी शिक्षा धार्मिक नगरी उज्जयिनी में की थी। इस दौरान वह गुरु सांदीपनि के आश्रम में ठहरे थे। जिसके चलते जन्माष्टमी का उत्सव सांदीपनि आश्रम में धूमधाम से मनाया जाता है। सोमवार को यहां विशेष अनुष्ठान होगा जिसको लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। आश्रम को फलों से सजाया जा रहा है। शहर में भगवान श्रीकृष्ण का प्रमुख मंदिर गोपाल मंदिर पर बना हुआ है। यहां भी सोमवार रात 12 बजे नंदोत्सव मनाया जाएगा। गोपाल मंदिर को विद्युत रोशनी से सजाया गया है। वहीं अंदर फूलों से सजावट की जा रही है। गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी के साथ ही बृजबारस मनाई जाती है। 4 सितंबर को यहां मटकी फोड़ी जाएगी। छोटा गोपाल मंदिर और शहर के अन्य कृष्ण मंदिरों में शामिल इस्कॉन मंदिर में भी नंदोत्सव की तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच चुकी हैं। नए शहर में बनाए गए इस्कॉन मंदिर में प्रतिवर्ष जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। जिसमें शामिल होने के लिए विदेशी श्रद्धालु भी पहुंचते हैं। सोमवार को होने वाले जन्माष्टमी के सभी कार्यक्रम कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए मनाए जाएंगे। इस दौरान शहर में कई स्थानों पर दही हांडी फोडऩे के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
बाबा महाकाल की सवारी का रहेगा संयोग
इस बार जन्माष्टमी सोमवार को है इस दिन बाबा महाकाल भादौ मास की दूसरी सवारी के चलते नगर भ्रमण पर निकलेंगे। सुबह से शहर में जन्माष्टमी का उल्लास शुरू हो जाएगा वहीं शाम को बाबा महाकाल की भक्ति में धार्मिक नगरी डूबी नजर आएगी। बाबा महाकाल की 6 सितंबर सोमवार को निकलने वाली शाही सवारी पर भी विशेष संयोग बन रहा है। इस दिन सोमवती अमावस्या होने पर शिप्रा के पवित्र जल में आस्था का स्नान भी होगा।

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