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आज देव प्रबोधिनी एकादशी पर योगनिद्रा से जागे विष्णु, संभालेंगे सृष्टि का भार

माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन
देव प्रबोधिनी एकादशी पर 119 दिन बाद श्रीहरि विष्णु योगनिद्रा से जाग उठे हैं। आज से विवाह समारोह की धूम शुरू हो जाएगी। शाम को तुलसी-शालिग्राम का पूजन होगा। 19 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा पर हर सृष्टि का भार सौंपने के लिए हरि के दरबार पहुंचेंगे।
इस बार मत-मतांतर के चलते स्वयंसिद्ध मुहूर्त में से एक देवप्रबोधिनी एकादशी आज मनाई जा रही है। इसके साथ शादी-विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन सहित मांगलिक कार्यों का श्रीगणेश भी हो गया है। आज तुलसी संग शालिग्राम विवाह के आयोजन होंगे जिसकी शुरुआत मंदिरों के साथ घरों में हो चुकी है। गन्ने का मण्डप बनाकर पूजा अर्चना की जा रही है। देव प्रबोधिनी एकादशी को छोटी दिवाली के रूप में भी मनाया जाता है। जिसके चलते शहर में आज एक बार फिर आतिशबाजी का नजारा दिखाई देगा। वहीं बैण्ड-बाजों के साथ शहनाई की गूंज सुनाई देने लगेगी। शहर के बाजारों में पौने दो साल बाद एक बार फिर लग्नसरा का उल्लास नजर आ रहा है। व्यापारी, गार्डन, होटल संचालक, कैटरिंग संचालक और हलवाई सभी के चेहरे खिले हुए हैं। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के साथ 20 जुलाई से शुरू हुए चातुर्मास का समापन भी होगा।
कोरोना काल के बाद बाजारों में दिख रहा उत्साह
कोरोना संक्रमण के चलते 20 माह से बाजारों की रौनक बिगड़ी हुई थी। दीपावली से व्यापारियों के चेहरे खिले नजर आ रहे हैं। एक बार फिर लग्नसरा का उल्लास बाजार में देखा जा रहा है। 2020 में कोरोना के चलते बड़े स्तर पर विवाह समारोह आयोजित नहीं किये जा सके थे। इस बार कोरोना मुक्त जिले में 4 हजार से अधिक विवाह समारोह होने की संभावना जताई गई है। व्यापारी, गार्डन, होटल संचालक, कैटरिंग संचालक और हलवाई सभी को काम मिल चुका है और आने वाले दिनों में होने वाले विवाह समारोह की बुकिंग कर चुके हैं। किराना बाजार में भी रौनक लौट आई है। इस बार नवंबर माह में 16 विवाह मुहूर्त हैं उसके बाद कुछ दिन विवाह समारोह पर ब्रेक लगेगा। वहीं जनवरी माह में फिर शुरुआत हो जाएगी।
बाजार में गन्नो की आई बहार
तुलसी-शालिग्राम विवाह समारोह के चलते बाजार में गन्नों की बहार दिखाई दे रही है। सड़क मार्गों के किनारे किसान खुद गन्ना बेचते नजर आ रहे हैं। 30 रुपये से 50 रुपये प्रतिनग गन्ने की कीमत रखी गई है। शाम को होने वाले तुलसी सालिग्राम विवाह के दौरान गन्नों का विशेष महत्व माना गया है। गन्नों का मण्डप बनाकर पूजा अर्चना की जाएगी। दीपावली पर भी लक्ष्मी पूजन के दौरान गन्नों का व्यवसाय जमकर हुआ था।

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