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14 को मनेगी मकर संक्रांति, 15 जनवरी को मकर राशि में होंगे पांच ग्रह

माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन
सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी को मनाया जाएगा। पिछले कुछ सालों से यह पर्व 15 जनवरी को मनाया जा रहा था। एक बार पांच ग्रह मकर राशि में होंगे। 2 दिनों का पर्व होने से स्नान दान की परंपरा 15 जनवरी को भी निभाई जाएगी।
धार्मिक नगरी में मकर संक्रांति का पर्व पतंगबाजी के रूप में मनाया जाता ह। यह पर्व सूर्य के उत्तरायण होने से संबंधित है। इस दिन दान पुण्य स्नान की परंपरा को भी पूरा किया जाता है। मकर संक्रांति का उत्साह शुरू हो चुका है। आज पर्व से पहले रविवार को पतंगबाजी का नजारा दिखाई दिया। पं. आनंद शंकर व्यास के अनुसार पिछले कुछ वर्षों से 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा था। लेकिन इस बार 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति रहेगी। इस दिन दोपहर को 2 बजकर 54 मिनिट से पर्व काल की शुरुआत होगी जिसके चलते 15 जनवरी को भी दान स्नान श्रद्धालु कर सकेंगे। इस दिन पांच ग्रह सूय, बुध, शनि, गुरु और चंद्र मकर राशि में होंगे। जिसके चलते पंच ग्रही योग बन रहा है। मकर राशि जल की राशि है इसलिए बारिश होने के आसार और ठंड बढऩे की संभावना बनी हुई है। 16 जनवरी को गुरु अस्त हो रहा है। इसलिए मकर संक्रांति पर शुभ कार्य नहीं होंगे। गुरु अस्त होने से 3 दिन पहले ही शुभ कार्य बंद हो जाते हैं। मकर संक्रांति पर सूर्य का पूजन उत्तम स्वास्थ्य, बुद्धि और संतान के लिए किया जाना अच्छा माना गया है। इस दिन गुरुवार होने पर गुरु की कृपा भी मिलेगी।
मकर संक्रांति पर्व का उत्साह है पतंगबाजी
धार्मिक नगरी में दान पुण्य और स्नान के पर्व मकर संक्रांति का उत्साह पतंगबाजी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बच्चे, युवा और बुजुर्ग वर्ग के सभी महिला पुरुष जमकर पतंगबाजी का आनंद लेते हैं। घरों की छतों पर सुबह से ही काटा है की आवाज सुनाई देने लगती है। वहीं उत्साह में जोश भरने के लिए छतों पर डीजे तक लगाए जाते हैं। संगीत की धुन पर पतंगबाजी का ऐसा माहौल सिर्फ धार्मिक नगरी में ही दिखाई देता है। 14 जनवरी को मनाए जाने वाले मकर संक्रांति पर्व के उत्साह पतंगबाजी की शुरुआत दिसंबर माह से ही हो जाती है। आसमान रंग बिरंगी पतंगों से सजा नजर आता है। हर वर्ग और समाज के लोग इस उत्साह में भागीदारी निभाते हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक था तो और खुले मैदानों में पतंग बाज डटे रहते हैं।

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