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ठेकेदार का भुगतान रूकवाने के लिए पूर्व अपर आयुक्त मिश्रा ने रची थी साजिश

कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश, दर्ज हो सकता है प्रकरण
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

नगर निगम के पूर्व अपर आयुक्त का एक ओर कारनामा सामने आया है, जिसमें उन्होंने अपने आर्थिक हितों की पूर्ति नही होने पर ठेकेदार को परेशान करने और उसका भुगतान रूकवाने के लिए सरकारी फाईलोंं में कूटरचित साजिश को अंजाम देते हुए फाईलों में छेड़छाड़ की। जिसकी शिकायत मुख्य सचिव और कलेक्टर तक पहुंची है।
हाल ही में शासन द्वारा निलंबित किये गये नगर निगम उज्जैन अपर आयुक्त आरपी मिश्रा ने अपने कार्यकाल के दौरान सरकारी दस्तावेजों और फाईलों में जो कूटरचना की है, उसका खुलासा हुआ है। मिश्रा ने पीएचई प्रभारी रहते हुए जलयंत्रालयों के लिए एलम खरीदने का ठेका लेने वाले ठेकेदार से आर्थिक हितों को पूरा करने की डिमांड रखी, जब उसने इंकार किया तो मिश्रा ने सरकारी फाईलों में छेड़छाड करते हुए उसका भुगतान रूकवा दिया।
पहले की अनुशंसा
आरपी मिश्रा (निलंबित) अपर आयुक्त द्वारा फाईलों में कूटरचना करने का मामला उस समय संज्ञान में आया जब निगम के पीएचई विभाग द्वारा गंभीर, गउघाट, उण्डासा, साहीबखेडी जलयंत्रालयों के एलम खरीदने की ऑनलाइन निविदा कमांक 105, 150 दिनांक 24 सितंबर 2020 से बुलाई गई थी। इसकी नोटशीट कमांक 11 पर मिश्रा द्वारा पहले बिना टीप के मेसर्स भारत एलम शाजापुर की दर स्वीकृती की अनुशंसा की गई। निविदा समिति की यह नोटशीट ई-नगरपालिका पोर्टल पर अतुल तिवारी, तत्कालीन कार्यपालन यंत्री द्वारा दिनांक 14 जनवरी 2021 को 18.10 बजे पोर्टल पर अपलोड की गई।
फिर बिल भुगतान रूकवाया
दर स्वीकृती अनुबंध कायार्देश जारी होकर सामग्री प्रदाय होने के उपरांत मेसर्स भारत एलम का प्रथम रनिंग बिल जब भुगतान स्वीकृती के लिये अपर आयुक्त आरपी मिश्रा के पास गया। जब ठेकेदार द्वज्ञरा मिश्रा की आर्थिक मंशा पूरी नही की गई तो उन्होंने निविदा समिति की नोटशीट कमांक 11 पर पूर्व में की गई अनुशंसा में स्वयं के हस्ताक्षर के उपर निविदा अवधी नियमित नही है शब्द की कूटरचना की जाकर अंकित कर दीया गया। तथा इसी आधार पर लेखाधिकारी और ऑडिटर से बिल पर आपत्ति दर्ज करा दी गई।
ऐसे हुआ खुलासा
अपर आयुक्त आरपी मिश्रा के इस कृत्य का खुलासा तब हुआ जब तत्कालीन कार्यपालन यंत्री (पीएचई) द्वारा ई-नगरपालिका पोर्टल पर दिनांक 14 जनवरी 2021 को अपलोड की गई नोटशीट की प्रति पोर्टल से निकाली गई। जो आज भी पोर्टल पर देखी जा सकती है। अपर आयुक्त आरपी मिश्रा द्वारा शासकीय दस्तावेजों में इस प्रकार कूटरचना कर शासकीय दस्तावेजों में की गई धोखाधडी की जानकारी जब ठेकेदार को लगी तो उसने इसकी शिकायत कलेक्टर आशीषसिंह के समक्ष की।
कलेक्टर ने दिये जांच के आदेश
इस पूरे प्रकरण को लेकर अपर आयुक्त आरपी मिश्रा द्वारा किये गये कारनामे की जांच के लिए कलेक्टर ने डीआईओ एनआईसी को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये है। वहीं इधर इस पूरे प्रकरण की जानकारी सामने आने के बाद निगमायुक्त क्षितिज सिंघल द्वारा संम्पूर्ण मामले की रिपोर्ट तैयार कर प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास विभाग मप्र शासन को भेजी है, जांच के बाद मिश्रा द्वारा की गई कूटरचना के लिए भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के अंतर्गत प्रकरण भी दर्ज हो सकता है।

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