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कान्ह नदी पर बना कच्चा स्टॉपडेम टूटा, शिप्रा में मिला गंदा पानी

प्रशासन और पीएचई के अधिकारी पहुंचे, मरम्मत का काम शुरू
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

जिसका अंदेशा था आज तड़के वही बात सामने आ गई। शिप्रा नदी में दूषित पानी मिलने से बचाने के लिए कान्ह नदी पर बनाया गया कच्चा स्टॉपडेम टूट गया और तेज रफ्तार के साथ शिप्रा का पानी मैला हो गया। जानकारी लगते ही प्रशासन और पीएचई के अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे।
त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर के पास कान्ह नदी का गंदा पानी शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए कुछ समय पहले कच्चा स्टॉपडेम बनाया गया था। पिछले दिनों शनिश्चरी अमावस्या पर शिप्रा को स्वच्छ रखने के लिए नर्मदा का पानी छोड़ा गया था। शिप्रा स्वच्छ नजर आ रही थी लेकिन कान्ह नदी का स्टॉपडेम मुसीबत बना हुआ था। आज तड़के 4:30 बजे के लगभग अचानक स्टॉपडेम टूट गया और तेज बहाव के साथ गंदा पानी शिप्रा में मिलने लगा। इस बात की जानकारी लगते ही पीएचई के कर्मचारी तड़के मौके पर पहुंच गए थे। कमिश्नर और कलेक्टर को भी डेम टूटने की जानकारी मिली तो प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर भेज दिया। इस बीच करीब 5 से 8 किलोमीटर तक कान्ह नदी का गंदा पानी शिप्रा में बहता दिखाई दे रहा था जिसकी रफ्तार तेजी के साथ आगे बढ़ रही थी। प्रशासन द्वारा गंदा पानी गऊघाट स्टॉपडेम से आगे न बढ़े इसके प्रयास शुरू कर दिए थे। वहीं कान्ह नदी के स्टॉपडेम की मरम्मत का काम भी शुरू करा दिया गया था। विदित हो कि शनिश्चरी अमावस्या से पूर्व प्रशासन और पीएचई के अधिकारियों ने लाखों रुपए खर्च कर कच्चा स्टॉपडेम बनाया था ताकि शिप्रा दूषित न हो सके। डेम बनाने के बाद भी उसके टूटने की आशंका बनी हुई थी जिस पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया। नतीजा आज सुबह शिप्रा पूरी तरह से दूषित पानी से भरी नजर आने लगी थी।
कल से ही हो रहा था रिसाव
सूत्र बता रहे हैं कि कान्ह नदी का स्टॉपडेम कल दोपहर बाद से ही टूटने की कगार पर पहुंच गया था। गंदे पानी का रिसाव धीरे-धीरे शुरू हो चुका था जो शिप्रा की ओर बढ़ रहा था। रात में बहाव तेज हो गया और अल सुबह खबर आई कि स्टॉपडेम टूट चुका है। कलेक्टर ने कान्ह नदी के दूषित पानी को डायवर्ट करने के लिए पूर्व में ही निर्देश दे दिए थे ताकि दूषित पानी शिप्रा की ओर न आ सके। लेकिन गंभीरता नहीं बरती गई। पूर्व में भी कई बार कान्ह नदी का गंदा पानी शिप्रा को मैला कर चुका है। हर बार गंदा पानी रोकने की योजना बनाई जाती रही लेकिन कोई ठोस निष्कर्ष आज तक नहीं निकल पाया है। शिप्रा को स्वच्छ बनाने के लिए कई वर्षों से प्रयास किए जा रहे हैं, कागजों पर योजनाएं बनकर तैयार भी हुई हैं। कान्ह नदी के पानी के साथ शिप्रा में फैली जलकुंभी भी अब तक साफ नहीं हो पाई है।

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