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लाखों के पुलिस बैरिकेड, वॉच टावरों को लग रहा जंग

कोरोना में उपयोग कर भुला निगम, नशा करने वाले कर रहे क्षतिग्रस्त
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

धार्मिक आयोजन के साथ शहर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर मंगाए गए बैरिकेड इन दिनों जंग लगने की स्थिति में पहुंचते दिखाई दे रहा है। नशा करने वाले क्षतिग्रस्त कर अपना हित भी साधने में लगे हुए हैं। पुलिस लाइन पर लेकर पूरे शहर में जगह-जगह बैरिकेड वॉच टावर और स्टॉपर नाली सड़क किनारे और लावारिस हालत में पड़े दिखाई दे रहा है।
वर्ष 2016 सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था के लिए लाखों करोड़ों रुपए के खर्च कर बैरिकेड स्टॉपर और वॉच टावर मंगाए गए थे। महाकुंभ के दौरान उपयोगिता साबित भी हुई थी। लेकिन उसके बाद सुरक्षा के यह संसाधन लावारिस साबित होते नजर आने लगे थे। खबरें प्रकाशित होने के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा इन्हें एकत्रित कर पुलिस लाइन तक पहुंचाया गया था। उसके बाद शहर में होने वाले धार्मिक आयोजन सार्वजनिक कार्यक्रम राजनीतिक कार्यक्रमों में इनका उपयोग किया जाने लगा। कुछ समय तक तो लगा कि पुलिस प्रशासन द्वारा खर्च की गई राशि का सही इस्तेमाल किया जा रहा है लेकिन अब हालात बदले हुए नजर आ रहे हैं। बेरीकैट्स स्टॉपर और वॉच टावर जंग खाते नजर आने लगे। कोरोना का हाल में इनकी उपयोगिता एक बार फिर सही साबित हुई थी। लॉकडाउन खुलने के बाद नगर निगम भी इनका उपयोग कर भूल गया। पुलिस लाइन के साथ ही सामाजिक न्याय परिसर आगर रोड पर हजारों बैरिकेड क्षतिग्रस्त हालात में दिखाई दे रहे हैं। वही शहर की गलियों से लेकर सड़कों पर भी लावारिस हालात में पड़े देखे जा सकते हैं। रखरखाव के अभाव में इनका फायदा नशा करने वालों को मिल रहा है। रात के अंधेरे में बेरी कैट्स छतिग्रस्त कर नशा करने वाले अपनी लत की पूर्ति करने में लगे हुए हैं जिससे शासन को काफी हानि पहुंची दिखाई दे रही है। वॉच टावर का उपयोग ना के बराबर रह गया है। शहर में जिन स्थानों पर वाह टावर लगे हैं वह निजी कंपनी के और राजनीतिक पार्टियों के बैनर पोस्टर लगाने के काम आ रहे हैं।
सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए होते हैं उपलब्ध
शहर में होने वाले सार्वजनिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने वाले पुलिस विभाग से संपर्क कर बेरीकैट्स आयोजन स्थल तक ले आते हैं। कार्यक्रम खत्म होने के बाद कई दिनों तक उसी स्थान पर पड़े रहते हैं। क्षेत्रवासी असुविधा होने पर उन्हें लापरवाही से एक स्थान से दूसरे स्थान पर उठाकर पटक देते हैं। पुलिस प्रशासन को सार्वजनिक कार्यक्रमों में इनके उपयोग के लिए मिनिमम शुल्क लागू कर देना चाहिए ताकि आयोजन करने वाले इनकी उपयोगिता को समझ सके। वही सबसे ज्यादा बेरी कैट्स का उपयोग करने वाली पुलिस को भी अपनी जिम्मेदारी को समझना होगा ताकि बेवजह शासन को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

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