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मकान किसी और का, नोटिस किसी और के नाम, नगर निगम ने पुलिस प्रशासन को आफत में डाला

माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन
मुख्यमंत्री को दिखाने के लिए जिला और पुलिस प्रशासन गुण्डे-बदमाश और माफियाओं के खिलाफ मकान तोडऩे की कार्रवाई कर रहा है वह एक हद तक जायज है। लेकिन इस कार्रवाई की गाज किसी निर्दोष पर पड़े तो कैसा लगता है।
कल ऐसा ही कारनामा नगर निगम प्रशासन के नालायक अधिकारियों के कारण पुलिस प्रशासन को देखने में आया। तोपखाना उपकेश्वर चौराहा पर नगर निगम प्रशासन ने एक अवैध मकान को ढहाने के लिए महाकाल, खाराकुआ, कोतवाली, नीलगंगा थाने का पुलिस बल बुलवा लिया। जब नगर निगम प्रशासन उक्त मकान को तोडऩे गया तो पता लगा कि यह मकान किसी और का है और यहां किसी ओर के नाम से नोटिस नगर निगम के अधिकारियों ने भेज दिया है। यहां पर दो मंजिला मकान में इरफान शेख नामक पतंग व्यापारी ने किराये का मकान लिया था और नीचे पतंग की दुकान लगाने की तैयारी थी। लेकिन उसी समय नगर निगम का अमला गैंग लेकर पहुंचा और पुलिस से दबाव डलवाकर दो घंटे में पूरा मकान खाली करवा लिया और उसे जेसीबी से तोडऩे की तैयार शुरू कर दी। इसकी खबर किरायेदार ने इंदौर निवासी मकान मालिक साबरा खातून के बेटे हारीस अली को दी तो वह अपनी मोटरसायकल से तेज गति से मकान के सारे दस्तावेज लेकर उज्जैन पहुंचा और उसने नगर निगम और पुलिस के अधिकारियों को सारे दस्तावेज दिखाए। दस्तावेज देखने के बाद भी नगर निगम और पुलिस के अधिकारी मकान तोडऩे पर आमदा हो गए। तब सरकार से जुड़े एक जनप्रतिनिधि का फोन आया तब सारी कार्रवाई रूकी और नगर निगम के अधिकारियों ने कागज देखकर मकान तोडऩे की कार्रवाई रोकी। बताया जाता हे कि पुलिस किसी मंजूर एहमद नाम के व्यक्ति का नोटिस बनाकर लाई थी जबकि वह न तो किरायेदार है और न ही मकान मालिक। महाकाल थाने के एसआई गगन बादल ने बताया था कि यहां पर सट्टा संचालित होता है और यह मकान किसी सटोरिये ने लिया है। लेकिन गगन बादल का यह तर्क भी झूठा साबित हो गया कि यहां सट्टा संचालित होता है। तीन घंटे की फजीहत के बाद वापस किरायेदार इरफान शेख ने अपने परिजनो के साथ मिलकर बाहर निकाला सामान अंदर रखा और चैन की सांस ली और पुलिस फोर्स खिसियाता हुआ नगर निगम की गैंग के साथ निकल गया।
शहर में गुंडे बदमाश और माफियाओं के खिलाफ की जा रही कड़ी कार्रवाई का हर नागरिक समर्थन कर रहा है लेकिन गुंडे बदमाशों, माफियाओं, सटोरियों और भूमाफियाओं की आड़ लेकर अगर किसी निर्दोष का मकान तोड़ा जाता है तो इसका जवाबदार कौन होगा यह सवाल कल उपकेश्वर चौराहा तोपखाना पर खड़ा हर नागरिक निगम प्रशासन, पुलिस प्रशासन से पूछ रहा था। कल अगर यह मकान टूट जाता जो कि कार्रवाई की जद में नहीं आया है तो वहां अफरा तफरी, तनाव की स्थिति पैदा हो जाती। नगर निगम और पुलिस के आला अधिकारी जिस क्षेत्र में मकान तोडऩे गए थे वह मकान वर्ग विशेष के बहुसंख्यक मोहल्ले में आता है। जिसका खामियाजा जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को भुगतना पड़ता।

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