Domain Registration ID: DF4C6B96B5C7D4F1AAEC93943AAFBAA6D-IN Editor - Rahul Singh Bais, Add: 10, Sudama Nagar Agar Road Ujjain M.P. India, Mob: +91- 81039-88890


कोरोना के खिलाफ दोहरे संघर्ष को मजबूर जिले के कोरोना रेड झोन में शामिल संधारा गांव

संधारा (प्रतीक बापना)। एक तरफ कोरोना देश – प्रदेश में कहर बनकर बरस रहा है वहीं दूसरी तरफ विडंबना है कि स्वास्थ्य संसाधनो का अभाव मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। इसमें अस्पताल, बेड, दवा ओर बिस्तर की कमीं तो अपनी जगह है ही लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की गैर मौजूदगी हालातों को बेकाबू बनाने का काम बखूबी कर रही है। चिकित्सकों के अभाव से संघर्ष झेलने वाले गांवों में संधारा भी शामिल है जहां करीब 45 संक्रमित मरीजों का उपचार करने के लिए एक भी डाॅक्टर मौजूद नहीं है। परिणाम स्वरूप गांव की स्थिति बेहद चिंताजनक बनती जा रही है।
उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी की त्रासदी ने इस बार महानगरों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक भयंकर हाहाकार मचा दिया है। जिससे शहरों के साथ गांवों में भी संक्रमित मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या शासन – प्रशासन के लिए चुनौती बढ़ा रही है। एसे में स्वास्थ्य संसाधनो का अभाव इस चुनौती को चिंता में बदलने का काम कर रहा है। चुनौती और चिंता की दोहरी मार झेलने वालों में मंदसौर जिले की भानपुरा तहसील अंतर्गत ग्राम संधारा के ग्रामीण भी शामिल हैं जिनको संक्रमित होने के बाद इलाज के लिए डाॅक्टर भी नसीब नहीं हो रहे हैं। बड़ी बात यह है कि गांव में कोई 2 – 4 या 8 -10 मरीज ही संक्रमित नहीं है बल्कि 4 दर्जन के करीब  ग्रामीणों के कोरोना की चपेट में आने के बाद भी यहां स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव बड़ी परेशानी पैदा कर रहा है ओर यह स्थिति बढ़ती संख्या के साथ निरंतर बढ़ती जा रही है। गांव में करीब 45 मरीजों के कोरोना प्रभावित होने के कारण संधारा जिले के रेड झोन एरिए में शामिल हो चुका है इसके बावजूद उपचार के लिए किसी डाॅक्टर का उपलब्ध नहीं होना मरीजों के साथ परिजनों ओर ग्रामीणों के लिए भारी मुसीबत का सबब बन गया है। जिसके चलते जहां इलाज के लिए मरीज परेशान हो रहे हैं वहीं दूसरी ओर सामान्य बिमारी का भी समय पर उचित उपचार नहीं मिलने से बिमारी बढ़ रही है ओर गांव में भी संक्रमण फैलने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इसके अलावा बीते कुछ दिनों से गांव में असमय मृत्यु के आंकड़े में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिससे  ग्रामीणों में भय ओर घबराहट भी पैदा हो रही है।गांव में पैर पसार रही बिमारी की गंभीर स्थिति को देखते हुए जागरूक ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार, मंदसौर जिला प्रशासन ओर स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि  बिना देर किए तत्काल चिकित्सक एवं आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था गांव में की जाए ताकि समय रहते जनहानि को रोका जा सके।
सप्ताह में एक दिन आते हैं  बीएमओ बाकि दिन मरीजों भगवान भरोसे  
जब इस मामले को लेकर ग्रामीणों से चर्चा की गई तो पता चला कि गांव के शासकीय स्वास्थ्य केंद्र का जिम्मा ब्लाॅक मेडिकल ऑफिसर के पास है जो सिविल हास्पीटल भानपुरा की व्यवस्था भी संभालते हैं। एसे में वे सप्ताह में एक दिन गांव में आते तो हैं लेकिन उनकी कुछ वक्त की मौजूदगी से मरीजों की समस्या का स्थायी हल नहीं निकल पाता। क्योंकि जब वे यहां से चले जाते हैं उसके बाद मरीजों को उपचार संबंधी समस्या उत्पन्न होने पर किसी तरह की राहत नहीं मिल पाती। इसके साथ ही स्थायी चिकित्सक नहीं होने के कारण आपात स्थिति में भी मरीजों को प्राथमिक उपचार मिलना असंभव हो जाता है। संकटकाल में इस सनातन समस्या से भगवान भरोसे संघर्ष कर रहे संधारावासियों को गांव में स्थायी चिकित्सक की कमी बेहद खल रही है।
– इनका कहना है 
यह सही है कि संधारा में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। एसे में स्थायी चिकित्सक की अत्यंत आवश्यकता है। मैं ब्लाॅक मेडिकल ऑफिसर हूं, मेरे पास सिविल हास्पीटल भानपुरा ओर स्वास्थ्य केंद्र संधारा दोनों का चार्ज है। एसे में सप्ताह में एक दिन मैं वहां बैठ पाता हूं। चिकित्सक की कमीं के चलते वैकल्पिक तौर पर वहां सुपरवाईजर, एमपीडब्ल्यू, एन.एम.को तैनात कर रखा है। ताकि मरीजों को सहयोग मिल सके लेकिन बगैर स्थायी  चिकित्सक के यह काफी नहीं है। अब यह व्यवस्था शासन को करना चाहिए कि गांव की स्थिति देखते हुए यहां स्थायी चिकित्सक की नियुक्ति की जाए।
– बी.एल.सिसोदियाब्लाॅक मेडिकल ऑफिसर भानपुरा।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!