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भूखी माता के क्रोध से भयभीत राजा विक्रमादित्य ने उड़द का पुतला बनाकर मां को प्रसन्न किया था…

माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन। उज्जैन पूरे देश में धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व अपने इतिहास में दर्ज कराता आया है। यहां विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल का मंदिर तो है ही साथ ही यहां 70 से अधिक देवियां उज्जयिनी के सम्राट राजा विक्रमादित्य के काल से पूर्व ही पूरे शहर में विचरण करती थीं और लोगों को कभी भयाक्रांत करती थीं तो कभी उन्हें आशीर्वाद देती थी। ऐसी ही एक देवी हैं भूखी माता महारानी जो कि शहर सीमा से बाहर चार किलोमीटर दूर शिप्रा नदी के किनारे अपने वैभव के साथ भक्तों को दर्शन देती हैं। मान्यताओं के अनुसार कई बातें भूख माता की सामने आई हैं। इतिहास से जुड़ी और लोक किवदंती के अनुसार भूखी माता महारानी अपनी 65 बहनों के साथ पूरे शहर में विचरण करती थी। कभी अठखेलियां करती थीं तो कभी क्रोध में आकर जनहानि भी कर देती थी। माताजी प्रतिदिन विक्रमादित्य राजा के जमाने में प्रजा के एक व्यक्ति का भोग लेती थी। इसी से परेशान होकर राजा विक्रमादित्य ने देवी के क्रोध से बचने और अपनी प्रजा में प्रतिदिन एक जनहानि से दुखी होकर माताजी को प्रसन्न करने की ठानी। माताजी प्रतिदिन नगर का भ्रमण करती थी और एक व्यक्ति का भक्षण करती थी। तब राजा विक्रमादित्य ने अपने दरबार के नवरत्नों से चर्चा की और चर्चा के उपरांत उड़द का एक पुतला बनवाया और इस पुतले के अंदर मीठा शहद भर दिया। माताजी आई तब उन्हें अपने सामने कपड़े मे लिपटा हुआ मानव दिखा तो माताजी ने तत्काल उसका भक्षण कर लिया। इस गरिष्ठ भोग से माताजी बहुत प्रसन्न हुई। तब उन्होंने यहां के सम्राट राजा विक्रमादित्य को वर देने की ठानी। तब राजा विक्रमादित्य भूखी माता की शरण में गए और उन्होंने वर मांगा कि हे माताजी आपके आशीर्वाद से पूरी उज्जयिनी में अमन, सुख-समृद्धि रहे और आप उज्जयिनी का भ्रमण न करें और एक स्थान पर मान-सम्मान और पूर्ण वैभव के साथ आप विराजित हों, वहां प्रतिदिन आपको भोजन राज्य की प्रजा की ओर से लगाया जाएगा। तब माताजी प्रसन्न हो गई और उन्होंने शिप्रा नदी के किनारे अपना स्थान बना लिया। और वहां अपनी बहन के साथ विराजमान हो गई। वर्तमान में यह स्थान नृसिंह घाट के पास बडऩगर रोड के समीप है। यहां पर पशु बलि प्रतिदिन मन्नतधारियों द्वारा दी जाती है वहीं माताजी को रोजाना भक्तजन मद्यपान कराते हैं। यह स्थान तांत्रिक सिद्धि के रूप में चमत्कारिक होने के कारण यहां पर पूरी नवरात्रि के दौरान देशभर से आए तांत्रिक यहां तंत्रसाधना कर माताजी को प्रसन्न करके उनसे सिद्धियां प्राप्त करते हैं। यहां पर नवरात्रि में भण्डारे का आयोजन मंदिर समिति की ओर से किया जाता है।

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