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घर पर कर रहे हैं कोरोना का इलाज, तो जरूरी है पल्स ऑक्सीमीटर का होना, जानें कैसे करता है ये डिवाइस काम

कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों के लिए पल्स ऑक्सीमीटर का महत्व क्या है? पल्स ऑक्सीमीटर कैसे करती है काम जानें।

कोरोना मरीजों के लिए पल्स ऑक्सीमीटर का महत्व

कोरोनावायरस से पूरा भारत परेशान है। हर दिन यहां 3 लाख से ऊपर कोरोना संक्रमितों की संख्या सामने आ रही है। इस वायरस से रोज लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। महाराष्ट्र, दिल्ली के हालात बदतर हैं। हॉस्पिटल में बेड, ऑक्सीजन, दवाओं, इंजेक्शन आदि की कमी से लोग मर रहे हैं। एक्सपर्ट्स भी माइल्ड कोरोना लक्षण से ग्रस्त कोरोना पॉजिटिव लोगों को घर पर ही होम आइसोलेशन में रहकर इलाज करने की सलाह दे रहे हैं। चूंकि, कोरोना लंग्स को भी नुकसान पहुंचा रहा है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन लेवल कम होने लगता है। इसलिए, लोगों को यह सलाह दी जा रही है कि सभी घर में पल्स ऑक्सीमीटर जरूर रखें। इससे दिन में 3-4 बार ऑक्सीजन लेवल चेक करें। यदि आप भी होम आइसोलेशन में रहकर कोरोना को हराने की लगातार कोशिश कर रहे हैं, तो पल्स ऑक्सीमीटिर आपके पास होना बेहद जरूरी है। इस कोरोना महामारी में इस डिवाइस की मांग काफी बढ़ गई है। पल्स ऑक्सीमीटिर से ये पता लग जाता है कि रेड ब्लड सेल्स (RBCs) के जरिए ऑक्सीजन सही से शरीर में पहुंच रहा है या नहीं।

पल्स ऑक्सीमीटर क्या है?

पल्स ऑक्सीमीटर एक छोटी सी डिवाइस है, जिसे शरीर का ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल मापने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आजकल कोरोना मरीजों के लिए यह छोटी सी डिवाइस (pulse oximeter for covid patients) बहुत महत्वपूर्ण हो गई है। खासकर, उनके लिए जो होम आइसोलेशन में रहकर अपना इलाज कर रहे हैं। यह एक क्लिप-ऑन डिवाइस की तरह होती है, जिसे उंगली में लगाया जाता है। यह शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को जांचती है। जब आप पल्स ऑक्सीमीटर को उंगली में लगाते हैं, तो नब्ज (Pulse) और ब्लड में ऑक्सीजन की मात्रा का पता चलता है। इससे होम आइसोलेशन (Home isolation corona patient) में रह कर इलाज कर रहे कोरोना मरीज प्रत्येक 4 घंटे के अंतराल में शरीर का ऑक्सीजन लेवल माप सकते हैं।

पल्स ऑक्सीमीटर कैसे करती है काम?

पल्स ऑक्सीमीटर को एक उंगली पर लगाते हैं। इससे एक रोशनी निकलती है, जो रेड ब्लड सेल्स के मूवमेंट, उनके रंगों की पहचान करता है। यह डिवाइस ब्लड सेल्स के रंग के आधार पर ही शरीर में ऑक्सीजन सैचुरेशन को मापने का काम करती है। यदि आप पूरी तरह से स्वस्थ हैं, तो शरीर का ऑक्सीजन लेवल 95-100 रहता है। ऑक्सीजन लेवल 94 से कम होता है, तो इसे घर पर प्रोनिंग के जरिए बढ़ा सकते हैं। 94 से भी नीचे जाना नुकसानदायक है। ऑक्सीजन लेवल 90 से भी कम हो जाए, तो व्यक्ति को हॉस्पिटल ले जाने की जरूरत होती है।

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