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ईमानदारी दिखाई तो बेईमान हो गए, अगर बेईमानी दिखाते तो ईमानदार कहलाते

मामला: उमा-सांझी उत्सव के दौरान कथित रूप से डीजल चोरी होने का
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

नगर निगम का फायर ब्रिगेड इन दिनों तथाकथित डीजल चोरी के आरोपों का सामना कर रहा है और फायर अधिकारी अलग-अलग लोगों को अपने कर्मचारियों की ईमानदारी की सफाई दे रहे हैं। लेकिन कुछ लोग हैं कि सच को झूठ बनाने पर आमादा हैं।
विगत 7 अक्टूबर को भगवान महाकालेश्वर मंदिर से मां पार्वती की पालकी उमा-सांझी महोत्सव के समापन को लेकर रामघाट पर आ रही थी। नगर में बिना बारिश के विगत 18 दिनों से शिप्रा मैया रामघाट से 5-6 फीट ऊपर अनवरत बह रही थी। उमा-सांझी की पालकी के रामघाट पहुंचने से पूर्व घाट पर सफाई व्यवस्था के निर्देश जिलाधीश और निगम आयुक्त ने फायर ब्रिगेड अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दिए थे। इसी तारतम्य में फायर ब्रिगेड कार्यालय नजरअली मिल से फायर फायटर को लेकर उसका चालक जयसिंह रामघाट पर पहुंचा था। उसे मौलाना मौज की दरगाह से झालरिया मठ तक फायर फायटर से घाट की धुलाई करना थी। वहीं पर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग का मेट नीरज पथरोड़ भी चार डीजल पंप लेकर धुलाई कर रहा था। उसी दौरान एक डीजल पंप से डीजल खत्म हो गया तो उसने फायर फायटर के चालक जयसिंह से अनुरोध किया कि हमें एक घंटे में मौलाना मौज से झालरिया मठ तक धुलाई करना है और एक पंप बंद हो चुका है, वरिष्ठ अधिकारियों का आदेश है कि सफाई कार्य आधे घंटे में पूरा करें क्योंकि माता पार्वती की पालकी आ रही है। तब अपने विभाग का सहयोग करते हुए फायर फायटर के चालक जयसिंह ने मेट नीरज पथरोड़ से कहा कि अगर कहीं आसपास डीजल की केन हो तो ले आए वह उसे 5 लीटर डीजल दे देगा। तब पथरोड़ कहीं से मांगकर 20 लीटर की केन ले आया। तब ड्रायवर जयसिंह ने उसे 5 लीटर डीजल दे दिया और अपने विभाग का सहयोग कर दिया। उस दौरान घाट पर 50 से अधिक पुलिसकर्मी, नगर निगम अधिकारी, जिला प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद थे। लेकिन कोई शरारती तत्व इस दौरान अपने मोबाइल के कैमरे से इस घटनाक्रम को कैद कर रहा था और उसने इस घटना को सोशल मीडिया पर झूठ के रूप में इतना फैला दिया कि वह 8 अक्टूबर को सुबह सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया की प्रमुख खबर बन गया और जो फायर फायटर का ईमानदार ड्रायवर जयसिंह अपने विभाग की मदद करना चाह रहा था वह डीजल देकर बदनाम हो गया।
निगम आयुक्त ने फायर अधिकारी को तलब किया
जब यह घटना सोशल मीडिया पर कतिपय तत्वों द्वारा चलाई जा रही थी तो इसकी जानकारी निगम आयुक्त अंशुल गुप्ता को लगी तो उन्होंने 7 अक्टूबर को देर शाम सिंहस्थ मेला कार्यालय में फायर अधिकारी अजयसिंह राजपूत को बुलाया और कहा कि यह घटनाक्रम कैसे हुआ इसकी जानकारी दें। फायर अधिकारी श्री राजपूत मेला कार्यालय में फायर फायटर के चालक जयसिंह और नगर निगम के मेट नीरज पथरोड़ को आयुक्त के समक्ष ले गए और उन्होंने पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया।
तब नगर निगम आयुक्त अंशुल गुप्ता ने उन्हें निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी घटना ना हो और सार्वजनिक जगह पर डीजल का आदान-प्रदान नहीं किया जाए। इस घटना के बाद कुछ लोगों ने फोन करके पूरे फायर ब्रिगेड विभाग को बदनाम करने की धमकी श्री राजपूत को दी और कहा कि वे उनसे सामंजस्य बैठा लें तो यह घटना शहर में तूल नहीं पकड़ेगी अन्यथा डीजल चोरी के आरोपों को वह सिद्ध कर देंगे। लेकिन श्री राजपूत ने अपनी ईमानदारी की मिसाल देते हुए उनका सहयोग करने से इंकार कर दिया और सुबह झूठी खबर सच के रूप में सुर्खियां बन गई।
फायर ब्रिगेडकर्मी श्री राजपूत के अनुशासन से परेशान
अपनी कार्यप्रणाली के लिए पूरे मध्यप्रदेश में अपनी छाप छोड़ चुके फायर अधिकारी श्री राजपूत की कार्यप्रणाली के कारण उज्जैन के फायर ब्रिगेड कर्मचारी जो काम में विश्वास नहीं करते हैं और फायर ब्रिगेड को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं ऐसे कामचोर, मक्कार कर्मचारियों के खिलाफ श्री राजपूत ने कड़ी से कड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही भी की है। जिसके कारण कई कर्मचारी उनके दुश्मन हो गए हैं और आए दिन उनके खिलाफ षड्यंत्र रचकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश करते रहते हैं। लेकिन ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी की छवि के कारण उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाता है। हाल ही में उन्होंने इलेक्ट्रिक ऑटो से चुराई गई बैटरियों का पर्दाफाश किया था जिसमें फायर ब्रिगेड के कुछ नशा करने वाले कर्मचारियों की संलिप्तता थी। इसमें दो तीन तथाकथित पत्रकार भी शामिल थे जो नशे के आदी हैं।
अपनी ईमानदार छवि के लिए जाने जाते हैं श्री राजपूत
आज से 44 वर्ष पूर्व फायर ब्रिगेड में अपनी नौकरी की शुरुआत कर 37 वर्षों तक सागर संभाग में फायर ब्रिगेड में अपनी सेवाएं देने वाले अजयसिंह राजपूत राष्ट्रपति पदक और मुख्यमंत्री पदक से सम्मानित हो चुके हैं और उनकी इसी ईमानदारी को देखते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने उन्हें 2016 के सिंहस्थ में फायर ऑफिसर बनाकर उज्जैन की कमान सौंपी थी और उन्होंने सफलता पूर्वक पूरे सिंहस्थ क्षेत्र में सेवाएं देकर साधु-संतों का तो दिल जीता ही था साथ ही सरकार व प्रशासन के अधिकारियों की आंखों के तारे बन गए थे। उनके इसी उत्कृष्ट कार्य और ईमानदारी को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री चौहान ने 2017 में अपने मुख्यमंत्री निवास भोपाल में श्री राजपूत को न्यौता भेजकर उन्हें मध्यप्रदेश के सर्वश्रेष्ठ फायर अधिकारी के रूप में सम्मानित किया था। वहीं 2018 में 26 जनवरी को उन्हें दिल्ली में महामहिम राष्ट्रपति ने मध्यप्रदेश के सबसे उत्कृष्ट फायर अधिकारी के रूप में सम्मानित कर उनकी सेवाओं को सराहा था। वर्ष 2020 में जब अजयसिंह राजपूत अपने 44 वर्ष के सेवाकाल के बाद सेवानिवृत्त हो रहे थे तो उन्हें तत्कालीन महापौर श्रीमती मीना जोनवाल ने 2 साल के लिए उज्जैन के फायर अधिकारी के रूप में संविदा नियुक्ति दिए जाने की अनुशंसा तत्कालीन आयुक्त को की थी। तब आयुक्त ने उन्हें दो साल और संविदा अधिकारी के रूप में पदस्थ किया था और आज से अपनी सेवाएं दबंगता से और ईमानदारी से उज्जैन के फायर ब्रिगेड विभाग में दे रहे हैं।
मेरी प्रतिष्ठा को धूमिल करने वालों को नोटिस दूंगा…
फायर अधिकारी अजयसिंह राजपूत से इस संबंध में जब चर्चा की गई तो उनका कहना था कि विगत 7 अक्टूबर को रामघाट पर जो कथित रूप से डीजल चोरी का मामला सामने आया है उसकी सच्चाई में कोई दम नहीं है। महज 5 लीटर डीजल के लिए कोई भी सार्वजनिक स्थल पर डीजल की चोरी नहीं करेगा वह भी उस समय जब वहां धार्मिक आयोजन होने वाला था और उसे लेकर सैकड़ों लोगों की भीड़ थी जिसमें पुलिस व प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद थे और मां पार्वती की पालकी वहां आने वाली थी। ऐसे में भला कोई डीजल चोरी करके बदनाम क्यों होगा। अगर उनके कर्मचारी को डीजल चोरी करना होता वह किसी एकांत स्थल पर जाकर इस काम को अंजमा देता वह अपनी लॉकबुक में कुछ भी भर लेता। आपने कहा कि मेरी मान प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों को मैं अपने वकील के द्वारा नोटिस जारी करूंगा।

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