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5 गुना अधिक दाम में बेचा जा रहा था ऑक्सीजन फ्लो मीटर

खबर का असर: पुलिस की मेडिकल पर दबिश, संचालक के खिलाफ केस दर्ज
उज्जैन। वैश्विक महामारी की आपदा में दवा और स्वास्थ्य उपकरणों का व्यवसाय करने वाले जमकर फायदा उठा रहे हैं। जिसको लेकर सांध्य दैनिक मार्टी की महिमा ने रविवार 2 मई के अंक में स्वास्थ्य उपकरण ऑक्सीजन फ्लो मीटर के अधिक दामों में बेचे जाने की खबर को प्रकाशित किया था। खबर प्रकाशित होने के कुछ घंटे बाद ही पुलिस ने ग्राहक बनकर एक मेडिकल पर दबिश दी और 5 गुना अधिक दाम में बेचे जा रहे ऑक्सीजन फ्लो मीटर का खुलासा करते हुए मेडिकल संचालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।
कोरोना की दूसरी लहर में पूरा देश जूझ रहा है। उज्जैन जिले में भी कोरोना संक्रमण के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। सैकड़ों लोग घरों में रहकर अपना उपचार करा रहे हैं वहीं अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने की जगह नहीं बची है। ऐसे हालातों के बीच स्वास्थ्य संबंधी उपकरणों के साथ इंजेक्शन और दवा गोली महंगे दाम पर बेची जा रही है और लोगों को कमी होने का हवाला दिया जा रहा है। ऐसे ही एक मामले की जानकारी सांध्य दैनिक माटी की महिमा के कार्यालय तक पहुंची थी, जिसमें बताया गया था कि ऑक्सीजन फ्लो मीटर के दाम 3 से 4 गुना अधिक वसूल किए जा रहे हैं आपदा के इस समय में मेडिकल व्यवसायियों द्वारा मनमर्जी से पैसा वसूल किया जा रहा है। खबर प्रकाशित होने के बाद पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और ग्राहक बनकर कोतवाली थाना क्षेत्र के नीता मेडिकल स्टोर पर ऑक्सीजन फ्लो मीटर की खरीदारी के लिए पहुंच गई। 900 से 1000 में मिलने वाला फ्लो मीटर मेडिकल व्यवसाई ने 5 गुना अधिक दाम का होना बताकर 57 सौ रुपए का होना बताया। अधिक दाम की पुष्टि होते ही साइबर सेल प्रभारी विक्रम सिंह चौहान ने कोतवाली पुलिस टीम के साथ नीता मेडिकल स्टोर पर दबिश दी और मामले का खुलासा करते हुए संचालक दीपक असवानी के खिलाफ धारा 188, 269, 270 का केस दर्ज कर लिया। पुलिस कार्रवाई के साथी ऑक्सीजन फ्लो मीटर के संबंध में ड्रग इंस्पेक्टर को भी जानकारी दी गई और फ्लो मीटर की गुणवत्ता के साथ संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई को चिन्हित किया गया। बताया जा रहा है कि फ्लो मीटर की गुणवत्ता के साथ कंपनी द्वारा जारी किए गए बाजार मूल्य की जानकारी सामने आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब हो कि कुछ दिन पूर्व पुलिस ने रेमडेसीविर इंजेक्शन की कालाबाजारी का खुलासा करते हुए देशमुख अस्पताल और आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार कर रासुका की कार्रवाई की थी। इंजेक्शन के 30 से 40 हजार रुपए अधिक वसूले जा रहे थे।
इधर घर में चल रहा था कोरोना मरीज का उपचार
महामारी की आपदा में जहां लोगों द्वारा जन सहयोग के साथ संक्रमित मरीजों के परिजनों के भोजन और अन्य सामग्रियों की व्यवस्थाएं की जा रही है वही कुछ लोग आपदा के इस समय में अपना फायदा देख रहे हैं। ऐसा ही एक मामला ऋषि नगर क्षेत्र के एक मकान में होना सामने आया। जहां निजी अस्पताल में काम करने वाले रविंद्र सिंह पिछले कुछ दिनों से अपने घर में कोरोना संक्रमित मरीजों का उपचार करने में लगा हुआ था। उसकी पत्नी एएनएम होकर टीकाकरण अभियान में लगी हुई है। रविंद्र सिंह के घर अलग-अलग मरीजों के साथ ऑक्सीजन सिलेंडर की ऑटो से आवाजाही बनी होने के चलते क्षेत्रवासियों ने मामले की शिकायत प्रशासन से की थी। रविवार को तहसीलदार अभिषेक शर्मा ने अपनी टीम के साथ उक्त मकान पर दबिश दी। रविंद्र सिंह से पूछताछ करने पर वह अपने रिश्तेदार का उपचार घर पर करना बताने लगा। क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया कि ऋषि नगर संक्रमण का हॉटस्पॉट बना हुआ है। रविंद्र यहां प्रतिदिन अलग-अलग मरीज पहुंच रहे हैं। प्रशासनिक टीम मामले की पड़ताल कर रही थी उसी दौरान ऑटो से ऑक्सीजन सिलेंडर के यहां पहुंच गए और मामले में कई जानकारियां स्पष्ट हो गई। तहसीलदार ने मामले में निजी अस्पताल के कर्मचारी रविंद्र के खिलाफ माधवनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है वही उसकी पत्नी की भूमिका के संबंध में जांच के निर्देश दिए हैं।

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