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पीएम मोदी ने लांच किया जल जीवन मिशन एप

कहा- पानी बचाने को लेकर लोगों को अपनी आदतें बदलनी होंगी
ई दिल्ली
महात्मा गांधी जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जल जीवन मिशन एप को लांच किया। इस दौरान उन्होंने जल जीवन कोष (राष्ट्रीय जल कोष) भी लांच किया। उन्होंने इस दौरान जल जीवन मिशन के लाभार्थियों से बातचीत भी की।
पीएम मोदी ने उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तराखंड, मणिपुर और गुजरात सहित देश के पांच राज्यों में जल जीवन मिशन के लाभार्थियों के साथ बातचीत की। पीएम मोदी ने इस दौरान पानी समितियों और ग्राम पंचायतों के साथ संवाद भी किया।
पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि पूज्य बापू और लाल बहादुर शास्त्री जी इन दोनों महान व्यक्तित्वों के हृदय में भारत के गांव ही बसे थे। मुझे खुशी है कि आज के दिन देशभर के लाखों गांवों के लोग ‘ग्राम सभाओंÓ के रूप में जल जीवन संवाद कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि जल जीवन मिशन का विजन, सिर्फ लोगों तक पानी पहुंचाने का ही नहीं है। ये ष्ठद्गष्द्गठ्ठह्लह्म्ड्डद्यद्बह्यड्डह्लद्बशठ्ठ का- विकेंद्रीकरण का भी बहुत बड़ा रूश1द्गद्वद्गठ्ठह्ल है। ये ङ्कद्बद्यद्यड्डद्दद्ग ष्ठह्म्द्ब1द्गठ्ठ- ङ्खशद्वद्गठ्ठ ष्ठह्म्द्ब1द्गठ्ठ रूश1द्गद्वद्गठ्ठह्ल है। इसका मुख्य आधार, जनआंदोलन और जनभागीदारी है।
पीएम मोदी ने कहा कि गांधी जी कहते थे कि ग्राम स्वराज का वास्तविक अर्थ आत्मबल से परिपूर्ण होना है। इसलिए मेरा निरंतर प्रयास रहा है कि ग्राम स्वराज की ये सोच, सिद्धियों की तरफ आगे बढ़े। इस अधिवेशन में हिस्सा लेने से पहले मोहनदास करमचंद गांधी को हर कोई बैरिस्टर कहकर बुलाता था।
पीएम मोदी ने कहा कि हमने बहुत सी ऐसी फिल्में देखी हैं, कहानियां पढ़ी हैं, कविताएं पढ़ी हैं जिनमें विस्तार से ये बताया जाता है कि कैसे गांव की महिलाएं और बच्चे पानी लाने के लिए मीलों दूर चलकर जा रहे हैं। कुछ लोगों के मन में, गांव का नाम लेते ही यही तस्वीर उभरती है। पीएम मोदी ने आगे कहा कि लेकिन बहुत कम ही लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि आखिर इन लोगों को हर रोज किसी नदी या तालाब तक क्यों जाना पड़ता है, आखिर क्यों नहीं पानी इन लोगों तक पहुंचता? मैं समझता हूं, जिन लोगों पर लंबे समय तक नीति-निर्धारण की जिम्मेदारी थी, उन्हें ये सवाल खुद से जरूर पूछना चाहिए था।

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