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घट स्थापना के साथ शुरू हुआ शारदीय नवरात्रि महापर्व

दो साल बाद दिखाई देगी गरबों की धूम
आकर्षक विद्युत सज्जा से सजे देवी मंदिर, सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना हुआ शुरू
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

शारदीय नवरात्रि का पर्व आज से शुरू हो गया है। सर्वार्थ सिद्धि योग माता का आगमन शुभ मुहूर्त में हुआ है। सुबह घटस्थापना के साथ देवी मंदिरों में शक्ति आराधना का नजारा दिखाई देने लगा था। माता के भक्तों ने उपवास आराधना की शुरुआत कर दी है वहीं कठिन तप करते हुए पैरों से चप्पल-जूतों का 9 दिनों के लिए त्याग कर दिया है।
शक्ति आराधना और उपासना का पर्व शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होते ही सुबह 5 बजे से श्रद्धालुओं ने माता मंदिरों का रूख कर लिया था। नवरात्रि पर्व से पहले ही माता मंदिर समिति द्वारा आराधना की तैयारियां पूरी कर ली गई थी। मंदिरों को भव्य विद्युत सज्जा से जगमग किया गया है। सुबह घट स्थापना के साथ मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत हो चुकी थी। आज से 9 दिनों तक माता के भक्त कठिन तप आराधना में लीन रहेंगे।
राजा विक्रमादित्य की आराध्य देवी मां हरसिद्धि के दरबार में सुबह शुभ मुहूर्त में घट स्थापना के साथ पूजा अर्चना की गई। धार्मिक नगरी में शक्तिपीठों में शामिल मां हरसिद्धि के साथी गढ़ कालिका माता, चामुंडा माता, नगरकोट माता, बिजासन सावन भादो माता, भूखी माता, विंध्यवासिनी माता, बिजासन टेकरी पर विराजित माता, संतोषी माता, 24 खंबा स्थित महामाया महालाया माता सहित अन्य मंदिरों में 9 दिवसीय विशेष आराधना अनुष्ठान की शुरुआत हो गई है। देवी मंदिरों को विद्युत रोशनी के साथ फूलों से सजाया गया है। सर्वार्थ सिद्धि योग में माता का आगमन इस बार डोली में हुआ है। दो वर्षों से नवरात्रि का पर्व कोरोना संक्रमण के चलते धूमधाम के साथ नहीं मनाया जा रहा था। इस बार संक्रमण मुक्त धार्मिक नगरी में गरबों की भी धूम दिखाई देगी। माता की आराधना में किए जाने वाले गरबों की अनुमति रात 10 बजे तक दी गई है।
नवरात्र में 120 साल बाद पांच दिन रवि योग
आश्विन यानी क्वांर नवरात्र में इस बार 120 साल बाद पांच बार रवि योग का संयोग बन रहा है। साथ ही दो दिनों तक त्रियोग भी है। इन संयोगों को सभी तरह के कार्यों के लिए शुभ माना जा रहा है। रवि योग में किसी भी नए कार्य की शुरुआत करना अथवा स्वर्ण, रजत एवं अन्य धातुओं की खरीदारी करने से सौभाग्य बढ़ेगा। रवि योग को सूर्य से संबंधित माना जाता है। सूर्य, आत्मा का तत्व है। यदि लंबे समय से स्वास्थ्य गड़बड़ हो, हानि हो रही हो, व्यसन के कारण परेशानी हो रही हो तो रवि योग में देवी पूजन करने से परेशानी दूर होगी। नवरात्र के दौरान सर्वार्थसिद्धि, अमृत, रवि योग, द्विपुष्कर योग, त्रिपुष्कर योग भी पड़ रहा है। इन योगों में भी खरीदारी करना अथवा नया व्यवसाय करना विशेष लाभदायी माना जाता है। नवरात्र के पहले दिन जो वार पड़ता है, उस वार के अनुसार माता की सवारी होती है। देवी महात्म्य के श्लोक के में कहा गया है कि शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे च डोलायां, बुधे नौका प्रकीत्र्तिता। इस श्लोक का अर्थ है कि सोमवार-रविवार को नवरात्र पड़े तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती है। यदि शनिवार और मंगलवार को नवरात्र का शुभारंभ हो तो माता घोड़े पर आती है। गुरुवार और शुक्रवार को नवरात्र शुरू हो तो माता डोली में आती हैं। इसी तरह बुधवार को नवरात्र प्रारंभ होने पर माता नाव पर सवार होकर आती हैं। आश्विन नवरात्र का शुभारंभ गुरुवार को हो रहा है इसलिए माता डोली पर आ रही है, डोली पर मां का आना शुभदायी संकेत है।

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