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महाराष्ट्रीयन समाज ने घरों की छत पर गुड़ी बांधकर मनाया गुड़ी पड़वा का पर्व
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

महामारी की विपदा में भगवान के मंदिरों को भी बंद कर दिया गया है। आज से देवी शक्ति आराधना के पर्व चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हुई है लेकिन देवी मंदिरों के बाहर पटो को बंद रखा गया है। देवी मंदिरों में पुजारियों द्वारा ही घटस्थापना कर पूजा अर्चना की गई है।
वर्ष में मुख्य रूप से दो नवरात्रि के पर्व मनाए जाते हैं वही साल भर में पांच नवरात्रि के पर्व देवी शक्ति आराधना के रहते हैं। आज से चैत्र नवरात्रि का पर्व शुरू हो चुका है। इस दिन नए विक्रम संवत की भी शुरुआत मानी गई है। कोरोना कर्फ्यू के चलते सुबह 10 बजे तक शहर को खुला रखने की छूट दी गई थी इस बीच कई श्रद्धालुओं ने देवी मंदिरों का दर्शन के लिए रुख किया लेकिन कोरोना गाइडलाइन के मुताबिक मंदिरों को बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। जिसके चलते श्रद्धालुओं ने मंदिर के बाहर से ही दर्शन किए और लौट आए।

10 बजे बाद किसी को भी घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई है जिसके चलते मंदिरों की ओर बढऩे वाले कदम भी रुक गए थे। मंदिरों में पुजारियों द्वारा ही पूजा अर्चना कर घट स्थापना की गई और नौ दिवसीय पर्व की शुरुआत की गई। शक्तिपीठों में शामिल मां हरसिद्धि के दरबार में विशेष पूजा अर्चना के साथ नवरात्रि पर्व की आराधना की गई है। वही मां चामुंडा के दरबार में भी पूजा अर्चना के साथ माता का श्रंगार किया गया। गढ़कालिका माता, भूखी माता, नगरकोट माता मंदिर, बिजासन सावन भादो माता मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में भी पुजारियों द्वारा ही पूजा की गई है। पिछले वर्ष भी चैत्र नवरात्रि के दौरान मंदिरों में सन्नाटा पसरा रहा था। नवमी के दिन होने वाली शासकीय पूजा भी एक माह बाद कराई गई थी। माता के भक्तों द्वारा घरों में रहकर नवरात्रि पर्व की आराधना की जा रही है और माता से कोरोना संक्रमण को समाप्त करने की कामना हो रही है।

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