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मृतक के परिजनों पर दर्ज हुआ प्रकरण
माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन

आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में कोरोना पॉजीटिव मरीज की मौत और उसके सिर से बहते खून के बाद हुए हंगामे में शामिल मृतक के परिजनों पर पुलिस ने देर रात केस दर्ज कर लिया। हंगामे में डॉक्टरों के सरिये का शिकार पुलिसकर्मी के सिर में चोट लगने के बाद तीन टांके लगाए गए हैं। लेकिन अब तक पुलिसकर्मी की शिकायत पर मेडिकल कॉलेज के किसी भी डॉक्टर या कर्मचारी के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं की गई है। कॉलेज के डॉक्टरों की धमकी के बाद प्रशासन और पुलिस दोनों सकते में है।
आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कोरोना पॉजीटिव मरीज बंशीलाल खंडेलवाल निवासी मेट्रो टाकीज के समीप की शनिवार को मौत हो गई थी। परिजन अंतिम बार चेहरा देखने के लिए मेडिकल कालेज पहुंचे थे जहां मेडिकल कालेज स्टॉफ द्वारा परिजनों को चेहरा दिखाया गया और शव को पैक कर अंतिम संस्कार के लिए शव वाहन में रखा। जैसे ही शव को स्ट्रेचर से उठाया गया सिर से खून बहता देख परिजन भड़क गए। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों से सिर में चोट लगने की जानकारी मांगी जिस पर डॉक्टरों ने चुप्पी साध ली। परिजनों का आक्रोश भड़क गया और कुछ देर में ही स्थिति ने हंगामे का रूप ले लिया। मेडिकल कालेज के डॉक्टरों ने डंडे, सरिये निकालकर मृतक के परिजनों पर हमला कर दिया। चिमनगंज थाने के आरक्षक आशुतोष ने मृतक के परिजनों को बचाकर एक वाहन में बैठाया। यह देख डॉक्टरों ने परिजनों की मदद कर रहे पुलिसकर्मी के सिर पर ही लोहे के सरिये से हमला कर दिया। पुलिसकर्मी लहूलुहान हो गया और उसे उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। जानकारी लगते ही वरिष्ठ अधिकारियों सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। मेडिकल कॉलेज के जूनियर और सीनियर डॉक्टरों ने पुलिसकर्मियों से भी जमकर अभद्रता की। उन्होंने धमकी दी कि अगर हमारे खिलाफ कोई कार्यवाही की गई तो हम शटडाउन कर देंगे। मेडिकल कालेज में ही नहीं प्रदेश सहित देश के अन्य कॉलेजों में भी काम नहीं किया जाएगा। जिसके बाद पुलिस असमंजस में फंस गई। कलेक्टर भी मामले में जानकारी लेकर स्थिति को समझने में लगे रहे। पुलिसकर्मियों को उम्मीद थी कि उनके साथी पर हुए हमले के मामले में वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बाद डॉक्टरों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा लेकिन डॉक्टरों की धमकी को देखते हुए पुलिस ने उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया बल्कि देर रात उल्टा डॉक्टरों की शिकायत पर मृतक के परिजनों पर बलवा, गाली गलौच, मारपीट, धारा 188 का उल्लंघन करने के साथ डॉक्टर प्रोटेक्शन एक्ट का केस दर्ज कर लिया गया। मेडिकल कालेज के डॉक्टरों ने प्रशासन को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि सुबह 10.30 बजे तक कार्यवाही नहीं की गई तो काम बंद कर दिया जाएगा। जिसके चलते पुलिसकर्मी की शिकायत पर कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया गया। डॉक्टर इस बात पर अड़े थे कि पुलिस ने किसके आदेश से मेडिकल कालेज परिसर में लाठीचार्ज किया। लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्यवाही की जाए। जबकि पुलिस मामले की जानकारी मिलने के बाद मेडिकल कालेज पहुचंी थी तो हालात बिगड़े थे। जूनियर डॉक्टरों के हाथ में सरिये, लाठियां दिखाई दे रही थी और वह मृतक के परिजनों को जमकर पीट रहे थे। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने भी लाठियों का प्रयोग किया था।

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