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महाशिवरात्रि: चंदन श्रंगार से सजे बाबा, कल से दूल्हा स्वरूप में देंगे दर्शन

12 मार्च को दोपहर में होगी भस्मा आरती, गर्भगृह में प्रतिबंधित रहेगा प्रवेश
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी में महाशिवरात्रि उत्सव की आज से शुरुआत हो गई है। बाबा महाकाल का चंदन से श्रंगार किया गया है। कल से बाबा दूल्हा स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे। 11 मार्च को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। वर्ष में एक बार दोपहर के समय होने वाली भस्मा आरती 12 मार्च को होगी।
महाशिवरात्रि पर्व 11 मार्च से मनाया जाएगा। इससे पहले भगवान शिव और माता पार्वती के नौ दिवसीय विवाह उत्सव का आयोजन बाबा महाकाल के दरबार में प्रतिवर्ष किया जाता है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी से फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तक विवाह उत्सव की धूम रहती है जिसकी शुरुआत आज से हो चुकी है। आज सुबह महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व के पहले दिन कोटितीर्थ कुंड स्थित श्री कोटेश्वर महादेव मंदिर में शिवपंचमी का पूजन-अभिषेक किया गया। उसके बाद बाबा महाकाल का चंदन-हल्दी शृंगार किया गया। नौ दिनों तक महाकालेश्वर मंदिर में उत्सवी माहौल रहेगा। प्रतिदिन पंचामृत अभिषेक के साथ पूजा अर्चना होगी और 11 ब्राह्मणों द्वारा एकादश-एकादशनी रुद्रपाठ किया जाएगा। रुद्रपाठ में 11 ब्राह्मण और दो सहायक पुजारी शामिल रहेंगे। महाशिवरात्रि पर्व के चलते मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम होने वाली पूजा-आरती का समय परिवर्तित किया गया है। अब सुबह 10.30 बजे होने वाली भोग आरती दोपहर 1 बजे होगी और शाम 5 बजे होने वाला संध्या पूजन दोपहर 3 बजे किया जाएगा। उसके बाद बाबा का शृंगार होगा। महाशिवरात्रि पर्व को देखते हुए मंदिर प्रबंध समिति के साथ जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं। मंदिर में श्रद्धालुओं को प्रवेश दिए जाने की अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर प्रशासक नरेन्द्र सूर्यवंशी ने बैठक के दौरान निर्णय लिया है कि 250 रुपए की शीघ्र दर्शन रसीद लेने वाले श्रद्धालुओं को चारधाम, हरसिद्धि चौराहा से होते हुए शंखद्वार से प्रवेश दिया जाएगा। सामान्य दर्शनार्थियों के लिए अलग-अलग द्वार से प्रवेश व्यवस्था रहेगी। जिसके लिए प्रवेश मार्ग पर बेरीकेट्स लगाए जा रहे हैं।
गर्भगृह में प्रवेश रहेगा प्रतिबंधित
कोरोना काल से आम श्रद्धालुओं के लिए बाबा महाकाल के गर्भगृह में प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है। महाशिवरात्रि पर्व पर भी श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। दर्शन व्यवस्था नंदी हॉल से ही रखी गई है। गर्भगृह कें केवल पंडे-पुजारी ही बाबा के श्रृंगार और पूजन आरती के लिए पहुंचेंगे। मंदिर परिसर में भी श्रद्धालुओं की भीड़ एकत्रित न हो इसके इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों द्वारा पर्व की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार जायजा लिया जा रहा है।
इन स्वरूपों में होंगे दर्शन
महाशिवरात्रि पर्व पर नौ दिनों तक बाबा अलग-अलग स्वरूप में दूल्हा बनकर भक्तो को दर्शन देंगे। आज चंदन शृंगार के रूप में श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर रहे हैं। कल 4 मार्च को बाबा शेषनाग स्वरूप धारण करेंगे। 5 मार्च को घटाटोप शृंगार, 6 मार्च को छबीना शृंगार, 7 मार्च को होल्कर शृंगार, 8 मार्च को मनमहेश, 9 मार्च को उमा-महेश, 10 मार्च को शिव ताण्डव स्वरूप में बाबा का शृंगार किया जाएगा। 11 मार्च को महाशिवरात्रि पर बाबा सेहरा स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे। बाबा महाकाल की भस्मारती प्रतिदिन सुबह 4 बजे होती है। महाशिवरात्रि पर्व के दूसरे दिन वर्ष में एक बार दोपहर के समय होने वाली बाबा की भस्मारती 12 मार्च को होगी।

कोटितीर्थ कुण्ड में मछलियों की मौत
महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि उत्सव के पहले दिन परिसर में बने कोटितीर्थ कुण्ड में मछलियों की मौत होने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि ऑक्सीजन की कमी के चलते मछलियों की मौत हुई है। कोटितीर्थ कुण्ड में भी पूर्व में भी कई बार मछलियों की मौत का मामला सामने आ चुका है। आज सुबह जब मछलियों की मौत की जानकारी सामने आई तो मंदिर प्रबंध समिति द्वारा मछलियों को बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया गया था।

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