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अब प्यासा नहीं रहेगा शहर, गंभीर में 1765 एमसीएफटी पानी

बारिश थमने पर शिप्रा नदी का कम हुआ जल स्तर, वर्षाकाल को 8 दिन का समय शेष
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

कुछ दिनों पहले तक मंडरा रहा जल संकट का खतरा अब पूरी तरह से दूर हो चुका है। शहर प्यासा नहीं रहेगा। जिस तरह से गंभीर डेम में जल संग्रहित हुआ है। उससे लग रहा है कि प्रतिदिन जल प्रदाय की व्यवस्था को शुरू किया जा सकता है।
पूरे वर्षाकाल में शहरवासियों ने झमाझम बारिश और 2 से 3 दिनों की झड़ी का नजारा नहीं देखा। रुक-रुक कर हुई बारिश के चलते औसतन आंकड़ा भी 3 माह गुजर जाने के बाद अब तक पूरा नहीं हो पाया है। जिसके चलते 15 दिन पूर्व तक ऐसा प्रतीत हो रहा था कि शहर में अक्टूबर माह के दूसरे सप्ताह बाद ही जल संकट गहरा जाएगा। लेकिन ऊपर आसमान में बैठे सृष्टि को चलाने वाले भगवान सबकी चिंता कर रहे थे। ऊपर वाले की मेहरबानी से लौटते मानसून के बीच बंगाल की खाड़ी में ऐसे सिस्टम सक्रिय हो गए कि प्रदेश के 52 जिलों में बारिश की शुरुआत हो गई। शहर में तेज बारिश नहीं हुई बावजूद इसके जल स्त्रोत के सबसे बड़े साधन गंभीर डेम में पानी की पूर्ति इंदौर के यशवंत सागर डैम से शुरू हो गई। 10 दिनों में ही इतना पानी संग्रहित हो गया कि पूरे वर्ष शहर को जल प्रदाय किया जा सके। आज सुबह 10 बजे तक गंभीर डेम का लेवल 1765 एनसीएफटी को पार करता नजर आ रहा था। गंभीर की क्षमता 2250 एमसीएफटी है जो अब 1 मीटर खाली नजर आ रही है। वर्षा काल को 8 दिनों का समय शेष बचा है और जिस तरह से मानसून की सक्रियता दिखाई दे रही है उससे प्रतीत हो रहा है कि गंभीर डेम के गेट भी खोले जा सकते हैं।
शिप्रा में कम हुआ जलस्तर
रुक-रुक कर हो रही बारिश और आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश के चलते 2 दिनों से शिप्रा नदी का जलस्तर भी बढ़ा हुआ नजर आ रहा था। बारिश थमने के बाद आज सुबह जलस्तर कम हुआ है। जिसके चलते घाटों पर कीचड़ दिखाई दिया। नगर निगम की टीम द्वारा सफाई अभियान चलाया गया है। शिप्रा का जलस्तर देवास और आसपास के क्षेत्रों में हुई बारिश की वजह से अब तक 6 से 7 बार बढ़ चुका है लेकिन इस बार बड़े पुल से ऊपर पानी नहीं पहुंचा है। दो बार ही छोटा पुल डूब चुका है।

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