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हमारी पूरी दिनचर्या में हम प्रकृति के विपरीत काम करते हैं – डॉ. रेणुका देसाई

पैर को रखो गरम सिर को रखो ठंडा।
पेट को रखो नरम और डॉक्टर को मारो डंडा।

ये है सेहत का राज़। पर क्या हम ये कर पाते हैं… नहीं, हम सुबह की शुरुआत ही गलत करते हैं। गरम पानी से नहाते हैं फिर ठंडे एयरकंडीशनर में रहते हैं। हमारी पूरी दिनचर्या में हम प्रकृति के विपरीत काम करते हैं। पैर को रखते हैं ठंडा और सिर हमेशा गरम रहता है। मोबाइल (mobile Phone) , कंप्यूटर (Computer) , टीवी (Television) और न जाने क्या – क्या उपकरण हमारे मस्तिष्क को गरम रखता है। समय से सोना और समय से जागने का नियम तो जैसे मानो हम भूल ही गए हैं। और जब ये विपरीत दिनचर्या अपनाई जाती है तो क्या होता है ? हमारा शरीर उल्टा पुल्टा काम करने लगता है। हमें एहसास भी नहीं होता की हम कैसी अंधी दौड़ में भाग रहे हैं। आईये जानते हैं स्वास्थ विशेषज्ञ डॉ. रेणुका देसाई (Health Specialist Dr. Renuka Desai), प्राकृतिक चिकित्सक (naturopath) से की क्या होता है हमारे शरीर के साथ जब हम विपरीत दिशा की ओर दौड़ते हैं…

हम हमारी जिज्ञासा शांत करने के पूर्व हमारे प्राकृतिक चिकित्सक डॉ रेणुका जी देसाई (Dr. Renuka Desai) के बारे में थोड़ा सा अपने पाठकों को जानकारी दे दें ताकि हमारे पाठक यह जान सकें कि जो विश्व भर में चिकित्सा पद्धति को अपनाया जा रहा है उसके विषय में हमें सही जानकारी प्राप्त हो रही है डॉ. रेणुका देसाई, प्रशिक्षित प्राकृतिक चिकित्सक एवं लम्बे समय से पेशेवर चिकित्सक हैं। आप क्वांटम हीलर, ज्योतिषी, रेकी मास्टर, मुनैकी हीलर, ग्राफोलॉजिस्ट, साउंड हीलिंग में विशेषज्ञता प्राप्त की है। आप स्वास्थ्य और जीवन से संबंधित उपयुक्त समाधान या व्यक्तिगत मुद्दों में किसी भी प्रकार के असंतुलन (समस्या) का हल कर सकते हैं। (Suitable solutions or personal issues related to health and life can solve any imbalance (problem).)

तो आईये हम अपने स्वस्थ जिज्ञासा को शांत करते हुए जानते हैं शारीरिक संतुलन के राज़ डॉ रेणुका जी से …. सिर गरम रहने से हमारे नाड़ी तंत्र में गड़बड़ हो जाती है। स्नायुओं को आराम नहीं मिलता। मस्तिष्क ही हमारे शरीर का कंट्रोल टावर है, और जब मस्तिष्क का तंत्र बिगड़ा तो वहां से मिलने वाले आदेश गलत होंगे जिससे हमारा पूर्ण शरीर हड़बड़ा जायेगा।

आईये जानते है कैसे?

राजा जब सही निर्णय नहीं ले पाएगा तो प्रजा कैसे ले पायेगी?
अब होता ये है कि जब हमें आराम करना चाहिए तब हम काम करते हैं और जब काम करना है तब आराम करते हैं! यही वजह है कि हम खाना समय पर नहीं खाते। देर रात खाना खाते हैं, सुबह देर से जागते हैं।
प्रकृति ने एक नियम से मनुष्य शरीर का निर्माण किया है और हम इसके विपरीत जीते हैं। शरीर का एक नियत समय होता है। कब कौनसा अवयव काम करेगा और कौनसा अवयव आराम करेगा। तो जब हम खाने के समय सोते हैं और सोने के समय पर खाते हैं तो शरीर का मैकेनिज्म गड़बड़ा जाता है। और यहीं से बिमारियों की शुरुआत होती है।
जैसे मस्तिष्क को जब आराम नहीं मिलता; तो रक्तचाप (BP) बड़ जाता है। जब गलत समय पर भोजन खाया जाता है तब पाचन संस्थान बिगड़ जाता है। समय पर नहीं सोने की वजह से मस्तिष्क की बिमारियों का शिकार होना पड़ता है। तनाव ज्यादा होने
की वजह से रक्त का बहाव सही नहीं होता और हृदय की सेहत बिगड़ जाती है।
दिनचर्या में भी शरीर की हलचल बहुत कम होती है, इस वजह से मोटापा या शरीर का फैलाव होने लगता है। जब साधारण कार या अन्य उपकरण नहीं चले तो खराब हो जाता है। हम उपकरणों का खयाल रखते हैं पर हमारे शरीर की तरफ लापरवाही
दिखाते हैं। जब भी उपकरण खराब होता है तो उसे ठीक करते हैं। शरीर जब काम नहीं करता तो हम ठीक नहीं करते, उसे चुप कराते हैं।

आईये जानते है कैसे?

शरीर में दिल (heart attack) ठीक काम नहीं कर रहा तो हम गोलियों का सहारा लेते हैं… पाचन तंत्र (Digestive System) ठीक नहीं है तो चूरन लेते हैं। हम अपने शरीर से जबरन काम करवा रहे हैं। क्या हमने कभी शरीर को समझने की कोशिश की है…नहीं!
वाहन पेट्रोल का है या डीजल का ये मालूम है, पर शरीर के लिए कौन सा भोजन उपयुक्त है ये पता नहीं ?
वाहन की समय – समय पर मेंटेनेंस तो हम करवा लेते है पर हम शरीर की क्यों नहीं करवाते? क्योंकी वाहन को खरीदा है, और तो शरीर (human body) मुफ्त का है, है ना?
तो क्या आप समझ गए शरीर (human body ) का महत्व? तो अब से शरीर का खयाल रखिए… बिना दवाइयों (without medicine) के अपनी सेहत बनाएं! प्रकृति (Nature) की शरण में आएँ! आजतक जो भी गलतियां हुई हैं उन्हें समझें और प्राकृतिक चिकित्सा (naturopathy) का सहारा लेकर अपनी सेहत को बेहतर बनाएं। प्राकृतिक चिकित्सा (naturopathy) में शरीर का संतुलन बनाया जाता है। यहां पंच महाभूतों (Panch Mahabhutas) का संतुलन होता है शरीर को पुनः स्थापित करने के लिए।
मिट्टी (earth), पानी (water), अग्नि (fire), हवा (air) एवं आकाश (space) तत्व से चिकित्सा (Treatment) की जाती है। आपके हर अंग का अध्ययन किया जाता हैं एवं चिकित्सा की जाती है। हमारे शरीर में हर तत्व को संतुलित करना आवश्यक है। हम जिस प्रकार भोजन ग्रहण करते हैं,
हमारे शरीर में आकाश तत्व कम होते जाता है। क्यों की शौच क्रिया अनियमित होती है। प्राकृतिक चिकित्सा में आकाश तत्व को बढ़ाया जाता है। जिससे हर तत्व का संतुलन होने लगता है।

आईये समझते है की अब ये कैसे संभव होता है?

आधुनिक प्राकृतिक चिकित्सा में पहले शरीर की जांच की जाती है। फिर शरीर का संतुलन कहां खोया है वो जाना जाता है। कौनसा अवयव ठीक से काम नहीं कर रहा या कौनसी नसों में रुकावट है ये आधुनिक मशीनों द्वारा जाना जाता है।
फिर एक चिकित्सा प्रणाली निश्चित की जाती है। ये चिकित्सा त्रिदिवसीय (3 दिन की) होती है। हर दिन आपको पांच घंटे का समय देना होता है। इन तीन दिनों में आपका शरीर करीब 80% तक संतुलित हो जाता है। जाने अंजाने; सभी रोग अपने आप गायब हो जाते हैं। फिर आपको मानसिक चिकित्सा के कई अनुभव दिए जाते हैं।
शारीरिक एवं मानसिक चिकित्सा एक संपूर्ण चिकित्सा आपको एक नया अनुभव देती है। आप एक नए जीवन का अनुभव करेंगे। तनाव मुक्त होंगे। शरीर हल्का महसूस होगा। उमर मानो कम हो जाती है। शरीर ज्यादा जवान दिखता है, त्वचा चमकने लगती है। ये सब संभव होता है सिर्फ तीन दिनों में। बिना दवाइयों के, बिना किसी व्यायाम के या खाने पर किसी प्रकार के पाबंदियों के।
तो क्या सोच रहे हो, जागो और प्राकृतिक चिकित्सा से अपना जीवन संवार लो।
हमारे इस चिकित्सा का विश्व भर में डंका बज रहा है दुनिया इस चिकित्सा से लाभ उठा रही है हमारे भारत में भी कई संसथान इस क्षेत्र में बहुत अच्छा काम कर रही है जिसमे मुख्य तौर पर निर्मायी आश्रम वाटिका एवं अर्थ आरोग्य चिकित्सा संसथान में ये चिकित्सा उपलब्ध है।

आप उक्त थेरोपी के बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉ रेणुका जी देसाई से सीधे संपर्क भी कर सकते है आप मुंबई के कांदिवली में अर्थ आरोग्य चिकित्सालय का संचालन कर अनगिनत मरीजों को गहन चिकित्साज्ञा समस्याओं से मुक्ति दिलाकर उनका जीवन संवार रहे है – संपर्क करने के लिए https://www.aarthaarogya.com पर विजिट कर सकते है या 8169554915 पर व्हाट्सएप और कॉल पर संपर्क कर सकते हैं।

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