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कैसे टूटेगी कोरोना की चेन..? क्वॉरेंटाइन स्टाफ को 2 घंटे में वापस ड्यूटी पर बुलाया

स्टाफ को घरों में क्वॉरेंटाइन किया गया

माटी की महिमा न्यूज /उज्जैन। कोविड-19 की चेन तोडऩे के लिए जिला प्रशासन के साथ स्वास्थ्य विभाग का अमला लगा हुआ है। आम लोगों को नियमों का पाठ पढ़ाया जा रहा है। लेकिन स्वास्थ विभाग खुद नियमों की अनदेखी कर रहा है। चरक भवन प्रयोगशाला के टेक्नीशियन की 4 दिन पूर्व कोरोना पॉजिटिव आई रिपोर्ट के 3 दिन बाद प्रयोगशाला में कार्यरत स्टाफ को घरों में क्वॉरेंटाइन किया गया। जिन्हें 2 घंटे बाद ही वापस आने का आदेश दिया गया।
गौरतलब हो कि 4 दिन पहले चरक भवन प्रयोगशाला में ड्यूटी कर रहे टेक्नीशियन की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। उसके बाद प्रयोगशाला में काम करने वाले दहशत में आ गए थे। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से प्रयोगशाला को सेनीटाइज किए जाने की मांग की और सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें क्वॉरेंटाइन करने के लिए कहा। 3 दिन बाद बुधवार को प्रयोगशाला स्टाफ के सदस्यों को होम क्वॉरेंटाइन किया गया। उनके घरों पर कोविड-19 का पोस्टर चस्पा किया गया। साथी के पॉजिटिव आने पर स्टाफ पहले ही दहशत में था और उनके घरों पर चस्पा हुए कोविड-19 को देख आसपास के लोग भी दहशत में आ गए। लेकिन होम क्वॉरेंटाइन किए गए स्टाफ को 2 घंटे बाद ही वापस प्रयोगशाला में लौटने का आदेश वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जारी कर दिया गया। होम क्वॉरेंटाइन हुए स्टाफ ने वरिष्ठ अधिकारियों को समस्या बताई लेकिन उन्होंने घरों के बाहर लगे कोविड-19 के पोस्टर फाड़कर ड्यूटी आने के आदेश मौखिक रूप से दे दिए। आज सुबह चरक भवन प्रयोगशाला का स्टाफ ड्यूटी पर लौट आया था। उसके बाद स्वास्थ विभाग द्वारा प्रयोगशाला को सैनिटाइज किया गया। वैसे तो आम लोगों के लिए कोविड-19 के नियम का चित्र दिखाई दे रहे हैं। संक्रमित व्यक्ति के घर के आस-पास बैरिकेट्ड लगाए जा रहे हैं। परिवार में एक सदस्य के पॉजिटिव होने और अन्य के संक्रमित नहीं होने पर भी उन्हें 10 दिनों तक घरों में कैद रखा जा रहा है। कोरोना की चेन तोडऩे का हवाला दिया जा रहा है। कोविड-19 के नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माने की कार्रवाई और जिलाधीश के आदेशों का उल्लंघन करने के प्रकरण दर्ज किया जा रहा है। उसके विपरीत स्वास्थ विभाग लापरवाह नजर आ रहा है। कुछ दिन पूर्व सिविल सर्जन भी कोरोना संक्रमित पाए गए थे। जबकि वह लगातार ड्यूटी के साथ बैठकों में भी भाग ले रहे थे। उनके सैंपल दिए जाने के बाद उनकी रिपोर्ट आने तक का इंतजार नहीं किया गया था। पिछले कुछ दिनों से कोरोना हेल्थ बुलेटिन में अधिकांश शासकीय विभागों और अर्द्ध शासकीय विभागों में काम करने वाले अधिकारी कर्मचारियों की रिपोर्ट ही पॉजिटिव आ रही है। जिस तरह से चरक भवन प्रयोगशाला का मामला सामने आया है उसे देखकर लगता है कि कोरोना की चेन तोडऩा मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो जाएगा। अगर प्रयोगशाला में कोई और पॉजिटिव आया तो स्वास्थ विभाग अपने स्टाफ को किस तरह से संभालेगा।

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