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आज बाबा महाकाल की पालकी पहुंचेगी दशहरा मैदान, प्रतीकात्मक होगा रावण दहन, ऑनलाइन देख सकेंगे शहरवासी

कोरोना स्वरूप में बनाया गया, दशहरा मैदान कार्तिक मेला प्रांगण में प्रवेश प्रतिबंधित
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

आज दशहरा पर्व कोविड-19 गाइडलाइन के नियमों के बीच मनाया जाएगा। शहर के दो स्थानों पर प्रमुख रूप से होने वाले रावण दहन का कार्यक्रम प्रतीकात्मक होगा जिसका ऑनलाइन प्रसारण किया जाएगा। रावण दहन स्थल पर शहरवासियों की उपस्थिति प्रतिबंधित रहेगी।
दशहरा मैदान पर पिछले 58 वर्षों से स्वर्गीय लाला अमरनाथ की स्मृति में रावण दहन किया जाता रहा है। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते आयोजन समिति द्वारा प्रशासन के साथ मिलकर कोविड-19 गाइडलाइन के नियमों का पालन करते हुए प्रतीकात्मक रावण दहन का निर्णय लिया गया है। शाम 7 बजे प्रतीकात्मक रूप से 11 फीट के कोरोना रूपी रावण का दहन होगा। दशहरा मैदान में यह पहला मौका है जब प्रतीकात्मक रूप से रावण दहन किया जाएगा। प्रशासन ने शहरवासियों की उपस्थिति पर प्रतिबंध लगाकर प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती कर दी है। कार्तिक मेला प्रांगण में स्व. प्रेम नारायण यादव की स्मृति में होने वाले रावण दहन को भी प्रतीकात्मक स्वरूप दिया गया है। यहां भी शहर वासियों की उपस्थिति पर प्रतिबंध रहेगा। कोरोना संक्रमण में इस बार तीज त्यौहार और पर्व पर ग्रहण लगा दिया है। शहरवासी घरों में रहकर परंपरा को निभा रहे हैं। आज होने वाले प्रतीकात्मक रावण दहन को शहरवासी घर बैठे टीवी पर देख सकेंगे। प्रशासन द्वारा इसकी व्यवस्था की गई है।


राम-लक्ष्मण की पहुंचेगी सवारी
दशहरा मैदान और कार्तिक मेला प्रांगण में होने वाले प्रतीकात्मक रावण दहन से पहले राम-लक्ष्मण और हनुमान की सवारी निकाली जाती है जिसकी परंपरा को कायम रखा गया ह।ै लेकिन सवारी का स्वरूप भी छोटा किया गया है। इस बार रावण दहन स्थल पर आतिशबाजी के बीच हनुमान जी का रावण से युद्ध भी प्रतीकात्मक रूप में ही होगा। राम-लक्ष्मण की सवारी का मार्ग भी छोटा रहेगा। कार्यक्रम स्थल पर आयोजकों की उपस्थिति होगी। अतिथियों को बड़ी संख्या में आमंत्रित नहीं किया गया है।
पथ संचलन किया गया स्थगित
दशहरा पर्व पर पथ संचलन की परंपरा रही है। संघ की शाखा से जुड़े कार्यकर्ता प्रतिवर्ष शहर के प्रमुख मार्गो से पथ संचलन करते हुए रावण दहन स्थल तक पहुंचते हैं। कोविड-19 के चलते पथ संचलन को भी स्थगित कर दिया गया है।
बाबा की पालकी का छोटा होगा स्वरूप
वर्ष भर में एक बार बाबा महाकाल की पालकी दशहरा पर्व पर नए शहर रावण दहन स्थल पर पहुंचती है। हर वर्ष लाव लश्कर के साथ बाबा के स्वागत में मंच बनाए जाते हैं। शाम 4 बजे महाकाल मंदिर से निकलने वाली बाबा की पालकी का स्वरूप इस बार छोटा रखा गया है। बाबा की पालकी के साथ भजन मंडल में शामिल नहीं रहेगी। सवारी मार्ग पर स्वागत मंच भी नहीं बनाए गए हैं। मंदिर के पंडित पुजारी और प्रशासन के साथ पुलिसकर्मी बाबा की पालकी लेकर दशहरा मैदान पहुंचेंगे। जहां प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पूजा अर्चना की जाएगी।

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