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‘‘तू चल मैं आया…’’ की मिसाल बनी शाजापुर कोतवाली, तीन थाना प्रभारी को छोडक़र 6 महिने भी नहीं टिक सका कोई

शाजापुर (मंगल नाहर)। ‘‘तू चल मैं आया… ’’ ये कहावत अभी तक आपने मैदान में क्रिकेट खेल रहे खिलाडिय़ों के एक के बाद एक गिरते विकेट के वक्त व्यंग्यात्मक रूप में ही सुनी होगी, लेकिन पिछले कुछ सालों में यह जुम्ला शाजापुर कोतवाली पर पूरी तरह फीट बैठता नजर आ रहा है। जहां अपनी सेवा के 6 महिने भी पूरे किए बगैर कोतवाल साहब का तबादला हो जाता है। लगातार जारी इस प्रक्रिया के चलते धीरे-धीरे अब हालात यह बन चुके हैं कि आने से पहले ही थानेदार साहब के जाने की तैयारियां शुरू हो जाती है ओर उनकी विदाई के वक्त को लेकर भी लोगों द्वारा जीत-हार के खेल तक लग जाते हैं।

वैसे तो अजब शाजापुर-गजब शाजापुर की हर बात बेमिसाल है लेकिन इसकी फेहरिस्त में अब नगर की मुख्य कोतवाली भी शामिल होती दिखाई दे रही है जहां थाना प्रभारी के कक्ष में लगी सेवाकाल की तख्ती कम समय में कई सिंघमों के नामों की फेरहिस्त से जगमगाती नजर आ रही है। इस खासियत के पीछे की असली वजह यह है कि कोतवाली बनने के बाद यहां पदस्थ हुए थाना प्रभारी ज्यादा समय तक टिक नहीं पाए हैं। अब चाहे कोई राजनैतिक कारण हो या फिर कोई विभागीय प्रक्रिया, एन-केन-प्रकारेण आने के कुछ वक्त बाद ही उनकी रवानगी होती रही है। इसे अद्भुत संयोग ही कहा जाएगा कि कोतवाली बनने के बाद पहले थाना प्रभारी के रूप में पदस्थ रामवल्लभ चौहान के अलावा सलीम खान और राजेन्द्र वर्मा केवल ये थाना प्रभारी ही एसे रहे जिन्होंने यहां अपने सेवाकाल का सबसे अधिक समय इस कोतवाली में रहकर बिताया। इसके विपरित इसे विडम्बना ही समझा जाएगा कि इनके पहले ओर बाद में आने वाले करीब 16 से अधिक कोतवाल साहब शहर ओर शहरवासियों को समझने के पहले ही यहां से चलते बने। हालांकि बीते कुछ सालों में शहरी इलाके का एरिया बढऩे से उपजी एक अतिरिक्त थाने की मांग को देखते हुए खेल प्रशाल के समीप लालघाटी थाना कोतवाली की स्थापना भी कर दी गई है लेकिन जिला मुख्यालय की मुख्य कोतवाली होने के कारण शहरी क्षेत्र का पूरा दायित्व भार अब भी इसी कोतवाली पर हैं जहां थाना प्रभारियों की आवाजाही लगातार बनी हुई है। एक तरफ जहां बीते तीन-चार सालों में शहर में बार-बार होने वाले जातिगत विवादों ओर सांप्रदायिक तनावों ने वैसे ही शहरी वातावरण को अति से अत्यंत संवेदनशील इलाके में अव्वल बनाया हुआ है वहीं दूसरी तरफ एसे नाजुक हालात में कोतवाली प्रधान का आना ओर कुछ वक्त में विदा हो जाना अपने आप में शहर के लिए एक अलग तरह की समस्या बना हुआ है। एसा नहीं है कि बार-बार होने वाली इस अदला-बदली के चक्कर में विभागीय व्यवस्थाएं ही प्रभावित हो रही है बल्कि आम लोगों को भी इस प्रक्रिया के कारण कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिसे समझा जाना वर्तमान समय के मुताबिक बेहद जरूरी है। अभी थाना प्रभारी के रूप में कोतवाली की कमान उदयसिंह अलावा के हाथों में है जिन्हें यहां आए अभी महज पांच महिने ही बीते हैं। अब देखना यह है कि अलावा जी शाजापुर को कितने दिन अपनी सेवा देकर तत्काल विदाई परंपरा को तोड़ पाते हैं या फिर कोतवाली की तबादला रस्म हमेशा की तरह ही इस बार भी बरकरार रहती है।

सलीम खान ने बिताया सबसे ज्यादा समय
एबी रोड़ पर कोतवाली भवन बनने के बाद से लेकर वर्तमान समय तक कुल 19 थाना प्रभारी यहां पदस्थ हो चुके हैं और अल्प समय में ही उनकी विदाई भी होती रही है। साल 2008 से लेकर 2020 तक चली इस परंपरा के चलते केवल 3 को छोड़ दिया जाए तो शेष 16 थाना प्रभारी 6 महिनों से ज्यादा का वक्त शहर में बिताने में असफल साबित हुए। जिन तीन थाना प्रभारियों ने इस मिथक को तोडक़र अपना कार्यकाल पूरा किया उनमें सबसे पहला नाम पांचवे टीआई सलीम खान का है जिन्होंने 4 साल 6 दिन थाना प्रभारी के रूप में अपनी सेवा शहर को दी। कोतवाली में किसी टीआई का यही कार्यकाल सबसे बड़ा भी रहा। इसके बाद दूसरे नंबर पर दसवें टीआई राजेन्द्र वर्मा का नाम है जिन्होंने अपनी पदस्थापना के बाद 2 साल 8 माह और 20 दिन शाजापुर थाना प्रभारी की भूमिका निभाई। इसके बाद कोतवाली बनने के बाद पहले टीआई के रूप में आए राम वल्लभ चौहान ने अपने पहले कार्यकाल में 1 साल 6 माह और 7 दिन तथा दूसरे कार्यकाल में 4 माह 3 दिन इस हिसाब से कुल 1 साल 10 माह और 10 दिन थाना प्रभारी के रूप में शाजापुर में बिताए। बाकि 16 टीआई कब आए और कब गए ये शहरवासी तो दूर अच्छी तरह से विभागीय पुलिसकर्मियों को भी याद नहीं होगा।

क्र. थाना प्रभारी कब से कब तक इतने दिन रहे

  1. राम वल्लभसिंह चौहान 02.08.2006 से 09.02.2008 1 साल 6 माह 07 दिन
  2. अजय वर्मा 02.02.2008 से 22.05.2008 4 माह 20 दिन
  3. एस.आ.सनखेडिय़ा 31.05.2008 से 28.12.2008 6 माह 28 दिन
  4. रामवल्लभसिंह चौहान 02.08.2006 से 09.02.2008 1 साल 6 माह 07 दिन
  5. सलीम खॉन 27.06.2009 से 02.07.2013 4 साल 06 दिन
  6. एम.आर.खॉन 02.07.2013 से 30.09.2013 02 माह 06 दिन
  7. अर्जुनसिंह पंवार 30.09.2013 से 20.12.2013 02 माह 20 दिन
  8. ब्रजेश मिश्रा 01.03.2014 से 18.11.2014 08 माह 17 दिन
  9. आनंद तिवारी 19.11.2014 से 23.02.2015 03 माह 04 दिन
  10. राजेन्द्र वर्मा 24.02.2015 से 16.11.2017 2 साल 08 माह 20 दिन
  11. राकेश कुमार नैन 22.11.2017 से 23.04.2018 05 माह
  12. आलोकसिंह परिहार 10.05.2018 से 05.08.2018 02 माह 26 दिन
  13. कुलवन्त जोशी 16.08.2018 से 06.10.2018 01 माह 20 दिन
  14. कन्हैयालाल दांगी 06.10.2018 से 17.03.2019 05 माह 11 दिन
  15. रामदीन कनावा 17.03.2019 से 31.07.2019 04 माह 13 दिन
  16. विवेक गुप्ता 31.07.2019 से 12.10.2019 02 माह 12 दिन
  17. अमरसिंह बड़ोले 19.12.2019 से 16.01.2020 27 दिन
  18. अजीत तिवारी 16.01.2020 से 31.09.2020 08 माह 15 दिन
  19. उदयसिंह अलावा 13.09.2020 से आज तक 05 माह

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