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बुरी हवा को नगर के द्वार पर ही रोक देती है नगरकोट रानी

नवरात्रि पर्व में हजारों भक्त आ रहे दर्शन करने
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन।
शिव की नगरी और शक्ति के पुण्य प्रताप पर टिकी तीर्थ नगरी उज्जैन चमत्कारों और पुराणों में उल्लेखित होने के साथ साथ कई मान्यताओं विख्यात है। शहर में चौसठयोगिनी, 56 भैरव, शक्तिपीठ और स्वयं आदिदेव महाकाल यहां विराजित हैं। महाकाल के आदेश पर नगर की सुरक्षा के लिये मातृ शक्ति ने अपने स्थानों को चयन कर स्वयं विराजित हुई हैं। इसमें से एक नगर कोट की महारानी का इतिहास भी रक्षा की देवी के रूप में बताया गया है। महाकाल की नगरी की सुरक्षा के लिये स्वयं महाकाल ही सक्षम हैं। फिर भी वास्तु और अन्य कारणों के लिये महाकाल ने अपने आसपास के परकोटों पर शक्ति एवं भैरव की स्थापनाएं की हैं। ऐसे ही नगर की सुरक्षा के लिये नगर कोट की रानी विराजित हैं। शहर की रक्षा और सुरक्षा का दायित्व इन्हीं के हाथों में है। विक्रम कालीन यह मंदिर की मान्यता है कि यहां कई राजा महाराजाओं ने भी अपनी मनोकामना पूर्ण के लिये सालों तपस्या की है। माता की पूजा में तंत्र, मंत्र सिद्ध करना और शहर पर होने वाली विपदा का टालने की पूजन विशेष तौर पर की जाती है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि सैकड़ों वर्ष पुराने इस मंदिर में विराजित नगर कोट की रानी का एक नाम पदमवती भी है। यह मंदिर विश्व में दो ही जगह स्थापित है। पहला हिमाचल में है और दूसरा मंदिर तीर्थ नगरी उज्जैन में है। मान्यता अनुसार इस मंदिर में दूर से दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर यहां आते हैं मनोकामना पूर्ण होने पर माता से किया वादा पूरा करते हैं।

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