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कई ट्रेनों का लगा ब्रेक, यात्रियों की कम हुई आवाजाही

उज्जैन। देश में कोरोना की दूसरी लहर के चलते कई शहरों और राज्यों में लॉकडाउन 7 मई तक का कर दिया गया है। देशवासी गाइडलाइन का पालन करते हुए घरों से नहीं निकल रहा है। ट्रेनों में यात्रियों की लगातार कम होती संख्या को देखते हुए कई ट्रेनों को बंद कर दिया गया है जिसके चलते अब रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की आवाजाही ना के बराबर हो गई है।
बाबा महाकाल की धार्मिक नगरी में प्रतिदिन दर्जनों ट्रेनों का आवागमन होता है। पिछले वर्ष लॉकडाउन के चलते ट्रेनों का सफर थम गया था। लेकिन जुलाई बाद ट्रेनों के सफर की शुरुआत धीरे-धीरे कर दी गई थी। लेकिन एक बार फिर मार्च-अप्रैल माह में कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप पूरे देश में दिखाई दिया है। जिसके चलते एक बार फिर धीरे-धीरे कर रेलवे विभाग ने ट्रेनों के पहियों पर ब्रेक लगाना शुरू कर दिया था। अप्रैल माह के अंतिम दिनों में करीब 2 दर्जन से अधिक ट्रेनों को बंद किया गया है जिसमें साप्ताहिक और लंबी दूरी की ट्रेनें शामिल है। रतलाम रेल मंडल में रेलवे कर्मियों के संक्रमित होने के बाद इस रूट पर आसपास चेहरों के लिए चलने वाली ट्रेनों को भी बंद कर दिया गया है। कुछ ट्रेनों का रूट बदला गया है। ट्रेनों में प्रतिदिन यात्रियों की संख्या भी कम होती जा रही है। मजदूर वर्ग भी अब ट्रेनों में सफर करता नजर नहीं आ रहा है। जिसके चलते धार्मिक नगरी के रेलवे स्टेशन पर अब यात्रियों की आवाजाही काफी कम हो चुकी है। आज सुबह रेलवे स्टेशन पर विरानी दिखाई दे रही थी। यात्रियों की प्रतीक्षा में कुछ ऑटो चालक जरूर स्टेशन परिसर पहुंचे थे। लेकिन आने वाली ट्रेन में यात्रियों के नहीं होने पर ऑटो चालकों को सवारी नहीं मिल पाई थी।
पहली बार दिख रहा ऐसा नजारा
बताया जा रहा है कि देश में पहली बार इस तरह से ट्रेनों के पहिए थमे नजर आ रहे हैं। पिछले 1 साल से कई रेलवे स्टेशनों पर वैसा नजारा दिखाई नहीं दिया है जैसा आम दिनों में होता था। धार्मिक नगरी उज्जैन में सुबह से लेकर देर रात तक हजारों यात्री देश-विदेश से उज्जैन पहुंचे नजर आते थे। जिनकी संख्या शून्य हो चुकी है। धार्मिक नगरी के सभी मंदिरों को बंद रखा गया है। मुंबई नगरी में भी लोकल ट्रेनों का सफर पूरी तरह से जमा हुआ है। कई बड़े राज्यों में भी रेलवे स्टेशन सुल्तान नजर आ रहा है। रेलवे की जानकारी रखने वालों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी ऐसी स्थिति ट्रेनों के सफर को लेकर नहीं देखी है। करीब 100 सालों में पहली बार ऐसा नजारा दिखाई दे रहा है। ट्रेन के साथ कई माल गाडिय़ां भी रुकी हुई है।

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