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…आखिर थम गई मंडी व्यापारी की सांसें, अंतिम संस्कार से पहले धड़क उठा था दिल, पांच घंटे चला उपचार

माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन
कृषि उपज मंडी के व्यापारी का बीमारी के चलते निधन हो गया था। परिजन और रिश्तेदार अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे। अचानक दिल धड़क उठा और गमगीन परिवार में खुशियां लौट आई। व्यापारी को डॉक्टरों ने ऑब्जर्वेशन में रखा। लेकिन पांच घंटे बाद उनकी सांसें थम गई। आज सुबह उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई।
इंदिरानगर में रहने वाले कृषि उपज मंडी के प्रतिष्ठित व्यापारी नारायण अग्रवाल का पिछले कुछ दिनों से लीवर सर्जरी के चलते इंदौर में उपचार चल रहा था। मंगलवार सुबह डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। खबर उज्जैन पहुंचते ही जहां परिवार में माहौल गमगीन हो गया वहीं मंडी व्यापारियों ने नीलामी स्थगित कर शोक स्वरूप अपने व्यवसाय को बंद कर दिया। परिजन शव लेकर अंतिम संस्कार के लिए उज्जैन पहुंचे। घर पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थी। परिवार के अंतिम दर्शन के बाद व्यापारी का शव चक्रतीर्थ ले जाया जाना था। इससे पहले ही उनका दिल धड़क उठा और शरीर में हुई हलचल के बाद परिवार में खुशियां लौट आई। अंतिम संस्कार में शामिल होने आए लोग भी अचंभित हो गए। तत्काल उन्हें उपचार के लिए निजी अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद जीवित होने की पुष्टि की और आईसीयू कक्ष में ऑब्जर्वेशन में रख लिया गया। करीब 5 घंटे तक मंडी व्यापारी नारायण अग्रवाल उपचार के दौरान जीवित रहे। अंतत: रात में उनकी सांसें थम गई। परिवार में छाई खुशियां एक बार फिर गम में बदल गई थी। आज सुबह इंदिरानगर स्थित निवास से उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई जिसमें मंडी के व्यापारी और क्षेत्रवासी सहित रिश्तेदार और परिवार के लोग शामिल हुए। नारायण अग्रवाल के दो पुत्र हैं और उनका मंडी में बड़ा कारोबार था।
लापरवाही नहीं होती तो कुछ दिन और जीवित होते अग्रवाल
मंडी व्यापारी के उपचार के दौरान इंदौर के डॉक्टरों द्वारा उन्हें मृत घोषित किया गया था। उज्जैन लाने पर उनकी सांसे चलने लगी और दिल धड़कने लगा था। जिसे देखकर परिवार ने इंदौर के डॉक्टरों के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए लापरवाही बरतने के आरोप लगाए थे। परिजनों ने स्वास्थ्य मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक मामले की शिकायत दर्ज कराने की बात भी कही थी। लेकिन रात में हुए निधन के बाद परिचितों का कहना था कि अगर इंदौर के डॉक्टरों द्वारा लापरवाही नहीं बरती जाती तो शायद नारायण अग्रवाल कुछ दिन और उनके बीच में होते।

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