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बाहर से शरीर फिट, भीतर वायरस कर देता है फेफड़ों को खोखला

माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन
कोरोना की दूसरी लहर पूरे भारत के साथ-साथ मध्यप्रदेश और उज्जैन जिले के लिये भी घातक साबित होती नजर आ रही है। कोरोना की दूसरी लहर में यह वायरस फेफड़ों पर ज्यादा असर कर रहा है। जो कोरोना के रोगी बाहर से फिट दिखते हैं, लेकिन भीतर ही भीतर वायरस फेफड़ों को क्षतिग्रस्त कर देता है। इस बार वायरस फेफड़ों को इतनी तेजी से संक्रमित कर रहा है कि मरीज को संभलने का मौका ही नहीं मिल रहा। फेफड़े खराब होने के लक्षण भी संक्रमित जल्दी महसूस नहीं कर पा रहे है। बोलते समय दम भरने या चलते समय सांसे फूलने के बाद डाक्टर जब चेस्ट स्कैन करवा रहे है तब पता चल रहा है फेफड़े 20 से 40 फीसद तक संक्रमित हो चुके है।
कोविड मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि वायरस के इस असर को हैप्पी हाइपोक्सिया कहा जाता है, यानी उनके शरीर में कोई तकलीफ नहीं होती, लेकिन आक्सीजन की कमी शुरू हो जाती है। आक्सीजन का सैचुरेशन 95 रहता है। आक्सीजन की कमी जांचने के लिए छह मिनट पैदल चलाने के पहले और बाद में आक्सीमीटर से आक्सीजन का स्तर देखना चाहिए। पैदल चलने के बाद पांच पाइंट से ज्यादा कमी नजर आ रही है तो यह न्यूमोनिया का संकेत है। इसके बाद डॉक्टर की सलाह से चेस्ट स्कैन कराना चाहिए।
इन बातों का ध्यान रखना होगा
कोविड रिपोर्ट पाजीटिव आने के तत्काल बाद मन से सिटी स्कैन न कराए। डॉक्टर की सलाह लें। एक-दो दिन रुककर जांच कराने से फेफड़ों में संक्रमण की सही स्थिति पता चलती है। कई बार शुरूआत में संक्रमण कम रहता है और रोगी चेस्ट स्कैन करा कर निश्चित हो जाते है कि उन्हें कम संक्रमण है।
होम आइसोलेट भी है तो कमरे में चलना-फिरना जारी रखे, ताकि फेफड़ों पर दबाव पडऩे से कई बार दम फूलने, सांस में परेशानी होने से संकेत मिल जाते है कि फेफड़ों में कुछ गड़बड़ है।
हालत सामान्य लगे, तब भी दिन में पांच बार आक्सीजन का स्तर जरुर नापे। संक्रमण के पांच दिन तक आक्सीजन स्तर पर नजर रखे।

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