Domain Registration ID: DF4C6B96B5C7D4F1AAEC93943AAFBAA6D-IN Editor - Rahul Singh Bais, Add: 10, Sudama Nagar Agar Road Ujjain M.P. India, Mob: +91- 81039-88890
News That Matters

10 दिनों तक आराधना के बाद भगवान गणेश को विदाई

शिप्रा में विसर्जन पर प्रतिबंध, फिर भी पहुंचे लोग
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

10 दिवसीय आराधना के बाद आज सुबह से भगवान गणेश को विदाई देने का समय शुरू हो गया है। प्रशासन ने शिप्रा नदी में प्रतिमा विसर्जन को लेकर प्रतिबंध लगाया है। बावजूद लोग शिप्रा के दूर-दराज छोर तक पहुंच रहे हैं। कुछ स्थानों पर नगर निगम द्वारा प्रतिमा एकत्रित की जा रही है।
भगवान गणेश शुभ कार्यों के देवताओं में प्रथम माने जाते हैं। वर्ष में एक बार 10 दिवसीय आराधना का भव्य पर्व गणेश उत्सव मनाया जाता है। 10 दिनों से घरों और सार्वजनिक स्थानों पर भगवान गणेश की आराधना का दौर जारी था। आज सुबह से बप्पा को विदाई देने का सिलसिला शुरू हो गया है। कोरोना संक्रमण काल के चलते बप्पा की विदाई में निकलने वाला भव्य चल समारोह 2 वर्षों से स्थगित है जिसके चलते बप्पा को विदाई सादगी पूर्ण तरीके से दी जा रही है। सुबह से ही लोगों ने बप्पा को विदाई देने का सिलसिला शुरू कर दिया था। भव्य पूजा अर्चना के बाद बप्पा को लोग अपने कंधे और वाहनों में रखकर विसर्जन के लिए ले जा रहे हैं। प्रशासन ने शिप्रा नदी में होने वाले विसर्जन पर प्रतिबंध लगा रखा है। हीरा मिल की चाल स्थित तालाब में विसर्जन की व्यवस्था की गई है। जहां नगर निगम की टीम तैनात है। वही विसर्जन के लिए केडी पैलेस का स्थान भी तय किया गया है। लेकिन आस्था और परंपरा शिप्रा में विसर्जन करने की चली आ रही है। सुबह से ही कई लोगों ने शिप्रा नदी के दूरदराज छोर का रुख कर लिया था। शिप्रा नदी स्थित रामघाट दत्त अखाड़ा के साथ कुछ प्रमुख घाटों पर नगर निगम और पुलिस की टीम तैनात थी। जो प्रतिमा विसर्जन करने वालों को रोक कर उनकी प्रतिमाएं अपने वाहनों में रख रही थी। प्रशासन द्वारा विसर्जन कुंड हीरा मिल पर सुबह से ही श्रद्धालु और लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था।
नहीं दिखेेगा झांकियों का कारवां
शहर में प्रतिवर्ष गणपति बप्पा की विदाई का भव्य चल समारोह निकाला जाता रहा है। विदाई की रात झिलमिल झांकियों का कारवां सड़कों पर रात भर दिखाई देता था। कोरोना संक्रमण के चलते 2 वर्षों से बप्पा की विदाई में झांकियों का कारवां नजर नहीं आ रहा है। इस बार भी बप्पा का 10 दिवसीय उत्सव धूम धाम से नहीं मनाया गया है लेकिन परंपरा को शहर वासियों ने पूरी तरह से कायम रख रखा था। आज बप्पा को विदाई भी सादगी के साथ ही दी जा रही है और अगले बरस भव्य रुप से आने की कामना हो रही है। विदित हो कि शहर में दो दशक पहले बप्पा की विदाई में निकलने वाला झिलमिल झांकियों का कारवां दूसरे दिन की सुबह तक जारी रहता था। समय के साथ उद्योग धंधे और फैक्ट्रियां बंद होने से झांकियों की चमक फीकी पड़ गई थी। बावजूद इसके कुछ विभाग और संस्थाएं परंपरा को कायम रखे हुए हैं। लेकिन 2 वर्षों से कोरोना के झांकियों की परंपरा को पूरी तरह से तोड़ दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: