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शिप्रा में आस्था की डुबकी, सोम कुण्ड पर फव्वारा स्नान

आज पंचग्रही योग में सोमवती अमावस्या, शाम को बाबा महाकाल करेंगे शाही नगर भ्रमण
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

अगहन मास के सोमवार पर आज सोमवती अमावस्या का योग बना है। सुबह से ही शिप्रा नदी के घाटों पर श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे थे। वहीं सोम कुण्ड पर प्रशासन द्वारा फव्वारा स्नान की व्यवस्था की गई थी। कोरोना काल को देखते हुए प्रशासन की ओर से घरों में रहकर पूजा-पाठ की अपील की गई है।
धार्मिक नगरी में सोमवती अमावस्या का काफी महत्व माना गया है। वर्ष में दो से तीन बार सोमवती अमावस्या आती है। इस बार अगहन मास के सोमवार पर आई सोमवती अमावस्या पंचग्रही योग में मनाई जा रही है। 57 साल बाद अमावस्या का यह योग बना है। शिप्रा नदी के घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालु आस्था का नहान करने के लिए पहुंचना शुरू हो गए थे। कोरोना संक्रमण और कड़ाके की ठंड के चलते श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम बनी हुई थी। आस्था के इस नहान के लिए श्रद्धालु सोमतीर्थ कुण्ड भी पहुंच रहे थे। जहां प्रशासन द्वारा फव्वारा स्नान की व्यवस्था की गई थी। हर बार की तरह इस बार सोमवती अमावस्या पर आस्था का बड़ा सैलाब दिखाई नहीं दिया है। प्रशासन ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए दो दिन पहले से ही घरों में रहकर पूजा-पाठ करने की अपील की थी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार साल की आखिरी अमावस्या है। इस दिन सोमवार होने से सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। 2020 में 3 सोमवती अमावस्या थीं। इससे पहले 20 जुलाई और 23 मार्च को सोमवती अमावस्या का संयोग बना था। अब अगले साल 12 अप्रैल को ये संयोग बनेगा। ये 2021 की पहली सोमवती अमावस्या रहेगी और इसके बाद 6 सितंबर को साल 2021 की आखिरी सोमवती अमावस्या होगी।

शाम को बाबा महाकाल करेंगे भ्रमण
कार्तिक अगहन मास में बाबा महाकाल शहरवासियों का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकल रहे हैं। आज अगहन मास का अंतिम सोमवार होने पर बाबा शाही रूप में नगर भ्रमण करेंगे। शाम 4 बजे महाकाल मंदिर से बाबा की पालकी परंपरागत मार्ग से होते हुए रामघाट पहुंचेगी जहां शिप्रा के जल से बाबा का अभिषेक किया जाएगा। सोमवती अमावस्या का योग होने पर शाम को निकलने वाली शाही सवारी में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहने की संभावना बनी हुई है। जिसे देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के इंतजाम सुबह से ही जुटाना शुरू कर दिए थे।
हिंदू धर्म में विशेष महत्व
सोमवार को पडऩे वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। इस अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। विवाहित स्त्रियों द्वारा इस दिन अपने पतियों के दीर्घायु की कामना के लिए व्रत का विधान है। सोमवती अमावस्या पर महिलाएं पति की दीर्घायु की करेंगी। इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्र गोदान का फल मिलता है। शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गई है। अश्वत्थ यानी पीपल वृक्ष। इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चंदन इत्यादि से पूजा और वृक्ष के चारों ओर 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा करने का विधान होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य समृद्ध, स्वस्थ और सभी दुखों से मुक्त होगा। इस दिन विशेषकर गायों को चारा खिलाने तथा वस्त्र आदि दान देने का महत्व शास्त्रों में है।
आज साल का अंतिम सूर्य ग्रहण
इस बार वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण 14 दिसंबर को सोमवती अमावस्या पर शाम 7.03 से रात 12.23 बजे तक रहेगा। ग्रहण का पर्वकाल 5 घण्टे 20 मिनिट होगा। हालांकि यह सूर्यग्रहण भारत में नजर नहीं आने से इसका यम-नियम और सूतक नहीं लगेगा। भारतीय समय अनुसार सोमवार को ग्रहण सूर्य अस्त होने के बाद शाम 7 बजकर 03 मिनिट से रात 12 बजकर 23 मिनिट तक रहेगा। ग्रहण दक्षिण अमेरिका, दक्षिण-पश्चिम अफ्रीका के साथ हिंद और प्रशांत महासागर के कुछ हिस्से में दिखाई देगा। इस दिन अमावस्या का संयोग बन रहा है। इस दिन साल का आखिरी सूर्य ग्रहण भी है। इसके बाद सूर्य अपनी राशि भी परिवर्तन करेंगे। अमावस्या पर वृश्चिक राशि में सूर्य, चंद्र, बुध, शुक्र और केतु रहेंगे।

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