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माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन
हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास चल रहा है। इस माह में भगवान कृष्ण और गणेश की पूजा का विधान है। शास्त्रों में भाद्रपद मास में आने वाली पूर्णिमा का खास महत्व है। भाद्रपद पूर्णिमा को श्राद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन से ही पितृ पक्ष शुरू होता है। इस वर्ष 20 सितंबर को श्राद्ध पूर्णिमा पड़ रही है। पूर्णिमा से श्राद्ध की तारीख शुरू हो जाएंगी। मान्यताओं के अनुसार पंचमी, एकादशी और सर्वपितृ अमावस्या को श्राद्ध की प्रमुख तिथियां माना गया है। पूर्णिमा के दिवस चांद की पूजा की जाती है। शास्त्रों में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। इस दिन जातक पूर्णिमा का व्रत रखकर पूजा करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो पूर्वज पूर्णिमा के दिए गुजर गए हैं। उनका श्राद्ध ऋषियों को समर्पित किया जाता है। इस दिन दिवंगत की फोटो की पूजा होती है। वह पितरों के नाम से पिंड दान करना चाहिए। वह कौआ, गाय और कुत्तों को प्रसाद खिलाना चाहिए। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर खुद खाना चाहिए। पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन सत्यनारायण की पूजा करने से सभी इच्छाएं पूर्ण होती है। पूर्णिमा का व्रत रखने से घर में सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान कर दान करने का भी विशेष महत्व है।
16 दिन का होगा पितृ पक्ष
इस बार आश्विनी कृष्ण पक्ष में तृतीया की वृद्धि होने से 23 और 24 सितंबर को पितृ पक्ष तिथि मानी जाएगी। शास्त्रों में पितर ऋण तीन ऋणों में प्रमुख माना गया है। पितरों को देव की मान्यता है। उन्हें समर्पित आश्विन मास का कृष्ण पक्ष पितृ पक्ष कहा जाता है। पितृ पक्ष की समापन छह अक्टूबर सर्वपैत्री अमावस्या पर पितृ विसर्जन से होगा। इस बार आश्विन कृष्ण पक्ष में तृतीया तारीख की वृद्धि हो रही है जो 23 और 24 सितंबर को भी रहेगी। इससे पितृ पक्ष 16 दिनों का होगा।

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