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नहीं सुधर रहे लोग, अब पुलिस को चलाना पड़ सकते हैं डंडे
उज्जैन। लोगों को हाथ जोड़कर कितना ही समझाया जाए कि घरों में रहना है, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना है और संक्रमण की चेन ब्रेक करना है लेकिन लोग समझने को तैयार नहीं है उन्हें तो भीड़ में जाने का बहाना चाहिए। प्रशासन ने किराना दुकानों को दी गई राहत निरस्त की तो आज सुबह लोगों की भीड़ सब्जी मंडी और फल मंडी पहुंच गई।
प्रशासन और पुलिस कोरोना की दूसरी लहर को ब्रेक करने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन नहीं चाहता कि धार्मिक नगरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना की तीसरी लहर आए जिसके बारे में खबरें आ रही है कि तीसरी लहर और भी घातक हो सकती है। लेकिन जागरूकता की बातें करने वाले शहरी लोग कुछ समझने को तैयार नहीं है। ऐसा नहीं है कि शहर वासियों के लिए प्रशासन कुछ सोच नहीं रहा है, 9 अप्रैल से लगाए गए लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू के बाद पिछले दिनों लोगों की सुविधा के लिए ही सुबह 4 घंटे किराना और ग्रोसरी की दुकानें खोलने का निर्णय लिया गया लेकिन शहर वासी अपने क्षेत्रों की दुकाने छोड़कर दूसरे क्षेत्र और प्रमुख बाजारों तक पहुंचने लगे। बाजार में भीड़ बढ़ गई इस बीच एक चीज और सामने आई कि मक्सी रोड पर रहने वाले गोपाल मंदिर खरीदारी करने पहुंच रहे थे वह भी 100-200 रुपए का सामान लेने के लिए। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने तत्काल ही सोमवार शाम निर्णय ले लिया कि मंगलवार से किराना दुकानें भी नहीं खोली जाएगी। अब किराना, सब्जी और फलों की होम डिलीवरी होगी। आज सुबह सब्जी और फल मंडी को खोला गया था लेकिन लोग यहां भी पहुंच गए कोई आधा किलो अंगूर मांग रहा था कोई एक तरबूज। मंडी में सब्जी और फल का व्यवसाय करने वालों को आने की अनुमति थी लेकिन शहर वासियों ने भीड़ इस कदर बढ़ा दी की चिमनगंज थाना पुलिस को पहुंचना पड़ गया पुलिस देखते ही लोग भागते दौड़ते नजर आने लगे। फल और सब्जी मंडी से ठेला भरकर निकल रहे व्यवसायियों को लोगों ने मंडी के बाहर रोक लिया था व्यवसाई जल्दी फल सब्जी बेचकर घर लौटने की फिराक में एक ही स्थान पर खड़े हो गए थे पुलिस ने जहां लोगों को भगाया वही फल और सब्जी वालों को भी चलते फिरते व्यवसाय करने की हिदायत दी।
पिछले साल जैसा हो लॉकडाउन
धार्मिक नगरी और ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण की चेन तोडऩे के लिए पिछले साल जैसा लॉकडाउन लगा देना चाहिए। तब लोगों को समझ आएगी कि उनकी गलतियों की वजह से ही पुलिस को डंडे चलाना पड़ रहे हैं और उन्हें घरों में कैद रहना पड़ रहा है। पिछले वर्ष कोरोना की दस्तक होने पर एक वर्ग ने दूसरे वर्ग पर संक्रमण फैलाने के कई आरोप लगाए थे लेकिन अब हालात उसके विपरीत नजर आ रहे हैं तब भी लोगों को यह एहसास नहीं है कि यह महामारी धर्म जाति और संप्रदाय को नहीं देखती है। महामारी की चेन तोडऩे के लिए हर वर्ग को प्रशासन की गाइडलाइन का पालन करना होगा।

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