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बडऩगर अनाज मंडी में किसानों का शोषण करते व्यापारी

जिम्मेदार आंदोलन को उकसाते किसानों को
माटी की महिमा न्यूज/पं. प्रदीप मोदी

उज्जैन जिले के अंतर्गत आने वाली बडऩगर तहसील की अनाज मंडी में किसानों के हित में कुछ भी सही नहीं है,उनका जमकर शोषण किया जा रहा है। व्यापारियों द्वारा काकस बनाकर किसानों का शोषण किया जा रहा है और इस शोषण को निवृत्तमान अध्यक्ष सहित मंडी प्रशासन की सरपरस्ती हासिल है।
यदि कोई किसान आपत्ति दर्ज कराता है तो मंडी अध्यक्ष विजय मेहता कर्तव्यहीनता का परिचय देते हुए उसे दिल्ली किसान आंदोलन में भाग लेने के लिए उकसाते हैं, प्रेरित करते हैं। मुख्यमंत्री बार-बार किसानों के हित की बात करते हैं, मंडियों में पारदर्शिता की दुहाई देते हैं, लेकिन बडऩगर मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली मुख्यमंत्री की भावना का बिल्कुल ध्यान नहीं रखती,बल्कि किसानों को व्यापारियों के हाथों जिबह कराने की व्यवस्था करती नजर आती है। सबसे ज्यादा अखरने वाली बात यह है कि मंडी अध्यक्ष विजय मेहता किसानों के साथ खड़े रहने की बजाय, व्यापारियों का नेतृत्व करते नजर आते हैं, किसान हितों पर व्यापारियों को वरियता देते नजर आते हैं। अध्यक्ष,सचिव, मंडी प्रशासन,सब व्यापारियों के साथ तो फिर बडऩगर की अनाज मंडी में किसानों के साथ कौन, उनका हितैषी कौन? अध्यक्ष विजय मेहता किसानों को दिल्ली के किसान आंदोलन में भाग लेने को क्यों प्रेरित कर रहे हैं?यह भी बेहद विचारणीय प्रश्न है। श्री मेहता,क्या बडऩगर अनाज मंडी में किसानों के बीच अराजकता का माहौल निर्मित करने की भावना रखते हैं? क्या मध्यप्रदेश में भी वे किसानों का आंदोलन खड़ा करने वाली टीम के सदस्य हैं? मध्यप्रदेश की अनाज मंडियों में ऐसे कितने विजय मेहता फैले हैं,जो किसानों के बीच अविश्वास के बीज बो कर, उन्हें दिल्ली किसान आंदोलन का समर्थन करने को प्रेरित कर रहे हैं? मध्यप्रदेश शासन को इस दिशा में ध्यान देने की आवश्यकता है, अन्यथा मध्यप्रदेश के किसानों को भी विजय मेहता जैसे लोग आंदोलन की राह पर अग्रसर कर सकते हैं।प्रदेश सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि मध्यप्रदेश में भी विपक्ष दिल्ली किसान आंदोलन के समर्थन हेतु सड़कों पर गम्मत कर रहा है और बडऩगर अनाज मंडी जैसे प्रशासन किसानों को परेशान कर, आंदोलन की ओर धकेलने का जतन कर रहे हैं।
यदि प्रदेश सरकार ने किसानों का शोषण करने वाले मंडी प्रशासनों पर ध्यान नहीं दिया तो मध्यप्रदेश में भी किसानों को ये आंदोलन की राह पर लाकर खड़ा कर सकते हैं।जिस हिसाब से,जिस आत्मविश्वास से मंडी अध्यक्ष विजय मेहता शोषण के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने वाले किसान को दिल्ली जाकर आंदोलन में भाग लेने को कहते हैं, उससे तो यही लगता है कि प्रदेश की मंडियों में दिल्ली किसान आंदोलन को और अधिक हवा देने के लिए आधार तैयार किया जा रहा है। बडऩगर मंडी अध्यक्ष की बातों को हल्के में नहीं लिया जा सकता, इस बात को प्रदेश सरकार ने ध्यान रखना चाहिए।

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