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चक्रतीर्थ पर चारों ओर जल रही चिताएं

त्रिवेणी और ओखलेश्वर श्मशान घाट पर भी हो रहा शवों का अंतिम संस्कार
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

पिछले 1 सप्ताह से चक्रतीर्थ पर चारों ओर दिन रात चिताएं जलती नजर आ रही हैं। प्रतिदिन 20 से 25 शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंचना बताए जा रहे हैं। त्रिवेणी स्थित श्मशान घाट पर भी कोरोना से मरने वालों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। लगातार बढ़ रही मरने वालों की संख्या को देखते हुए ओखलेश्वर घाट पर भी अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर काफी तेजी से फैल रही है इस बीच एकाएक मरने वालों की संख्या भी बढ़ चुकी है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के कोरोना हेल्थ बुलेटिन से पता लग रहा है कि कोरोना के ज्यादा लोगों की मौत नहीं हो रही है। लेकिन प्रतिदिन शिप्रा नदी स्थित चक्रतीर्थ पर 20 से 25 शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंच रहे हैं। कभी-कभी यह संख्या 30 से 35 पहुंच जाती है। चक्रतीर्थ पर बनाए गए अंतिम संस्कार के ऊपरी हिस्से से लेकर शिप्रा किनारे बने अंतिम संस्कार स्थल तक चिताएं जलती नजर आ रही है। त्रिवेणी स्थित श्मशान घाट पर भी कोरोना के संक्रमित होकर जान गंवाने वाले लोगों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि शहर के दो श्मशान घाटों में हो रहे अंतिम संस्कार के साथ अब ओखलेश्वर स्थित घाट पर भी अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बताया जा रहा है कि प्रतिदिन शहर में 40 से 50 लोगों का अंतिम संस्कार हो रहा है। जिसमें से अधिकांश मरने वाले सामान्य बीमारियों और वृद्धा अवस्था के शामिल है कोरोना के मरने वालों की संख्या कम ही है। लेकिन ऐसे समय में अचानक मरने वालों की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है।
नहीं मिल रहे शव ले जाने वाले वाहन
जिस तरह से शहर में लगातार मौतों की खबर सामने आ रही है उसे देखते हुए शवों को चक्रतीर्थ तक ले जाने के लिए वाहन नहीं मिल पा रहे हैं। नगर निगम शव वाहन वेटिंग पर चल रहा है। वही कुछ सामाजिक संस्थाओं द्वारा चलाए जाने वाले शव वाहन भी समय पर नहीं मिल पा रहे हैं। जिसके चलते जिन घरों में मौत हो रही है उन्हें लोडिंग वाहन के साथ अन्य वाहन किराए पर लेना पड़ रहे हैं। वाहन नहीं मिलने पर घंटों इंतजार भी करना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला गुरुवार को भी सामने आया था। निजी अस्पताल में भर्ती 1 साल के मासूम की मौत हो जाने के बाद परिजनों को घंटों तक शव वाहन का इंतजार करना पड़ा था। मासूम की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव बताई गई थी। मासूम नलखेड़ा के गुर्जर खेड़ी गांव का रहने वाला था। उसके परिवार में किसी को भी संक्रमण के लक्षण नहीं थे वही पूरा गांव भी कोरोना मुक्त होना बताया जा रहा था।
अंतिम बार मुंह दिखाने के मांग रहे पैसे..!
सूत्रों से मिल रही जानकारी अनुसार अस्पतालों में भर्ती कोरोना पॉजिटिव और संदिग्ध लोगों की मौत के बाद उनके शवों को अस्पताल से ही पैक कर नगर निगम के कर्मचारी श्मशान घाटों तक ले जा रहे हैं। मरने वालों के परिजन आखिरी बार चेहरा देखने की बात शवों को ले जाने वाले लोगों से कहीं जा रही है तो उनके द्वारा चेहरा दिखाने के लिए पैसों की मांग की जा रही है। जो काफी अमानवीय नजर आ रहा है। कोरोना संक्रमण काल में हर कोई अपना फायदा तलाश रहा है। हमने शवों का चेहरा दिखाने के नाम पर पैसे देने वाले परिवारों को तलाशने का प्रयास किया लेकिन वह अंतिम संस्कार के बाद अपने घरों को लौट चुके थे। जिसके चलते पुख्ता पुष्टि नहीं हो पाई। लेकिन सूत्र जो बता रहे हैं उस पर विश्वास किया जाए तो ऐसा अमानवीय कृत्य करने वालों को भगवान कभी क्षमा नहीं करेगा।

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