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14 मौतों के जिम्मेदार तत्कालीन निगम अधिकारी और पुलिसकर्मियों के मकान क्यों नहीं तोड़ रहा प्रशासन

माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन
जिला प्रशासन थोथी वाहवाही लूटने के लिए पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर मुख्यमंत्री की नजरों में हीरो बनना चाहते हैं। छोटे-मोटे टपोरी और गुण्डे बदमाशों के मकान तोड़ पुलिस शहर में बता रही है कि उन्होंने गुण्डों के खिलाफ दबंगता से कार्रवाई की है। जबकि असली गुण्डे झिंझर कांड से जुड़े हैं जिनके खिलाफ अब तक जिला और पुलिस प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
विगत दो-तीन दिनों से उज्जैन में अलग-अलग थाना क्षेत्रों में प्रशासन की अगुवाई में पुलिस निगम अमले के साथ छोटे-मोटे अपराध करने वाले गुण्डे-बदमाशों के मकान तोड़ रही है और प्रदेश के मुखिया को बताया जा रहा है कि उज्जैन में अपराध को नेस्तनाबूद किया जा रहा है। जबकि प्रशासन के आला अधिकारी उन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं जो कि झिंझर कांड में 14 मौतों के जिम्मेदार हैं। इनमें से एक है नगर निगम का तत्कालीन उपायुक्त निलंबित सुबोध जैन जिसने कि शहर में नगर निगम के माध्यम से अपना काला साम्राज्य खड़ा किया था। चाहे बाजार वसूली हो, चाहे अवैध गुमटी लगवाने का मामला जो चाहे शहर में अवैध बिल्डिंगे बनवाने का मामला हो, हर गुनाह में सुबोध जैन शामिल था। हेला समाज के तथाकथित गुण्डों को पालकर नगर निगम की गैंग में शामिल करने वाला सुबोध जैन जो आज करोड़ों की बेनामी संपत्ति का मालिक है और सेठी नगर में अवैध मकान तानकर नगर निगम को मुंह चिढ़ा रहा है जिसके कारण शहर में लॉकडाउन के समय अवैध शराब उसके गुर्गों ने शहर के गरीब तबके को परोसने का काम किया और इनमें नगर निगम की हॉर्न लगी गाडिय़ों का सहयोग भी उसके गुर्गों ने लिया। यह बात एसआईटी की जांच मे ंभी सामने आई वहीं गृहसचिव राजेश राजौरा के सामने भी शहर कांग्रेस और अन्य लोगों ने दस्तावेजों के माध्यम से साक्ष्य उपलब्ध कराए। लेकिन उसके बाद भी जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों ने सुबोध जैन जैसे गुण्डों को संरक्षण देने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। लिपिक से अपने जीवन की शुरुआत करने वाला सुबोध जैन आज करोड़ों का आसामी है और उसकी शहर में कई जगह बेनामी संपत्ति है। सेठीनगर मेरूदण्ड अपार्टमेंट के समीप सुबोध जैन ने नगर निगम के नियम कायदों की धज्ज्यिां उड़ाते हुए अवैध मकान बना रखा है जो स्वयं और उसकी पत्नी ममता जैन के नाम से है जिसके खिलाफ नगर निगम ने अभी तक कार्रवाई नहीं की है और न ही प्रशासन ने उसके मकान पर बुल्डोजर चलाने के आदेश दिए हैं। वहीं झिंझर कांड में शामिल पुलिसकर्मी नवाज और अनवर के खिलाफ भी अभी तक रासुका की कार्रवाई पुलिस प्रशासन ने नहीं की है और न ही उनके मकानों को तोड़ा गया है। और न ही जिला प्रशासन ने उनकी अवैध संपत्तियों के साक्ष्य एकत्रित किए हैं। पुलिस को तो बस झूठी वाहवाही लूटने के लिए छोटे मोटे गुण्डों के खिलाफ कार्रवाई करना आती है। अगर पुलिस वास्तविकता में कार्रवाई करना चाहती है तो सबसे पहले सुबोध जैन का मकान तोड़े और उन पुलिसकर्मियों के मकान पर भी बुल्डोजर चलवाए जो 14 मौतों के जिम्मेदार हैं। लॉकडाउन का हीरो और अभी का विलेन
शहर में कई छोटे-मोटे गुण्डों के खिलाफ कार्रवाई कर वाहवाही लूटने वाली पुलिस ने कल जीतू बुंदेला का मकान भी तोड़ दिया। जीतू बुंदेला गांजे का धंधा करता है। यह बात क्षेत्रीय पुलिस को मालुम है और पूरे थाने की बंदी जीतू बुंदेला के यहां से जाती है। लॉकडाउन के दौर में जो जीतू बुंदेला 10 से 12 लाख रुपए की कच्ची खाद्य सामग्री 20 हजार से अधिक परिवारों को बांट चुका था वह उस समय चिमनगंज पुलिस की नजर में हीरो था। पुलिस के कई अधिकारी और छोटे मोटे पुलिसकर्मी लॉकडाउन में उससे मदद लेने जाते थे और जीतू बुंदेला यहां के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को शराब से लेकर कच्ची खाद्य सामग्री उपलब्ध कराता था और उनकी आर्थिक रूप से मदद भी करता था। तब वह पुलिस की नजर में सुपर हीरो था। लेकिन चिमनगंज थाने के एक महत्वाकांक्षी पुलिस अधिकारी ने मोटी रकम की इच्छा पूरी नहीं होने पर जीतू बुंदेला को विलेन बना दिया और इसने बड़े अधिकारियों के सामने ऐसा षड्यंत्र रचा कि जीतू बुंदेला पर गांजे की झूठी कार्रवाई करवाकर उसे कुख्यात बदमाश बना दिया। इतना ही नहीं इस अतिमहत्वाकांक्षी अधिकारी ने जिला प्रशासन के आला अधिकारियों को भी गुमराह किया और जीतू बुंदेला का मकान तोडऩे के लिए राजी कर लिया और कल नगर निगम की गैंग ने ढांचाभवन में जाकर जीतू बुंदेला की पत्नी उर्मिला का मकान जमींदोज कर दिया और मुख्यमंत्री तथा नगर के जनप्रतिनिधियों को बता दिया कि पुलिस कैसे गुण्डों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। अगर वास्तविक में जिला प्रशासन और पुलिस को कार्रवाई करना है तो कोट मोहल्ला, बेगमबाग, हेलवाड़ी, जूना सोमवारिया, भैरवगढ़, गांधीनगर, विराटनगर, यादव नगर में फैले नशे के बड़े सौदागरों के खिलाफ कार्रवाई करें जो पूरे शहर में ब्राउन शुगर, कोकिन, हशीश और झिंझर जैसे नशीले पदार्थों को बेचने का काम कर रहे हैं।

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