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शासकीय अस्पताल के डॉ और कर्मचारी ने जुगाड से बना दी वायुमंडल से खींचकर मरीजों को ऑक्सीजन देने वाली मशीन

मरीजों को होने वाली परेशानी बनी प्रेरणा, 25 हजार रूपये के निजी खर्च से बनाई मशीन

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ऑक्सीजन का विकल्प नहीं मगर इमरजेंसी में मिलेगी मदद, मरीजों का 10 प्रतिशत बढ गया ऑक्सीजन लेवल

राकेश बिकुन्दिया, सुसनेर नगर के शासकीय अस्पताल में मरीजो को लगातार ऑक्सीजन की कमी दिखी तो सरकारी अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी ने बना दी मरीजो को प्राणवायु हवा देने वाली जुगाड़ की कम्प्रेशर मशीन। जी हां इस मशीन से हवा को वायुमंडल से खींच कर मरीज को दिया जा सकता है जिससे अचानक इमरजेंसी में कुछ हद तक मदद मिल सकती है। आपको 3 इडियट फ़िल्म का सीन तो याद होगा जिसमें फ़िल्म कलाकार अमीर खान इमरजेंसी होने पर डिलेवरी के लिए वेक्यूम वाली मशीन बना देता है। ठीक ऐसी ही सोच लेकर आगर मालवा जिले के सुसनेर के सरकारी अस्पताल में पदस्थ डाक्टर ने ऑक्सीजन कमी के चलते एक मशीन का जुगाड़ कर दिया है। जिससे वायुमंडल से ऑक्सीजन खींचकर कुछ समय के लिए मरीज को दी जा सकती है। मशीन बनाने वाले शासकीय चिकित्सक एमडी डॉक्टर ब्रजभूषण पाटीदार ने जब कुछ मरीजों पर इसका परीक्षण किया तो उनका ऑक्सीजन लेवल 10 प्रतिशत तक बढ गया। पाटीदार के अनुसार यह मशीन ऑक्सीजन का विकल्प नहीं है। किन्तु इससे इमरजेंसी में मरीजों कोे राहत दी जा सकती है। पिछले कई दिनों सुसनेर अस्पताल में भी ऑक्सीजन का भारी संकट देखने को मिला है। आरोप यह भी लगे है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण कई मरीजो को समय पर उपलब्ध नहीं होने से उन्हें अपनी जान भी गवाना पड़ी। ऐसे में रोजाना अस्पताल आ रहे गंभीर मरीजो को ऑक्सीजन की कमी से जूझता देख डाक्टर ब्रज भूषण पाटीदार ने डेंटल अस्पताल में काम मे आने वाले कम्प्रेशर मशीन में कुछ मोडिफिकेशन कर एक ऐसी मशीन का जुगाड़ किया जिससे वायुमंडल की हवा को खींचकर मरीज को प्रेशर से दिया जाए तो उसकी ऑक्सीजन की कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सकता है। डॉ पाटीदार बताते है कि पिछले कुछ दिनों से ऑक्सीजन के सिलेंडर की आवश्यकता ज्यादा लग रही थी और रिफिल की भारी समस्या आ रही थी जिससे इमरजेंसी में कई मरीजो को रैफर करने इतनी देर तक भी ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो रही थी। ऐसे में रोजाना मरीजो की परेशानी को देखते हुए उन्हें कुछ देर तक राहत देने के लिए उन्हें इस मशीन को बनाने का ख्याल आया। जिसमे उनके स्टाफ में कार्यरत दीपक सोनी और बंशीलाल ने भी मदद की। ओर डेंटल इलाज में काम आने वाले कम्प्रेशर में कुछ मोडिफिकेश कर दिए और मास्क आदि लगाकर मात्र 20 से 25 हजार के खर्च में यह मशीन बना दी।

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