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भगवान शिव-पार्वती का पूजन, निराहार रहकर रात्रि जागरण करेंगी महिलाएं
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

आज हरतालिका तीज का पर्व धार्मिक नगरी में पटनी बाजार स्थित सौभाग्येश्वर महादेव मंदिर पर मनाया जा रहा है। सुबह से ही महिलाएं पूजन के लिए पहुंच रही हैं। कोरोना गाइड लाइन के चलते महिला श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। बाहर से ही पूजा अर्चना का क्रम जारी है। आज महिलाएं रात्रि जागरण करेंगी।
हर वर्ष हरतालिका तीज का पर्व महिलाओं द्वारा उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए अखण्ड सौभाग्य की कामना करती हैं। पटनी बाजार स्थित अखंड सौभाग्येश्वर मंदिर पर भगवान शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना कर व्रत रखती हैं। इस दौरान महिला सुहागन के रूप में सुबह से लेकर देर रात तक पांच बार पूजा अर्चना में लगी रहती हैं। हरतालिका तीज के दिन महिलाएं हाथों पर मेहंदी रचाती हैं और विशेष फल की प्राप्ति के लिए शिव-पार्वती की महिमा में लीन रहती हैं। ज्योतिषियों के अनुसार इस बार हरतालिका तीज पर रवि योग का 14 साल बाद दुर्लभ संयोग पड़ रहा है। रवि योग को बेहद प्रभावशाली माना गया है। इस संयोग में रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए शिव-पार्वती की पूजा करना सही रहता है। सुहागिन महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य की कामना से और कुंवारी लड़कियां अच्छे वर के लिए व्रत रखती है। हरतालिका तीज में श्रीगणेश, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा होती है। फुलेरा बनाकर शिव-पार्वती और गणेश की प्रतिमा पर तिलक करके दूर्वा अर्पित किए जाते हैं। फिर भगवान शिव को फूल, बेलपत्र व शमीपत्री अर्पित कर और माता पार्वती को श्रृंगार का सामान चढ़ाए जाते हैं। तीनों देवताओं को वस्त्र अर्पित करने के बाद हरतालिका तीज व्रत की कथा महिलाओं द्वारा पढ़ी या सुनी जाती है। भजन गाते हुए रात्रि जागरण में व्रतधारी महिलाएं भगवान शिव की पांच बार आरती करेगी। इसके बाद श्रीगणेश की आरती करेगी और भगवान शिव व माता पार्वती की आरती उतारने के बाद भोग लगाएगी।
यह है मान्यता
इस व्रत को हरतालिका इसलिए कहा जाता है क्योंकि पार्वती की सखी उन्हें पिता को बगैर बताए हर कर जंगल में ले गई थीं। हरित अर्थात हरण करना और तालिका अर्थात सखी। पार्वती जी भगवान शिव को पति के रूप में चाहती थीं। भगवान शिव ने पार्वती के व्रत से प्रसन्न होकर वर मांगने के लिए कहा। पार्वती ने वर के रूप में शिव जी को मांग लिया। शिव ने तथास्तु कहकर पार्वती को यह वरदान दे दिया।
कल घर-घर होगी गणेश स्थापना
तीज-त्योहारों की शृंखला में कल से दस दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत हो रही है। शुभ कार्यों के प्रथम देवताओं में शामिल भगवान गणेश की घर-घर स्थापना की जाएगी। शहर में गणेशोत्सव परंपरा अनुसार तीन से दस दिनों तक मनाया जाता है। अधिकांश लोग भगवान गणेश की दस दिनों तक आराधना करते हैं। इस बार कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर को देखते हुए प्रशासन ने गणेश स्थापना की अनुमति दी है। लेकिन भव्य स्तर पर होने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाया गया है। कल से शुरू हो रहे गणेशोत्सव के चलते आज बाजार में गणेश प्रतिमाओं की दुकानें पूरी तरह से सजी नजर आ रही थी। बप्पा को घर ले जाने और दस दिनों की आराधना करने के लिए आज से ही लोग खरीददारी के लिए बाजार पहुंचने लगे थे। शहर के अतिप्राचीन विश्वप्रसिद्ध भगवान चिंतामण गणेश मंदिर पर भी गणेशोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

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