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माता को चढ़ी मदिरा की धार, शुरू हुई नगर पूजा

12 घंटे में पूरी होगी 27 किलोमीटर की यात्रा
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

सुख समृद्धि और हर मुसीबतों से बचने के लिए आज धार्मिक नगरी में मदिरा की धार बहाई जा रही है। नवरात्रि की महाअष्टमी पर नगर पूजा की परंपरा अनादि काल से रही है। सुबह चौबीस खंबा मंदिर में माता को मदिरा की धार चढ़ाकर पूजा की शुरुआत की गई है।
नवरात्रि की महाअष्टमी का पर्व सुबह चौबीस खंबा माता मंदिर स्थित माता महामाया-महालाया को मदिरा की धार चढ़ाकर पूजा अर्चना के साथ शुरू हो गया है। अनादि काल से महाअष्टमी पर नगर पूजा का इसी तरह आयोजन होता आ रहा है। सुबह कलेक्टर आशीष सिंह और एसपी सत्येंद्र कुमार शुक्ल मंदिर पहुंचे थे। ढोल नगाड़ों की थाप पर विधि विधान के साथ माता का पूजन किया गया और मदिरा की धार चढ़ाई गई। उसके बाद नगर पूजा को मंदिर से शहर के देवी और भैरव मंदिरों के लिए रवाना कर दिया गया। प्रशासनिक अधिकारी और कोटवार 27 किलोमीटर तक पैदल मदिरा की धार बहाते हुए देवी मंदिरों और भैरव मंदिरों में पूजा-अर्चना करेंगे। 12 घंटे तक चलने वाली नगर पूजा रात 8 बजे के लगभग अंकपात मार्ग स्थित हांडीफोड़ भैरव मंदिर पर समाप्त होगी।
श्रद्धालुओं ने प्रसाद के रूप में किया सेवन
चौबीस खंबा माता मंदिर पर मदिरा की धार माता को चढ़ाए जाने के बाद नगर पूजा में पहुंचे श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में मदिरा वितरित की गई। महिलाओं और बच्चों ने भी प्रसाद ग्रहण किया। दो वर्षों से कोरोना काल के चलते नगर पूजा में श्रद्धालुओं के शामिल होने की अनुमति नही दी गई थी। वर्ष 2020 में नगर पूजा नवरात्रि के बाद तत्कालीन कलेक्टर शशांक मिश्रा ने पंडितों और शहर के प्रबुद्धजनों की मांग पर बाद में नगर पूजा कराई थी।
घरों में भी हो रहा महाअष्टमी का पूजन
नवरात्रि की महाअष्टमी पर माता पूजन के साथ कुलदेवी पूजन का खास महत्व है। शहर में जहां घर-घर महाअष्टमी का पूजन हो रहा है वहीं अपनी कुलदेवी का पूजन करने के लिए लोग पैतृक गांवों से लेकर शहरों तक पहुंच रहे हैं। कल नवमी का पूजन भी घरों में किया जाएगा। इस दौरान कन्याभोज के आयोजन होंगे जिसके साथ शारदीय नवरात्रि का इस वर्ष समापन हो जाएगा।
प्रशासन उठाता है खर्च
सम्राट विक्रमादित्य के राज्य में नगर पूजा की शुरुआत की गई थी जिसे अब प्रशासन द्वारा पूरा किया जा रहा है। जिसका खर्च भी प्रशासन की ओर से ही उठाया जाता है। पूजा के दौरान माता की चुनरी, सिंदूर और शृंगार सामग्री के साथ बड़ बाकल जिसमें भजिये, पूरी, नुक्ती सहित शराब को रखा जाता है। चौबीस खंबा माता मंदिर से नगर पूजा शुरू होकर शहर के देवी और भैरव मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचती है। माता मंदिरों में शृंगार सामग्री अर्पित की जाती है। भैरव मंदिरों में शराब चढ़ाई जाती है। इस दौरान 27 किलोमीटर तक शहर में मदिरा की धार भी अनवरत बहती रहती है। नगर पूजा में करीब 30 हजार रुपए खर्च आता है।

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