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आज रात 1 बजकर 5 मिनट पर शुरू होगी चतुर्थी तिथि

सर्वार्थ सिद्धि योग में करवा चौथ का व्रत कल
दिनभर व्रत रखकर महिलाएं करेंगी चंद्रमा का पूजन
उज्जैन।
करवा चौथ का पर्व बुधवार को मनाया जाएगा। आज रात 1 बजकर 5 मिनट पर चतुर्थी तिथि की शुरुआत हो जाएगी। बुधवार सुबह से महिलाएं व्रत रखकर सोलह शृंगार कर मां गौरी, भगवान शंकर, गणेश व कार्तिकेय को पुष्प, अक्षत, दीप अर्पित कर करवा चौथ का पाठ करेंगी। इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग में करवा चौथ का पर्व मनाया जाएगा।
वर्षभर में दीपावली से पूर्व करवा चौथ का पर्व मनाया जाता है। महिलाओं द्वारा पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि को लेकर निर्जला व्रत किया जाता है और दिनभर पूजा-अर्चना कर करवा चौथ का पाठ करने के बाद देर शाम चंद्रमा का पूजन कर पति का चेहरा देख व्रत तोड़ा जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार करवा चौथ का पर्व सर्वार्थ सिद्धि योग में सालों बाद बुधवार के दिन आ रहा है। मंगलवार रात 1 बजकर 5 मिनट से चतुर्थी तिथि शुरु हो जाएगी जो बुधवार रात 2 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। मृगशिरा नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं। राशि के स्वामी शुक्र और बुध में रहेंगे। इसलिए बुधवार को दिनभर सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय शाम 7 बजकर 57 मिनट पर होना बताया जा रहा है। उसके बाद ही महिलाएं चंद्रमा को अध्र्य देकर व्रत तोड़ेंगी। करवा चौथ को लेकर महिलाओं में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है। कोरोना संक्रमण के बावजूद भी बाजार में पर्व को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है। बाजार में रंग-बिरंगे करवों के साथ पूजन सामग्रियों की दुकानें लग चुकी हैं। पर्व से एक दिन पहले ही महिलाओं ने खरीददारी शुरु कर दी थी।
करवा चौथ की पौराणिक किंवदंती
करवा चौथ के बारे में कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। करवा चौथ पर्व की शुरुआत महाभारत काल से मानी जाती है। किंवदंती है कि द्रोपदी ने सर्वप्रथम करवा चौथ का व्रत किया था। जब अर्जुन नीलगिरी की पहाडिय़ों में घोर तपस्या कर रहे थे, तब 4 पांडवों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। द्रोपदी ने यह बात श्रीकृष्ण को बताई। तब श्रीकृष्ण भगवान ने द्रोपदी को करवा चौथ व्रत रखने की सलाह दी थी। कहा जाता है कि करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री थी, जो अपने पति से बहुत प्रेम करती थी। इस तरह उसमें एक दिव्य शक्ति का वास हो गया था। एक दिन नदी में नहाते समय एक मगरमच्छ ने उसके पति को पकड़ लिया। करवा ने यम देवता का आह्वान कर मगरमच्छ को यमलोक भेजने व अपने पति को सुरक्षित वापिस करने को कहा और बोली कि यदि मेरे सुहाग को कुछ हुआ तो अपनी पतिव्रत शक्ति से यम देव व यमलोक नष्ट कर दूंगी। कहते हैं कि यमराज ने उसकी दिव्य शक्ति व पतिव्रत धर्म से घबराकर उसके पति को सुरक्षित वापिस कर दिया व मगरमच्छ को यमलोक भेज दिया। मान्यता है कि इस दिन से ही गणेश चतुर्थी को पूरी श्रद्धा व विश्वास से पति की दीर्घायु के लिए स्त्रियों द्वारा मनाया जाने लगा व इस दिन कार्तिक चतुर्थी को करवा चौथ के नाम से पहचाना जाने लगा।
यह भी है मान्यता
करवा चौथ पर्व को लेकर मान्यता यह भी है कि इस दिन चंद्रमा की किरणें सीधे नहीं देखी जाती हैं, उसके मध्य किसी पात्र या छलनी द्वारा देखने की परंपरा है। क्योंकि चंद्रमा की किरणें अपनी कलाओं में विशेष प्रभावी रहती हैं। जो लोक परंपरा में चंद्रमा के साथ पति-पत्नी के संबंध को उजास से भर देती हैं। चूंकि चंद्र के तुल्य ही पति को भी माना गया है, इसलिए चंद्रमा को देखने के बाद तुरंत उसी छलनी से पति को देखा जाता है। इसका एक और कारण बताया जाता है कि चंद्रमा को भी नजर न लगे और पति-पत्नी के संबंध में भी मधुरता बनी रहे।
भगवान गणेश का होगा विशेष शृंगार
करवा चौथ भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक नगरी में अतिप्राचीन चिंतामण गणेश मंदिर पर भगवान गणेश का चांदी के वर्क से विशेष शृंगार किया जाएगा। दिनभर मंदिर में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचेंगे। मंदिर समिति के अनुसार कोरोना संक्रमण के चलते सोशल डिस्टेंसिंग के साथ भक्तों को दर्शन के लिए प्रवेश दिया जाएगा। करवा चौथ का पर्व बुधवार को होने के चलते विशेष संयोग बन रहा है। श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने की संभावना बनी हुई है।
ब्यूटी पार्लरों पर दिखी भीड़
करवा चौथ का व्रत अनुपम सौंदर्य, अखण्ड सौभाग्य प्राप्त करने का संकेत दे रहा है। जिसके चलते प्रतिवर्ष करवा चौथ पर महिलाएं सोलह शृंगार कर चंद्रमा की पूजा करती हैं। पर्व से एक दिन पूर्व आज सुबह से महिलाएं अपने सौंदर्य को संवारने के लिए ब्यूटी पार्लरों का रूख कर चुकी थीं। आज प्रारंभिक सौंदर्य की प्रक्रिया के बाद बुधवार को महिलाएं पूर्ण रूप से सोलह शृंगार करेंगी। कोरोना संक्रमण के चलते कई माह से ब्यूटी पार्लर का व्यवसाय ठप्प पड़ा हुआ था। करवा चौथ आने पर ब्यूटी पार्लर संचालकों में उत्साह दिखाई दे रहा है। महिलाओं के सजने-संवरने का क्रम कल भी जारी रहेगा।

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