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अधिकारी ही लगा रहे है नगर निगम को चूना, सिटी बस संचलान 61 रुपए प्रतिदिन पर किराए पर दी बसें

  • सिटी बस संचलान से जुडा है पूरा मामला
  • 61 रुपए प्रतिदिन पर किराए पर दी बसें
  • आपॅरेटर चार गुना तक ज्यादा पैंसा देने को है तैयार
  • निगम अधिकारी अपने व्यक्ति को पहुंचा रहे लाभ
  • नगर निगम को प्रतिमाह होगा लाखो रुपए का नुकसान
    उज्जैन। नगर निगम द्वारा हाल ही में सिटी बस संचालन के लिए टेंडर काॅल किया था। इसमें दो फर्म विनायक टूर एंड टेवल्स कंपनी और आरध्या केयर ने भाग लिया था। आरध्या केयर के संचालक देवेन्द्र शर्मा ने बताया मैने टेंडर में प्रति बस 7531 रुपए प्रतिमाह कोट किया था, जबकि अभी जिस कंपनी का टेंडर खोला गया है वह निगम को प्रतिमाह केवल 1851 रुपए ही देगा। ऐसे में निगम को हर महिने 5680 प्रतिबस के हिसाब से लाखों रुपए का नुकसान होगा। निगम अधिकारियों ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान कई नियमों की अनदेखी की थी। टेंडर ओपनिंग की तारिख 10 फरवरी थी, लेकिन उस दिन टेंडर नहीं खोला गया। मैंैने जब वर्कशाॅप प्रभारी विजय गोयल ने बात की तो उन्होंने भाजपा के कार्यक्रम का बहाना देकर 13 फरवरी तक बात टाल दी। 13 फरवरी को भी टेंडर ओपन ना करते हुए 18 फरवरी को बाले बाले खोल दिया। टेंडर ओपनिंग के समय बीडर को बुलाया जाता हैं, लेकिन निगम अधिकारियों ने मुझे सूचना तक नहीं दी थी। दो तीन दिन पहले जब मैंने एक अखबार में पढा की निगम द्वारा 1851 रुपए प्रतिमाह की दर से सिटी बसों को संचालित करने लिए विनायक टूड कंपनी को दी जा रही हैं तो मुझे पूरे मामले की जानकारी लगी। मैंने निगम अधिकारी से मेेरा टेंडर निरस्त होने की जानकारी मांगी तो मुझे लिखित में कोई जवाब नहीं दिया गया है।
    टेंडर प्रक्रिया भले ही हो चुकी है कि लेकिन अंतिम निणर््य कमेटी द्वारा ही किया जाएगा। देवेन्द्र शर्मा ने कहा कि निगम अधिकारियों को नगर निगम की आर्थिक हालात को देखते हुए निर्णय लेना चहिए। निगम के पास अभी वैसे भी मद की कमी है ऐसे इतनी सस्ती दरों पर सिटी बसों को देना ठीक नहीं हैं।
    मुझे लगता है कि अभी जिस विनायक टूर कंपनी की दर स्वीकत हुई हैं, उसके मालिक का निगम अधिकारियों के साथ अच्छा संबंध हैं। इसी कंपनी द्वारा अधिकांश अधिकारियों के यह वाहन अटैच किए हुए। विनायक कंपनी के मालिक और निगम अधिकारियों की सांठगांठ लंबे समय चल रही हैं। यह लोग फर्जी डीजल के बील भी बनवाते है और नगर निगम को चूना लगाते है। साफ तौर पर विनायक कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए कि निगम अधिकारियों ने टेंडर ओपनिंग की तारिख को पहले बढाया, फिर मुझे बिना सूचना दिए पूरी प्रक्रिया को कर दिया। अब ऐसे में निगम को हर महिने लाखों रुपए का नुकसान होगा।
    विनायक कंपनी को लाभ पहुंचने के लिए मोटा लेने देने भी हुआ हैं। इस प्रक्रिया से जुडे अधिकारियों की शिकायत हम मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री से भी करेंगे, क्योकि इस तरह ही मिलीभगत से राजस्व की हानि हो रही हैं।
    1 1851 रुपए प्रतिमाह में मंजूरी दे दी, वहीं 7531 को ना मंजूर कर दिया।
    2 टेंडर को तय तारीख पर ही खोला जाता हैं, लेकिन उसकी तारीख को बार बार आगे बढाया गया।
    3 टेंडर खुलने के समय बीडर को सूचना दी जाती है ताकि प्रक्रिया पर कोई सवाल न खडे हो, लेकिन निगम अधिकारियों ने ऐसा कुछ भी नहीं किया।
    4 बीडर को अब तक लिखित भी यह भी नहीं बताया गया कि उनका टेंडर किस कारण से रिजेक्ट किया गया है।
    5 नगर निगम को होगा हर महिनें होगा डेढ लाख रुपए से अधिक नुकसान।

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