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अभय के समर्थन में आए लोग, कहा- डॉ.कुमरावत के आरोप निराधार

मामला: माधवनगर अस्पताल में मंत्री प्रतिनिधि पर लगाए बेड बेचने के आरोप का
उज्जैन। कोरोना संक्रमण के इस दौर में शहर के कई लोग अपने-अपने स्तर पर लोगों की मदद कर रहे हैं। कोई सिलेण्डर, कोई भोजन, कोई राशन तो कोई अस्पताल में मरीजों की सेवा में लगा है। लेकिन कुछ कतिपय लोगों को समाजसेवियों की यह सेवा रास नहीं आ रही है और वह उन पर आरोप प्रत्यारोप लगाने का दौर शुरू कर देते हैं। एक ऐसा ही मामला माधवनगर अस्पताल का आया है है यहां के प्रभारी रहे डॉ. संजीव कुमरावत ने उच्च शिक्षामंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रतिनिधि अभय विश्वकर्मा पर बेड बेचने का आरोप लगा दिया। जबकि अभय विश्वकर्मा माधवनगर अस्पताल में विगत 1 साल से निस्वार्थ भावना से सेवा दे रहे हैं।
डॉ. कुमरावत के इस झूठे आरोपों का शहरभर के नागरिकों ने खंडन किया है। लोगों ने कहा है कि माधवनगर अस्पताल में जबसे डॉ. कुमरावत ने प्रभार संभाला तब से वहां की व्यवस्थाएं बिगड़ गई। डॉ. कुमरावत से वहां का मेडिकल स्टाफ परेशान था। वहीं डॉ. कुमरावत ने कुछ दिनों पूर्व एक पत्रकार पर भी मुकदमा दर्ज करा दिया था। डॉ. कुमरावत माधवनगर अस्पताल में अपनी मनमर्जी से लोगों का इलाज कर रहे थे। जब कुछ समाजसेवी मरीजों के इलाज में हो रही कौताही का विरोध करते थे तो डॉ. कुमरावत उन पर प्रकरण दर्ज कराने की धमकी देते थे। लेकिन भगवान के घर देर है अंधेर नहीं इसी वाक्य को चरितार्थ करते हुए कलेक्टर ने डॉ. कुमरावत को नागदा के बीमा हॉस्पिटल का प्रभारी बना दिया। वहां का प्रभारी बनते ही माधवनगर स्टाफ में हर्ष है वहीं मरीजों के परिजनों में भी खुशी व्याप्त है। अभय विश्वकर्मा के समर्थन में कई लोगों ने अपने वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उनकी सेवा की सराहना की।
डॉ. कुमरावत द्वारा लगाए आरोप झूठे- मंत्री प्रतिनिधि विश्वकर्मा


माधवनगर हॉस्पिटल से हटाए गए डॉ. संजीव कुमरात द्वारा बेड में हेरफेर कर आमजन की जान से खिलवाड़ करने के आरोप को उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रतिनिधि अभय विश्वकर्मा ने पूरी तरह से झूठा बताया है। अभय ने इस मामले में कलेक्टर आशीषसिंह को शिकायत कर दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अभय ने कहा कि मेरे द्वारा कोरोना महामारी में नि:स्वार्थ सेवा प्रदान की गई है। डॉ. कुमरावत द्वारा दी गई जानकारी पूरी तरह असत्य है तथा पूर्णत: निंदनीय है। इस मामले की जांच कराई जाए तथा दोषी के विरूद्ध ठोस कार्रवाई हो। जिससे भविष्य में ऐसे गुमराह करने वाले व्यक्तियों पर उचित कार्यवाही हो। अभय ने बताया कि इस महामारी आपदा से जूझ रहे निर्धन असहाय लोगों की हरसंभव सामाजिक संस्थाओं से सहयोग दिलाकर हमारे द्वारा मदद की जाती रही है। माधवनगर जिला चिकित्सालय में आने वाले अत्यधिक आर्थिक संकटों से गुजरने वाले पीडि़त व्यक्ति ही होते हैं, आर्थिक रूप से संपन्न लोग तो सर्वसुविधायुक्त अस्पतालों में ही इलाज करवाते हैं। माधवनगर अस्पताल में आने वाले आर्थिक अभाव में किसी अनहोनी, परेशानी से न गुजरें इसलिए पीडि़त व्यक्तियों की समस्या के समाधान हेतु सांसद अनिल फिरोजिया, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव को बारंबार अवगत कराया तथा असहाय लोगों को उचित उपचार और सुविधाओं का लाभ प्राप्त करवाया है। ऐसे में डॉ. कुमरावत का इस तरह का बयान दुखद है।

मैं पिछले 1 साल से अभय को माधवनगर अस्पताल में निस्वार्थ सेवा करते देख रहा हूं। उसकी जितनी सराहना की जाए उतनी कम है। दिन रात अभय मरीजों की मदद करता हैं। मैंने खुद मेरे परिचितों की मदद के लिए कहा उसने मदद की। पैसे लेकर बेड बेचने की बात हास्यास्पद है।


प्रकाश चित्तौड़ा, पूर्व निगम सभापति
मेरी बहन नजमा खान शिक्षिका है। उसको कोरोना संक्रमण हो गया था और लगातार तबीयत खराब हो रही थी। आसीयू की जरूरत थी। पूरे शहर में आयसीयू बेड नहीं मिला। तब अभय जी से संपर्क हुआ तो उन्होंने तुरंत माधवनगर अस्पताल में बेड उपलब्ध कराकर मेरी बहन की जान बचाई।


मोहम्मद इब्राहीम खान
मेरे पापा की कोरोना के कारण तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी। तब उन्हें माधवनगर अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां मेडिकल स्टाफ ने मेरे पापा का पूरी तरह से ध्यान रखा। अभय विश्वकर्मा ने भी हमारी बहुत मदद की। बेड बेचने के उन पर आरोप लगाना निराधार है।


निखिलेश सोलंकी
मेरे पापा केशव कुमार भिंडे कुछ सप्ताह पहले कोविड पॉजीटिव आए थे। उनका ऑक्सीजन लेवल कम हो रहा था। तब मेरे परिचित ने अभयजी का नंबर दिया तब उनसे बात हुई। उन्होंने तुरंत बेड उपलब्ध कराया और पापा का इलाज अस्पताल में हुआ। अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। अभयजी ने हमसे किसी प्रकार की कोई पैसों की मांग नहीं की। उन पर लगे आरोप झूठे हैं।


पलक भिंडे
मेरे पिता लक्ष्मण राय को कोरोना हुआ था। उनको लेकर मैं कई अस्पतालों मे भटका कहीं जग नहीं मिली। अभयजी के माध्यम से मुझे माधवनगर अस्पताल में बेड की व्यवस्था हुई। वे निस्वार्थ सेवा लोगों की कर रहे हैं। मेरे पिता स्वस्थ होकर घर आ गए हैं। ऐसे आरोप उन पर लगाना गलत साबित होता है।


मुकेश राय
मेरी दादी कमला शर्मा को कोरोना होने के बाद माधवनगर अस्पताल में अभय विश्वकर्मा के माध्यम से भर्ती किया था। उनका ऑक्सीजन लेवल लगातार कम हो रहा था। माधवनगर से पहले मैं कई अस्पतालों में भटका, यहां तक कि चरक भवन में भी बेड की व्यवस्था नहीं हो पाई। मेरे लिए एक एक पल कीमती था। तभी अभय के माध्यम से दादी को माधवनगर में भर्ती किया गया।


रित्विक तिवारी
मैं खुद कोविड पेशेंट था और कुछ दिन पहले ही डिस्चार्ज हुआ हूं। मेरी हालत गंभीर थी। अभय विश्वकर्मा ने मेरी मदद की और मुझे माधवनगर अस्पताल में भर्ती कराया। उन्होंने मेरी निस्वार्थ सेवा की। ऐसे व्यक्ति पर बेड बेचने का आरोप लगाना गलत है। मेरे सामने ही उन्होंने कितने लोगों की मदद की। इसकी गिनती भी नहीं की जा सकती है।


विकास मालवीय
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा डॉ. कुमरावत का स्क्रीन शॉट


बेड बेचने की खबर के बाद सोशल मीडिया पर डॉ. संजीव कुमरावत का एक स्क्रीन शॉट भी वायरल हो रहा है जिसमें वह नगर निगम आयुक्त और कोविड प्रभारी क्षितिज सिंघल को मैसेज करते हुए लिख रहे हैं सर आपसे एक रिक्वेस्ट है मुझे माधवनगर से रिलीव करा दें। यहां बहुत परेशानी है। फायनेंस पावर भी नहीं है। मैं होटल में ठहरा हूं। अभय ने अस्पताल को हाईजेक कर रखा है। नागदा में भी 50 बेड का कोविड अस्पताल शुरू हो रहा है मुझे वहां भेज दें। यह मैसेज डॉ. कुमरावत ने 1 मई को किया था। उनका स्क्रीन शॉट वायरल होते ही शहर में कई तरह की चर्चा हो रही है।

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